अंकुर उगे हुए गेहूं में विटामिन-ई भरपूर मात्रा में होता है। शरीर की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन-ई एक आवश्यक पोषक तत्व है। यही नहीं, इस तरह के गेहूं के सेवन से त्वचा और बाल भी चमकदार बने रहते हैं। किडनी, ग्रंथियों, तंत्रिका तंत्र की मजबूत तथा नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी इससे मदद मिलती है।
इतना ही नहीं, अंकुरित गेहूं खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ता है। यह शरीर में बनने वाले विषैले तत्वों को भी निष्प्रभावी कर, रक्त को शुद्घ करता है। अंकुरित गेहूं के दानों को चबाकर खाने से शरीर की कोशिकाएं शुद्घ होती हैं और इससे नई कोशिकाओं के निर्माण में भी मदद मिलती है। अंकुरित गेहूं में उपस्थित फाइबर के कारण इसके नियमित सेवन से पाचन क्रिया भी सुचारु रहती है। अतः जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं हो अंकुरित गेहूं का सेवन फायदेमंद है।
40 ग्राम यानी 4 चम्मच (बड़े) गेहू और 10 ग्राम मेथीदाना- दोनों को 4-5 बार साफ पानी से अच्छी तरह धो लें, धोने के बाद आधा गिलास पानी में डालकर चौबीस घंटे तक रखें। चौबीस घंटे बाद पानी से निकालकर एक गीले तथा मोटे कपड़े में रखकर बांध दें और चौबीस घंटे तक हवा में लटका कर रखें। गिलास का पानी फेंकें नहीं, इस पानी में आधा नींबू निचोड़कर दो ग्राम सोंठ का चूर्ण डाल दें। इसमें 2 चम्मच शहद घोलकर सुबह खाली पेट पी लें। यह पेय बहुत शक्तिवर्धन, पाचक और स्फूर्तिदायक है।
चौबीस घंटे पूरे होने पर हवा में लटके कपड़े को उतारकर खोलें और गेहूं तथा मेथीदाना एक प्लेट में रखकर इस पर पिसी काली मिर्च और सेंधा नमक बुरक दें। गेहूं और मेथीदाना अंकुरित हो चुका होगा। इसे खूब चबा-चबाकर प्रात: खायें।यदि इसे मीठा करना चाहें तो काली मिर्च और नमक न डालकर गुड़ मसलकर डाल दें, शक्कर न डालें। यह मात्रा एक व्यक्ति के लिये हैं।

यह फार्मूला सस्ता भी है और बनाने में सरल भी इसमें गजब की शक्ति है, यह स्फूर्ति और पुष्टि देने वाला है। इस प्रयोग को प्रौढ़ ही नहीं, वृध्द स्त्री पुरुष भी कर सकते हैं। यदि दांत न हों या कमजोर हों तो वे अंकुरित अन्न चबा नहीं सकते, ऐसी स्थिति में निम्नलिखित फार्मूले का सेवन करना चाहिए।
प्रात:काल एक कटोरी गेहूं और तीन चम्मच मेथीदाना अच्छी तरह धो-साफ कर चार कप पानी में डालकर चौबीस घंटे रखें। दूसरे दिन सुबह इसका एक कप पानी लेकर नींबू तथा शहद डालकर पी लें। शेष तीन कप पानी निकाल कर फ्रिज में रख दें।
यदि फ्रिज न हो तो पानी गिलास में डालकर गिलास पर गीला कपड़ा लपेट दें और गिलास ठंडे पानी में रख दें और ढंक दें, ताकि पानी शाम तक खराब न हो। इस पानी को शाम तक एक कप पीकर समाप्त कर दें। गेहूं और मेथीदाने को फेंकें नहीं बल्कि फिर से 4 कप पानी में डालकर रख दें। दूसरे दिन सुबह 1 कप पानी और शेष दिन भर में पी लें। अब नया गेहूं तथा मेथीदाना लें और सुबह पानी में डालकर रख दें। दो दिन तक भिगोये हुए गेहूं और मेथी दाने को सुखा लें और पिसाने के रखे गये गेहूं में मिला दें। इस तरह बिना दांत वाले भी इस नुस्खे का सेवन कर लाभ उठा सकते हैं।