Who says that Hindu can't bow his head on Muslims feat, But There is a condition Muslim must be worthy enough. We bow down to great Patriot Personalities and We cut head of Terrorists. We have Vedas in one hand and Shashtra on other. This statement is proven on a same day. On the one hand Narendra Modi hang Yakub and on the other He touched the feet of Kalam family head with his head. Hindu must understand and everyone must understand Bharat has this feature on thousands of years, We welcome everyone, We accept Knowledge, But We retaliate with same energy with brutal force to bury if someone try to disturb harmony. No mercy, Time is now that every Indians start thinking like this and Government too behave like this.
क्या भारतीय होना इस्लाम के खिलाफ है? ( A humble advice to All peace loving people, kindly read and discuss to find a logical and true answer.)
कलाम साहब को ले कर मुसलमानों के जो कुछ छुटपुट उल-जलूल पोस्ट्स या ट्वीट्स आ रहे हैं उस से एक दर्द सा उठता है दिल मैं । लेकिन इस बात का एक बुनियादी पहलू मेरे समझ में जो आ रहा है, पेश कर रहा हूँ । Canvas बड़ा है इसलिए कनैक्शन थोड़े लूज लग सकते हैं । कृपया धैर्य से पढ़ें और सोचें, या फिर मर्जी आप की ।यूं देखने जाये तो इन लोगों को पहले से पता होगा ही कि उनके विरोध से मुसलमान की छबि और भी खराब होगी । सोशल मीडिया में और मुख्यधारा में भी मज़ाक उड़ाया जाएगा ये भी अंदेशा होगा, तो फिर क्यूँ?
एक वाक्य को देखिये तो इसके पीछे की मनोभूमिका समझ आने लगेगी । “कोई भी जीत छोटी नहीं, कोई भी हार बड़ी नहीं’ । दर उल इस्लाम और दर उल हर्ब आप को पता ही होगा । जो मुल्क इस्लामी नहीं वो इस्लाम के शत्रुओं का है (दर उल हर्ब) और उसे इस्लाम के सत्ता में लाना इस्लाम का ध्येय होता है । यह निरंतर संघर्ष के सिवा अशक्य है और हर संघर्ष रण नहीं होता, ना ही उसमें हिंसा होती है । लेकिन संघर्ष होता है और उसमें हार जीत तो होती रहती है ।
उत्पात के महागुरु Saul Alinsky के नियम सब जगह लागू होते ही हैं । समाज में संघर्ष पैदा कैसे किए जाते हैं उस पर उनका सुंदर विवेचन है । उनके 7 वे और 8वे नियम यहाँ लागू होते दिख रहे हैं -....लोगों को interested रखने के लिए हमेशा नया कुछ करते रहिए ताकि लोग साथ देते रहेंगे । (7) ......और – विरोधियों को सांस न लेने दें, हमेशा कुछ नया तरीका ढूंढ निकाले उनपर हमला करने का । अगर आप के एक तरीके को वे समझ जाते हैं तो कुछ और नया, अनपेक्षित करिए ।(8)
इन दोनों नियमों को हम रोज चरितार्थ होते देख ही रहे हैं । कहीं न कहीं किसी न किसी बहाने ये इस्लाम को खतरे में ला देते हैं । कभी बांग देनेवाले लाउड स्पीकर की आवाज जान बूझ कर बढ़ाने का मामला हो या आरती के लिए लगाए लाउडस्पीकर उतरवाने हों । सिनेमा के किसी दो मिनट के प्रसंग से या किसी किरदार के नाम पर या कोई सीन पर भावनाएँ आहत करवानी हों या दुनियामें कहीं भी अपने कर्मों के कारण गैर मुस्लिमों के हाथों मार खाये मुसलमानों के लिए सहानुभूति दिखाने के लिए हिंसक मोर्चा निकालना हो । कोई भी हथकंडा जायज है अगर वो इनकी सामाजिक दहशत बरकरार रखता है । ये भी उनके लिए जीत है जो उनके अनुगामियों को interested रखता है । जहां भी विपक्ष टंटा न बढ़ाने की नीयत से मामला छोड़ देता है वहाँ ये अपने जीत समझते हैं और इसी भावना को प्रचारित करते हैं ताकि अनुयायी जुड़े रहें ।
आप ने अगर उनके नेताओं के भाषण देखें या सुने होंगे तो हर अपील इस्लाम के नाम पर होती है तथा हर जीत का श्रेय इस्लाम को दिया जाता है । इसके कारण हर किसी को दर उल हर्ब में अपने कर्तव्य का पालन करने की प्रेरणा हासिल होती है । कभी कोई सामूहिक एक्शन में भाग ले, या फिर कोई बहस में भी इस्लाम का पक्ष defend करें, कहीं तो वो इस्लाम के लिए काम कर रहा है । ये कर्तव्य भावना ही उनके नेताओं के सौदेबाजी की ताकत है ।
अ-घुलनशीलता में ये शक्ति समझते हैं । कैसे, ये समझ लें । परिवेश में ये कुछ न कुछ कपड़े या और कोई चिह्न का अंगीकार करेंगे जिससे इनका मुसलमान होना अधोरेखित होगा । अपने आप में लोग दूरी बनाएँगे ताकि उनसे उलझे नहीं । इसका गलत फायदा भी भरपूर उठाते हैं उठानेवाले, बहुतों को कोई न कोई किस्सा तो याद होगा ही । इसको भी एक बड़ी सफलता मानी जाती है जिसकी बाकायदा डींगे हाँकी जाती हैं – मियाभाई से कोई पंगा नहीं लेता भाय ! अपुन कुछ बी करें....कि मैं झूठ बोलिया? ...........यहाँ तक अगर आप सहमत हैं तो बहुत सारी situations आप को अपने आप समझ में आएगी, in fact, ये पढ़ते पढ़ते ही कई प्रसंग स्मरण - समझ में आ गए होंगे ।
अब आते हैं इस लेख के शीर्षक पर – क्या भारतीय होना इस्लाम के खिलाफ है? कलाम साहब को क्यों Murtid कहा जा रहा है ? क्यों उनके वीणा वादन या गीता का अभ्यास इत्यादी को कोसा जा रहा है ? जो भी कहा जा रहा है, बस “इस्लाम से खारिज” यही कहना बाकी रहा गया है । शायद पद की गरिमा के कारण ही कह नहीं रहे हों । उस से भी दुख की बात यह है कि इक्का दुक्का राष्ट्रभक्त मुसलमान (हैं, और गर्व है कि मित्र सूची में हैं) छोड़कर बाकी सभी भारत में रहनेवाले मुसलमान इस पर चुप्पी साधे हैं । या फिर गरियाने जाने या फिर और भी कोई डर से चुप हैं ।
इस से क्या लाभ होंगे इनको?..............इनको सब से बड़ा लाभ होगा कि मुसलमान की छबि खराब होगी । जी हाँ, यह इनके लिए लाभ ही है ! Behaviour pattern देखिये, समझ में आएगा । हिन्दू और मुसलमान के बीच दूरी बढ़ेगी । Opportunities के दरवाजे बिना कुछ directly कहे, बंद हो जाएँगे । मौके नकारे जाने पर automatically वो मुसलमान, मुस्लिम समाज से ज्यादा जुड़ेगा जिसके मन पर इनका कब्जा है । समाज के साथ, समाज में रहना है तो समाज जो कहे, समाज जो करे वो करना होगा । और समाज इनके शिकंजे में है । शिकंजा और मजबूती से कसता जाएगा । कश्मीर में यही हुआ था। आजमाया हुआ फॉर्मूला है । नफरत भी बढ़ेगी । मौका नकारा गया युवा का मन नफरत के खेती के लिए सब से उपजाऊ जमीन हैं !


तो आप समझ ही गए होंगे कि अविरत संघर्ष क्यों और कैसे जारी है । संघर्ष के लिए इस्लामी पारिभाषिक शब्द से आप परिचित होंगे ही – जिहाद ! लक्ष्य के लिए किया गया हर संघर्ष आप इस नजरिए से जब समझेंगे तो समझ आएगा कि मिलनसार, अच्छे दोस्त वगैरा सब गुण होते हुए भी ये समाज मुख्यधारा में घुलता क्यूँ नहीं है ।संघर्ष के लिए एक और शब्द या कहो मुहावरा, प्रचलित है – जद्दोजहद !...न जाने क्यूँ मुझे ये शब्द हमेशा ‘जिद और जिहाद’ सुनाई देता है । आप को?.......इनके नेताओं का performance index देखें तो यही है । नफरत बढ़ाना और मौके नकारे जाने का रोना रो कर नफरत को और बढ़ाना । जहां कुछ स्टैंडर्ड की शिक्षा पा कर मुस्लिम बच्चे भी मुख्यधारा में जुड़ सकते हैं, नए पीढ़ी के कलाम बन सकते हैं, उन नौनिहालों के सपनों के सर ये कलम कर देंगे ।


भारत के मुसलमानों की तरक़्क़ी तभी मुमकिन है जब वे भारतीय बनें । उस से कोई इस्लाम खतरे में नहीं आता। हाँ। आप के नेताओं की राजनीति जरूर खतरे में आएगी । और हाँ भाई, हमें अपना दर -उल -हिन्द प्यारा है और उसे दर-उल -इस्लाम नहीं होने देंगे । आप भी चैन से रहिए, दर -उल -अमन ही रहने दीजिये ।
उम्मीद है आप ने इस नोट को पूरा पढ़ा होगा और ये भी उम्मीद है कि आप bore नहीं हुए होंगे । आप का विचार जरूर रखें, चर्चा करेंगे ।Nipun Rathee via Anand Rajyadhyaksha
Pabitra Dey: This is what was cong's stand on Dr.Kalam in 2012...
India Honest adds " This is what was cong's stand on Dr.Kalam in 2012. as reflected in sanjay jha's tweet, they (Congis) are secular only for political gain .
India Honest adds " This is what was cong's stand on Dr.Kalam in 2012. as reflected in sanjay jha's tweet, they (Congis) are secular only for political gain .
