क्या NDTV Ravish Kumar का निशाना विहार चुनाव मे लोगो को जातीय मुद्दे पर भड़का कर तोडना है ?

            

Aditi Gupta  to डियर Ravish Kumar ,

कल रात आपका स्टेटस पढ़ा. जिसे पढ़ कर हँसते हँसते गिर पड़ी (स्टेटस का स्क्रीन शॉट साथ दिया हैं ) .. जिसमें आप कह रहे हैं की ( मेरे कमेंट में जाकर गाली देने वालों की सामाजिक पृष्ठभूमि का अध्ययन कर सकता है ) आप इशारो में मोदी भक्तो पर निशाना साध रहे हैं.... लेकिन आप की भक्तों से चिढ़न हर कोई जानता है.

लोग आज ये भी जानते हैं की कि आप कैसे लोगों की सामाजिक पृष्टभूमि का उपहास उड़ाते हैं... जो भी आपसे सहमत नहीं है उसे आप भक्त की ही केटेगरी में रख देते हैं. और आप कितने तठस्त हैं वो आपकी हर टीवी डिबेट में दिख जाता है.प्राईम टाईम मे आप एक तरफा मैच खेलकर निकल लेते हो ... अपने निजी स्वार्थ के लिए आप एक को गलत ओर दुसरे को सही दिखाते हो.... आप कभी विचार करना रवीश जी एक वक्त था जब लोग आपका प्रोग्राम देखते और आपको पसंद करते और एक वक्त आज है कि आपकी शक्ल देख कर ही लोग चैनल बदल देते हैं चाहे कोई और ही टीवी क्यों न देख रहा हो.....रवीश जी, किसी पार्टी विशेष की चमचागिरी कर के आप पैसे कमा सकते हैं, इज्जत नहीं... मैं ये नहीं कहती कि आप मोदी जी पर कमेंट मत करिए या राहुल गांधी पर कमेंट करिए, मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि उस बात का समर्थन करिए जो सच है. और सच क्या है ये आप भी जानते हैं....टीवी पर आपका संवाद अमूमन एक तरफा होता है इसीलिए आप उसमे एक हाथ कुर्सी पर रखे विजय दीनानाथ चौहान टाइप डायलॉग बाजी करके अपने आप को अमित्ता बच्चन होने की ग़लतफ़हमी पाल लेते हैं..
लेकिन जब आप सोशल मीडिया पार आते हैं तो ये भूल जाते हैं यहां मामला 360 डिग्री फीडबैक का है..और यहां आपके सामने कोई TRP के लिए रिरियाते और भाषा से बंधे पार्टी प्रवक्ता नहीं हैं बल्कि ऐसे लाखों जज्बाती लोग हैं जो आप ही लोगों को मसीहा समझ के..आप द्वारा फैलाये गए मायाजाल के भ्रम में आकर अपने नेता चुनते आये हैं...लेकिन फेसबुक मिडिया नही बल्कि सोशल मिडिया है यहा आप जैसे निजी स्वार्थो पत्रकारों कि बत्ती बना दी जाती है यहा हर हिंदूवादी और राष्ट्रवादी सचिन और धोनी है जो खुलकर अपने विचारो को छक्का मारकर सीमा पार करा देता है.... वो भी सोचते है कि मिडीया कि दलाली की असली तस्वीर मिडिया के परिवार, दोस्त, बुजुर्गो को टैग करु लेकिन रुक जाते क्योकि परिवार और दोस्तो को बीच मे क्यो लाया जाये ...... आपको यहाँ एक बात समझनी होगी आप जो लालू कचालू आम अमरुद को हीरो बना कर देश को भ्रमित कर रहे हो ना ये यहाँ बैठे राष्ट्रवादी लोग होने ना देंगे क्योकि इनके लिए हमेशा राष्ट्र प्रथम ही रहेगा चाहे सामने इनका हीरो ही खड़ा हो ।
रवीश जी आपसे कुछ सवाल या यू समझ ले की आपको इन बातो पर विचार करने की आवश्यकता हैं....क्या आपका प्लान नही की लोगो को जातीय मुद्दे पर भड़का कर तोडना ? और आप इसी प्लान पर काम कर रहे है और आपका निशाना विहार चुनाव है ? इसलिए आप सारे मोदी विरोधी संगठित हो गए हैँ।
आपको नही लगता की आपको गलतफहमी हैं आपको लगता हैं आप महाज्ञानी हैं जिसको धर्म से लेकर अर्थशास्त्र और राजनीती से लेकर साइंस तक की सब जानकारी है... आपको याद हो तो पिछले दिनों ग्रीस संकट की वजह से शेयर बाजार में गिरावट आई तो आपने ने इसके लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार माना.... लेकिन जिसे थोड़ी बहुत समझ है शेयर बाजार की वो तभी समझ गया की ये पत्रकार नही दलाल हैं!आजकल बड़ा शोर है NDTV और चिदंबरम के 1100 करोड़ के घोटालो का आपने अब तक उस पर कोई बहस क्यों नहीं की अपने चैनल पर ?
अभी कुछ दिनो पूर्व आपके प्रिय साथी केजरीवाल जब आपने एक पुराने साथी को गाली दे रहे थे और तब उनक़े बचाव मे आपके एक ओर प्रिय म़ित्र कविराज कह रह थे कि उनके पिता भी उन्हे गुस्से मे गाली दे कर बाते क़रते है तब आपकी कोई विशेष टिप्पड़ी नही सुनी ओर अब आप गाली देने पर इतना नाराज हो रहे है इतनी नाराजगी किस लिये ??
हशिमपुरा का 18-20 मुस्लिम के हत्या एवम उसको न्याय न मिलने को आप रोज टी वी पर दिखाते पर 10 लाख कश्मीरी पंडितों का खून और विस्थापन पर आप क्या दिखाते है ? सब जानते है मोदी के खिलाफ आपने पूरी तरह लोकसभा का कैम्पेन किया.. बिहार मे सबसे कहा था राज ठाकरे मोदी का दोस्त है तो बिहारी मोदी को वोट क्यू दोगे? पर आपने कभी किसी से ये नही पूछा कि लालू ने बिहार को जंगलराज बनाया तो उसे वोट क्यूँ दोगे? अब आप बताओ बिहार कि यह हालत लालू ने बनाई या ठाकरे ने? अगर बिहारी मुंबई जाके ठाकरे से मार खाता है तो जिम्मेदार ज्यादा लालू है या ठाकरे ?
आप जैसे पत्रकारों का पुराना सेक्युलरवादी तरीका है पहले एक तरफा भड़काऊ तथ्य विहीन और हिन्दू विरोधी रिपोर्टिंग करना फिर जब कोई तथ्य और तर्क रखे तो हिराकत से व्यवहार रखना उपेक्षा और उपहास उड़ाना... तो कब तक सेकुलरिज्म का चोला ओढकर जेहादी उन्माद और चर्च की करतूतो पे पर्दा डालते रहेंगे? कब तक रैशनलिज्म के नाम पे सिर्फ हिंदू समाज और संगठनो को गरियाते रहेंगे ?

                           


                           
                    (उमेश सिंह : आज तक मै इस पहेली को बूझ नहीं सका इशरत के अब्बू कंगाल मुल्क 
                            पाकिस्तान से कौन सी टेक्नोलॉजी लेने गए थे ? या सीमा विवाद हल करने गए थे ??

खैर राष्ट्रवादियो , हिंदूवादीयो और मोदी भक्तों से आपको कुंठा स्वाभाविक है....क्यूंकि ऐसा पहली बार हुआ है कि सोशल मीडिया मेन स्ट्रीम नरेशन पर भारी पड़ा है..आपके आभामंडल की सच्चाई आपसे और आप जैसे बहुत से "ऐंकरों" से नहीं पचाई जा रही. इसीलिए आप अपनी कुंठा को "भक्त" "समाजिक पृष्ठभूमि" "भाषा" की आढ़ में हमला करके मिटा लेते हो. जबकि आप सीधी सी बात नहीं समझ पाते कि जब तक सोशल मीडिया नहीं था आप ही साधारण आदमी की क्रांति के अगवा थे. सोशल मीडिया आने के बाद जब इनफार्मेशन सबको अवेलेबल होने लगी तब साधारण आदमी का भरोसा गुस्से में बदला कि जिनके भरोसे उसने देश छोड़ रखा था दरअसल वो एंकर थे..जो एक तय शुदा स्क्रिप्ट पर चलते थे..और उनके मास्टरों के रिमोट कहीं और ही थे.... आज आप जैसे पत्रकार लच्छेदार भूमिका और अति प्रबुद्ध लगने वाली बातों से अगर ये सोचते हों कि उनके दर्शक उनके मुखौटे के पीछे का चेहरा नहीं देख पा रहे हैं तो आप फूल्स पैराडाइज़ में जी रहे हैं. सोशल मीडिया की पहुंच, और उसके प्रभाव का आपको शायद अभी अनुमान नहीं हो पाया है . इस बात का एहसास भी नहीं है कि ये आपके स्टूडियो की अदालत नहीं है जहाँ अति बुद्धिमान और फाइनल जज सिर्फ आप हैं और आपकी अदालत में बैठे आपकी मेहरबानी के मोहताज penalists सिर्फ आपस में लड़ सकते हैं, सुप्रीम जज को कुछ नहीं कह सकते.
अब आप ही बताइये मैं किस से शिकायत करुँ. मैं किसको स्क्रीन शॉट भेजूं कि देखो ये आदमी जो टीवी पर तठस्थता का झंडा उठाये दिखना फिरना चाहता है उसकी खुद की राजनैतिक चॉइस क्या है. और फिर पानी पी कर ऐसे लोगों को भक्त कह कह के कोसता है जो जज्बाती भले हो..और भले ही उनका भाषा ज्ञान कम हो लेकिन देश के प्रति निरादर का भाव उनमें अंश मात्र नहीं है.बताइये मैं किस से शिकायत करूँ कि जिसको टीवी देख देख के हीरो समझा था..वो असल जिंदगी में इतना उथला निकला ?

Social Media comments : Amandeep Mudha Can anyone Tell me when did Ravish criticised Lalu for his being convicted unqualified for election but for Modi He keeps dragging gujarat riots where modi faced judiciary and came out clean !! What is difference between haitauba of asutosh n rubbish?

Maithily Gupta बेचारे रविश ने रविश की रपट से जो कुछ इज्जत कमाई थी, सब मिट्टी में मिलती जा रही है. frown emoticon

Nimai Sadhu Ravish is totaly rubbish