अगले महीने लॉन्च होगी 'सबके लिए आवास' स्कीम
सरकार पीएम मोदी की सबसे महत्वाकांक्षी स्कीम को लॉन्च करने के लिए तैयार हो रही है। इसके तहत 2022 तक सबको घर देने की बात है। मोदी इस स्कीम को व्यापक मिशन के तहत लॉन्च कर सकते हैं, जिसमें सस्ती घरों वाले सभी हाउसिंग और स्लम री-डिवेलपमेंट प्रॉजेक्ट्स को जोड़ा जाएगा।
शहरी इलाकों में 2 लाख और ग्रामीण इलाकों में 4 लाख घर उपलब्ध कराने के लिए शहरी विकास और ग्रामीण विकास मंत्रालयों ने अपनी-अपनी योजनाओं को अंतिम रूप दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री को इस स्कीम को लॉन्च करने के लिए वक्त निकालना है और यह जून के मध्य तक हो सकता है। एक सूत्र ने बताया, 'तमाम मंत्री सरकार की पहली सालगिरह से जुड़े कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। इसके बाद हम फाइनल लॉन्च के लिए पीएम के वक्त दिए जाने का इंतजार कर रहे हैं। यह काफी बड़ी पहल है, लिहाजा इसकी लॉन्चिंग कायदे से होगी।'
सरकार ने पहले इस योजना को सरदार पटेल मिशन के नाम पर रखने की तैयारी की थी। अब देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मद्देनजर इसका नामकरण किया जाएगा। इस नए मिशन में हाउसिंग एवं गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण विकास मंत्रालय की तमाम मौजूदा स्कीमों को शामिल किया जाएगा। एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया, 'राजीव आवास योजना, राजीव ऋण योजना जैसी तमाम स्कीमों को इस मिशन के तहत शामिल किया जाएगा।'
इस मिशन का एक अहम हिस्सा झुग्गियों का री-डिवेलपमेंट भी होगा। इसके तहत लैंड पूलिंग कर कर इसे प्राइवेट रियल स्टेट डिवेलपर को दिया जाएगा। झुग्गियों में रहने वाले लोगों को रियल एस्टेट डिवेलपर की तरफ से बनाई गई मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग में मुफ्त में फ्लैट दिए जाएंगे। सरकार इसी जमीन के एक हिस्से में डिवेलपर्स को कमर्शल कंस्ट्रक्शन की भी इजाजत देगी, जिसके जरिए डिवेलपर्स कमाई कर सकेंगे। शहरी विकास मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने बताया, 'कुछ प्रॉजेक्ट्स में सरकार फंडिंग की कमी की भी भरपाई करेगी।'
सरकार आर्थिक रूप से कमजोर तबकों और लोअर इनकम ग्रुप की कैटिगरी में आने वाले लोगों को घर बनाने के लिए लोन पर इंटरेस्ट सब्सिडी में भी बढ़ोतरी की तैयारी में है। सूत्रों ने बताया कि नए मिशन के तहत सब्सिडी बढ़ाने के साथ-साथ लोन की राशि भी 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये की जा सकती है। इस मिशन का एक और अहम कंपोनेंट किसी जरुरतमंद शख्स को घर बनाने या इसे अपग्रेड करने के लिए तत्काल सहायता भी है। नई स्कीम के तहत इसकी राशि भी दोगुनी किए जाने की संभावना है।................(Courtesy मनोज रतन )
यूपीए शासनकाल में देश के दूसरे राज्यों में लागू की गई प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना अब सूबे में भी लागू होगी। इस योजना के केंद्र में दलित बहुल राजस्व ग्राम होंगे। केंद्र सरकार न सिर्फ इन गांवों के विकास के लिए अलग से बजट देगी बल्कि केंद्रीय योजनाओं का लाभ भी इन्हें प्राथमिकता पर मिलेगा।
यूपी की सियासत में दलितों की अहम भूमिका और 2017 के चुनाव के लिहाज से मोदी सरकार की इस पहल को अहम माना जा रहा है। शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि पीएम आदर्श ग्राम योजना यूपीए सरकार ने 2009-10 में शुरू की थी।
राजस्थान व बिहार जैसे राज्यों में यह योजना पहले से लागू है। केंद्र ने तब यूपी में इसे लागू नहीं किया। वह बताते हैं,हो सकता है कि केंद्र ने तब यह सोचकर योजना से किनारा कर लिया हो कि कहीं सूबे तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी बसपा नाराज न हो जाए। वजह, मायावती यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रही थीं।
दूसरा, मायावती अपने को दलितों की सबसे बड़ी नेता मानती हैं और यूपी उनकी सियासत का गढ़ है। सूबे में कोई दूसरा दलितों के लिए कुछ करने के लिए आगे बढ़ता है तो उन्हें उसमें सियासत नजर आती है। तब की केंद्र सरकार बसपा को नाराज कर ऐसा जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं थी। लेकिन मोदी सरकार के लिए ऐसी स्थिति नहीं है।