अनिल ठाकुर विद्रोही कहते है कि गाय के गोबर से क्या क्या नहीं होता ? उसके उपले से घरों में खाना बनता है .. मैंने देखे हैं .. सुबह शाम दोनों समय का खाना बन जाता है ..
भयंकर ठण्ड में इसी उपले को जला लेते हैं तो .. ठण्ड से राहत मिल जाती है .... घरों को लीपते हैं तो गरीबों के घर मजबूत बने रहते हैं .. रोगाणु दूर हो जाते हैं .. .
शादी विवाह में आज भी गोबर से घरों को लीप कर शुद्ध किया जाता है ...इसी गोबर के उपले जला कर गाँवों में करोडो लोग मच्छरों को भगाते हैं .. .वहां बिजली नहीं कि वो अमीरों की तरह goodnight जलाय l
और फिर गौमूत्र .... इसके औषधीय गुणों को तो आज विश्व बाजार ने मान्यता दे दी है .. अमेरिका इंग्लैंड जापान चीन हर जगह गौमूत्र बेचे जा रहे हैं....
एक मुस्लमान आता है और बस :"तुमलोग तो गौमूत्र पीने वाले हो " ...... बोल कर निकल जाता है .. क्यूंकि वो जाहिल है .. वो जवाब में इसके गुण जानना चाहता ही नहीं ..
जाहिलों को किसी ने बताया ही नहीं .. की "स्वमूत्र चिकित्सा " नाम की एक पूरी चिकित्सा विधि है .. गौमूत्र में स्वर्ण पाए जाने की पुष्टि भी हो चुकी है .. गौमूत्र को पूरी दुनिया के मार्किट में बेचा जा रहा है .......
आज स्थिति यह कि 120 रुपये लीटर की कीमत पर भी गोमूत्र अर्क नहीं मिल रहा है। गोमूत्र के लिए बिल्कुल स्वस्थ बछड़ी को चुना जाता है। इसके लिए केवल देसी नस्ल की गायों का मूत्र लिया जाता है।गोमूत्र अर्क पीने के आधा घंटे बाद दुध या भोजन लेना चाहिए |
एक बार फिर मैं कुछ भी धार्मिक विवेचना नहीं कर रहा हूँ... जो आँखों देखि........ विज्ञानं सम्मत है .... वोही बता रहा हूँ... अब जिसने ये पढ़ लिया वो जाके गूगल पर सत्यता की जांच कर ले .. एक गाय ... .. धरती का एक ऐसा प्राणी .. जिसके गोबर और मूत्र भी औषधि का रूप हो .. बाकी उसके दूध के अनगिनत फायदे तो अलग ही हैं... .......
अगर हम उसको नहीं बचायेंगे तो किसे बचायेंगे ? जाहिर है दुसरे कौम के लोग हमसे हमारे भोजन को .. औषधि को ... छीन रहे हैं... हमारी थाली से पौष्टिकता छीन रहे हैं ... हम चुपचाप बैठे रहेंगे क्या ?
