गुजरात को जलाने वाला हार्दिक पर नीतीश लालू राजनीतिक रोटियां सेंकना बंद करें l



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अवधेश कुमार का कहना है कि केन्द्र ने कानून–व्यवस्था बनाए रखने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स, सीआरपीएफ व बीएसएफ के 5 हजार जवान गुजरात भेजे हैं।  क्या  सुरक्षा बल उतार देने से सरकार का कर्तव्य पूरा हो गया? सरकार को यह भी दिखाना होगा कि उसकी रीढ़ में दम है। जब इतनी हिंसा हो गई तो उसके लिए जो खलनायक है वो कैसे बाहर बैठा बयान दे रहा हैं। हार्दिक पटेल और उसके साथियों को तुरत गिरफ्तार करके जेल में डालना चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो कल कोई दूसरा हार्दिक पटेल पैदा होगा और अपनी जाति को लेकर इसी तरह आग लगाएगा। इसका असर दूसरे राज्यों पर भी हो सकता है। इसके लिए आवश्यक हो तो पटेल समाज के कुछ मान्य नेताओं को विश्वास में लिया जाए। लेकिन इस नवजवान को सजा मिलनी आवश्यक है l 

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तो पूरा देश गुजरात को झुलसते देख रहा है। सेना तक उतारनी पड़ी है। 8 लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट पुष्ट हो चुकी है। तीन दिनों पहले तक किसी ने कल्पना नहीं की की थी कि पिछले 13 सालों से शांति और समृद्धि की राह पर बढ़ रहा गुजरात कुछ घंटों में धू धू कर जलने लगेगा और उसकी ऐसी दुर्दशा हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी व सरदार पटेल की धरती पर हिंसा नहीं होनी चाहिए। बातचीत से सभी समस्याओं का हल निकल सकता है। शांति हमारा मंत्र होना चाहिए। प्रधानमंत्री की ऐसी अपील अगर बेअसर साबित हुई तो फिर यह सोचना पड़ता है कि आखिर इस तरह की स्थिति क्यों पैदा हुई? इसमें केवल वही शक्तियां हैं जो हमें सामने दिख रहीं हैं या कुछ ऐसी ताकते भी हैं जो पर्दे के पीछे से खेल कर रही हैं?

हार्दिक को देखिए।  वह कह रहा है कि पुलिस ने महिलाओं, बच्चों को पीटा इस वजह से हिंसा भ़़डकी।  गुजरात को सेना के हवाले करने की मांग भी उसने की। अरे, अभागे तुमने आग लगा दी और आराम से बयान दे रहे हो।  खामियाजा तो लोगों को ही भुगतना पड़ रहा है। पुलिस जब अपने पर आती है तो वह ऐसा ही व्यवहार करती ही है। आपने जो किया उसमें पुलिस को तो पूरी ताकत से सामने आना ही था। कानून के राज में आंदोलन दादागिरी और घौंस से नहीं होती। आप हक छीनने की बात कर रहे थे, आप हथियार उठाने की बात कर रहे थे। और आज आप सेना के हवाले करने की मांग कर रहे हो। आप होते कौन हो अब आग लगाने के बाद उसे बुझाने का सुझाव देने वाले?  हार्दिक राज्य सरकार को अल्टीमेटम दे रहा है कि अनशनकारियों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिस अफसरों के खिलाफ 36 घंटे के भीतर कार्रवाई हो, वरना आंदोलन को ब्लॉक स्तर ले जाया जाएगा।