जनता का ये डर जायज है, जब से लालू और नीतीश जी हाथ पकडे तब से राज्य में कानून व्यवस्था चरमरा गई है.



 

वर्ल्ड बैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार विकास के मानको पर अग्रणी पहले 10 में से 7 राज्यों में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार है। यह कांग्रेस को उनके नकारत्मक और विकास विरोधी राजनीति का आईना दिखता है: श्री प्रकाश जावडेकर - 


 




नीतीश जी ने करोड़ों खर्च करके “हर घर दस्तक” कैंपेन की शुरुआत की थी. पटना हाई कोर्ट ने उन्हें सरकारी खजाने के इस दुरूपयोग पर जमकर लताड़ा पर नीतीश जी एंड कंपनी पूरी निष्ठा से अपने काम में लगी रही. अब जब इस कैंपेन में पूछे गये सवालों के आधार पर नीतीश जी के आगामी चुनाव में हार-जीत का विश्लेषण किया जा रहा है तो परिणाम जेडीयू खेमे को निराश करते दिख रहे हैं. राज्य की जनता सुशासन बाबू के काम को मान तो रही है पर उन्हें दुबारा मुख्यमंत्री पद पर बिठाने को तैयार नहीं.
प्रदेश के तकरीबन सभी जिलों में चलाए गये इस अभियान के साथ नीतीश बाबू और उनकी पार्टी को बहुत उम्मीद थी. पर उनकी सभी उम्मीदों पर जनता ने पानी फेर दिया है. भ्रष्टाचारी लालू के साथ उनके गठबंधन को जनता ने सिरे से नकार दिया है. लोगों को डर है कि अगर इस बार नीतीश जी सत्ता में वापस आते हैं तो अकेले वो नहीं जंगलराज के सूत्रधार लालू भी उनके साथ वापसी करेंगे.

                           



जनता का ये डर जायज है. जब से लालू और नीतीश जी हाथ पकड़कर खड़े हुए हैं तब से राज्य में कानून व्यवस्था चरमरा गई है. अपराध दर बढ़ती जा रही है. कल तक जो निवेशक बिहार में पाँव जमाना चाहते थे अब वो कतरा रहे हैं. बानगी के तौर पर राजद का बंद सबके जहन में ताजा है. इसे सरकार का पूरा समर्थन मिला था. और तो और पटना हाईकोर्ट ने भी इस बंद के दौरान सुशासन बाबू की भूमिका पर सवाल उठाए थे. जनता एक बार फिर से वो दौर नहीं जीना चाहती है. इस बात की पुष्टि फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट भी कर रही है और इंडिया टुडे-सिसरो के ओपिनियन पोल में भी ऐसे ही परिणाम सामने आये हैं.
चुनाव के परिणाम क्या आते हैं ये भविष्य के गर्भ में छिपा है पर आज के लिए ये तय है कि नीतीश जी जनता की कसौटी पर हार चुके हैं. 8 नवम्बर को बची औपचारिकता भी पूरी हो जाएगी..............Anamika Singh