वो सब जघन्य काण्ड जो आप सोच भी नहीं सकते हो ---इतिहास में पहली बार होने लगे !



एक महान देश ‪#‎हिंदुस्तान‬, जो कि अब से सिर्फ 18 महीने पहले तक सुशासन, धार्मिक सद्भावनाओं से ओतप्रोत था, एक ऐसा देश जहां सबको अभिव्यक्ति की पूर्ण आजादी थी, यहाँ तक कि किसी भी पुस्तक, मूवी अथवा नाटक पर कोई रोक नहीं लगी।


जहां किसी ने भी "जाति" का नाम तक नहीं सुना था और ना ही "धर्म" का। वहां कभी कोई भूखा नहीं सोया, और गरीबी का तो नामो-निशान तक न था। जहाँ सारे किसान सम्पन्नता के साथ जीवन-यापन कर रहे थे, और आत्महत्या जैसी सोच तो सपने में भी नहीं थी।यह एक ऐसा शानदार देश था जहां जो भी इंसान जब चाहे स्वेच्छा से गाय मांस का भक्षण कर सकता था, यहाँ तक कि गाय पालने वाले भी। गौवंश को काटने से रोकने वाला कोई कानून भी किसी राज्य में नहीं था। 

इस देश में 18 महीने पहले तक किसी ने भी भ्रष्टाचार, हत्या, बलात्कार इत्यादि शब्द भी नहीं सुने थे।
साम्प्रदायिक दंगे, खून-खराबा तो पता भी नहीं था। किन्ही कारणों से इस देश में सन 1947 और सन 1984 पहुंचे ही नहीं, और इसी लिए, विभाजन के दंगे और सिख-विरोधी दंगे जैसा कुछ हुआ ही नहीं।


पर हाँ, सन 2002 जैसा जघन्य काण्ड जरुर हुआ था गुजरात जैसे पिछड़े इलाके में, जहां मात्र कुछ लोगों को ट्रेन में ज़िंदा जलाने कारण हजारो-लाखों लोगों को मार दिया गया था। वही एक बदनुमा धब्बा इंडिया के साफ़ और सेकुलर कपड़ो पर लगा था।वरना तो कश्मीरी पंडित कितने आराम से जम्मू-कश्मीर की घाटियों में पड़ोसियों के साथ मिल-जुल कर रह रहे हैं, और घाटी से जातिगत सफाया जैसी कोई बात हुई ही नहीं।आतंकवादी हमले, बम धमाके जैसी बातें भी कभी कहीं नहीं हुई।


इंडियन लोगों को दुःख, दर्द, गरीबी वगैरह पता भी नहीं थी। हाँ अगर कोई जानना चाहता था तो सूडान फिलिस्तीन इत्यादि देशों में जाकर जरुर पता कर लेते थे। इतना महान था मेरा इंडिया ! दुर्भाग्यवश, इंसानियत के दुश्मनों से हमारी ख़ुशी देखी नहीं गई।

मुझे आज भी याद है 16 मई, 2014 का वो काला दिन --- जब एक फासीवादी कट्टर हिन्दू नरेन्द्र मोदी, किसी तरह से इस देश का प्रधानमंत्री बन गया। बस जी उस दिन से ही इंडिया में गरीबी, साम्प्रदायिक द्वेष-दंगे, किसान-आत्महत्या, धार्मिक-जातिगत-लैंगिक भेदभाव, हत्याएं, बलात्कार, कर-चोरी, राहजनी और यहाँ तक कि सड़क पर थूकना और गन्दगी फैलाने जैसी सामाजिक बुराइयां भी --- 

और वो सब जो आप सोच सकते हो ---इतिहास में पहली बार होने लगीं !!


    




इसी कट्टर इंसान मोदी की देख-रेख में, धार्मिक भेदभाव ने अपनी सारी सीमाएं पार कर दी। हर रोज हजारों लोग मारे जाने लगे, और यही रफ़्तार रही तो 2019 तक इंडिया में कोई वोट तक देने को नहीं बचेगा।



कई महान इतिहासकारों और आदर्शवादी खुले विचारों के पैरोकारों ने तो इस युग को तालिबानी (एक सामाजिक संस्था जो कि बिना धर्म वाले आतंकवादियों ने स्थापित की है) भी कहा है। वैसे तालिबान इस तुलना से इतना आहत हुए हैं कि वे चाहते हैं कि एक सामाजिक श्रेष्ठ नेता इनके लिए एक "धरना" जरुर आयोजित करवाएं।


हम ज्ञानवंत नागरिक भी अब ये जान गए है कि --- हमारे कब्ज से लेकर, रेलवे के अवरुद्ध शौचालय तक --- हर बात के लिए प्रधानमत्री मोदी ही व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार हैं। मैं स्वयं इस बात से क्षुब्ध हूँ कि मेरे घर की सीढियों पर पड़ी पान की पिचकारी पर अभी तक क्यों मोदी ने कोई वक्तव्य नहीं दिया। इस देश में हर एक गलत चीज के लिए सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री ही दोषी है, और कोई नहीं। ओह मेरे प्यारे इंडिया, तुमने आखिर ऐसा क्या कर दिया जो तुम्हें इतनी बड़ी सजा मिली | इस सबका अब एक ही हल है .....‪#‎मोदीजी_इस्तीफा_दो‬........Amit Garg