फांसी लगाने वाले गजेन्द्र सिंह कोई सामान्य मजबूर फटेहाल किसान नहीं थे .... अपने इलाके के रुतबे वाले नेता थे ...दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके थे ....कई बड़े नेताओं के साथ उनके फोटो थे .... फिलहाल आम आदमी पार्टी में थे .....इधर सुबह से किसी टीवी चैनल पर केजरीवाल की रैली की कोई खबर नहीं थी ....ऐसे में कोई बहुत बड़ी नौटंकी प्लान की गयी ...गजेन्द्र सिंह को उकसाकर पेड़ पर चढ़ा दिया गया ....आत्महत्या के पर्चे हर टीवी चैनल तक पहुंचा दिए गए .
.....कुमार विश्वास मंच से आत्महत्या का लेटर पढ़ते रहे ....केजरीवाल मोदी को कोसते रहे ....उधर गजेन्द्र सिंह फंदे के साथ अलग अलग स्टंट करते रहे ....नीचे से लोग चिल्लाते रहे की हलके से बांधना ....टाइट मत बंधना .... पकड़े रहना ......वगैरह वगैरह .....नौटंकी पूरे जोरों पर चलती रही .......टीआरपी बिज़नस अपने चरम पर पहुँच गया ....

और बस देखते देखते एक पल में वो स्टंट फेल हो गया .... गजेन्द्र सिंह फांसी पर लटक गया ....क्योंकि नौटंकी उफान पर थी इसलिए बचाने की कोई तैयार की ही नहीं गयी थी ......नेताओं के बंगले की दस फ़ीट दीवार कूद जाने वाला आशुतोष मंच से खी खी करता रहा ...... बिजली के खम्बों पर चढ़कर लाइट काट देने वाला केजरीवाल गजेन्द्र सिंह की तरफ मुखातिब होकर मोदी को गालियां देता रहा..... पर किसी ने उसे बचाने की कोशिश नहीं की ....क्यों ?
बड़े बड़े हवाई जहाजों को आतंकी कब्जे में कर लेते हैं तब भी कमांडो यात्रियों को बचा लाते हैं ......आग , भूकम्प , बाढ़ , टावर पर चढ़े लोगों तक को सकुशल बचा लिया जाता है......... पर गजेन्द्र सिंह को मरने दिया गया ......क्यों ?
Gyanendra Jha Gyanअग्निवेश ने शायद सही कहा था .......केजरीवाल अनशन पर बैठे अन्ना को भी मारने पर उतारू था .....उसके मीडिया के स्पोंसर भी यही चाहते थे.......खीरा कटेगा तो सबमे बटेगा .....खूब राजनीती करेंगे..... खूब टीआरपी बटोरेंगे....वाह मज़ा आ जायेगा कसम से ......वाह मज़ा आ गया कसम से....... केजरी तू तो गया रे ......यज्ञ की ज्वाला अगर घर में आग लगा दे तो महा अपशगुन होता है ....महा अपशगुन .......केजरी तेरी हरामखोरी का घड़ा भर गया ......तू गया केजरी !!
.....कुमार विश्वास मंच से आत्महत्या का लेटर पढ़ते रहे ....केजरीवाल मोदी को कोसते रहे ....उधर गजेन्द्र सिंह फंदे के साथ अलग अलग स्टंट करते रहे ....नीचे से लोग चिल्लाते रहे की हलके से बांधना ....टाइट मत बंधना .... पकड़े रहना ......वगैरह वगैरह .....नौटंकी पूरे जोरों पर चलती रही .......टीआरपी बिज़नस अपने चरम पर पहुँच गया ....
और बस देखते देखते एक पल में वो स्टंट फेल हो गया .... गजेन्द्र सिंह फांसी पर लटक गया ....क्योंकि नौटंकी उफान पर थी इसलिए बचाने की कोई तैयार की ही नहीं गयी थी ......नेताओं के बंगले की दस फ़ीट दीवार कूद जाने वाला आशुतोष मंच से खी खी करता रहा ...... बिजली के खम्बों पर चढ़कर लाइट काट देने वाला केजरीवाल गजेन्द्र सिंह की तरफ मुखातिब होकर मोदी को गालियां देता रहा..... पर किसी ने उसे बचाने की कोशिश नहीं की ....क्यों ?
बड़े बड़े हवाई जहाजों को आतंकी कब्जे में कर लेते हैं तब भी कमांडो यात्रियों को बचा लाते हैं ......आग , भूकम्प , बाढ़ , टावर पर चढ़े लोगों तक को सकुशल बचा लिया जाता है......... पर गजेन्द्र सिंह को मरने दिया गया ......क्यों ?
Gyanendra Jha Gyanअग्निवेश ने शायद सही कहा था .......केजरीवाल अनशन पर बैठे अन्ना को भी मारने पर उतारू था .....उसके मीडिया के स्पोंसर भी यही चाहते थे.......खीरा कटेगा तो सबमे बटेगा .....खूब राजनीती करेंगे..... खूब टीआरपी बटोरेंगे....वाह मज़ा आ जायेगा कसम से ......वाह मज़ा आ गया कसम से....... केजरी तू तो गया रे ......यज्ञ की ज्वाला अगर घर में आग लगा दे तो महा अपशगुन होता है ....महा अपशगुन .......केजरी तेरी हरामखोरी का घड़ा भर गया ......तू गया केजरी !!