इंडिया के लिए 'गेमचेंजर' होगा ईरान से चाबहार पोर्ट समझौता ! चाबहार पोर्ट का प्रमुख उद्देश्य व्यापार के लिए कनेक्टिविटी बनाना है।इन दोनों पोर्टों के बनने से पाकिस्तान और ईरान के बीच में खटपट बढ़ने की सम्भावना है। पाकिस्तान एक सुन्नी देश है और उसकी सऊदी अरब से अच्छी दोस्ती है। वहीँ ईरान और सऊदी अरब की दुश्मनी जगजाहिर है।भारत भी सबसे ज्यादा शिया मिस्लिम आबादी वाला देश है और शिया ईरान से उसक दोस्ती का यही कारण है।
ईरान यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चाबहार पोर्ट सहित अहम 12 समझौते किये हैं। 15 साल पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की यात्रा के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री ईरान की यात्रा पर हैं। चाबहार पोर्ट के त्रिपक्षीय समझौते से भारत, ईरान और अफगानिस्तान ही नहीं बल्कि पकिस्तान और चीन में भी हलचल है।
चाबहार पोर्ट के बनने से भारत को अफगानिस्तान से इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट के लिए पाकिस्तान का रास्ता नहीं नापना पड़ेगा। वहीं सेंट्रल एशिया के देशों तक भारत की व्यापारिक राह आसान हो जायेगी। सेंट्रल एशिया के देश कज़ाकिस्तान, ताजिकिस्तान तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान भारत और चीन दोनों के लिए महत्व्पूर्ण हैं।
वर्तमान में पूरे वर्ल्ड की नजरें भारत और चीन पर लगी हुई हैं। दोनों देशों की अर्थव्यवस्था सबसे प्रगतिशील बताई जा रही। भारत और चीन वर्तमान में एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जब वह एक दूसरे को आर्थिक तौर पर पीछे छोड़ देना चाहते हैं। चूंकि सेंट्रल एशिया के कई देश भारत और चीन के लिए व्यापारिक तौर पर बेहद महत्व्पूर्ण हैं इसलिए वहां दोनों पहुंचना चाहते हैं।
दोनों के पास बेहतर कनेक्टिविटी न होना बड़ी रुकावट है। इसलिए पाकिस्तान में चीन ग्वादर पोर्ट बना रहा है, जिसकी दूरी चाबहार पोर्ट से महज 60 मील है। इसी पोर्ट के जरिये चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग सेंट्रल एशिया पहुंचना चाहते हैं। विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि चाबहार पोर्ट के बदले चीन ग्वादर पोर्ट बना रहा है।...,,,,Sanjay Dwivedy















Vivek Vasishat