हजारों लोगों की भीड़ के सामने पेड़ से लटक कर खुदकुशी कर लेने वाले राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह की मौत अपने पीछे कई सवाल भी छोड़ गई है ..
जब गजेंद्र फांसी लगा रहे थे, तब किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश क्यों नहीं की? ऐसा कैसे हुआ कि हजारों लोगों की भीड़ के बीच पेड़ पर चढ़े एक शख्स ने खुदकुशी कर ली और करीब 15-20 मिनट तक किसी का उस तरफ ध्यान ही नहीं दिया।
.
मीडिया से क्यों दूरी चाहते थे केजरीवाल? अरविंद केजरीवाल की किसान रैली की शुरुआत ही विवादों से हुई। रैली के ठीक पहले दिल्ली पुलिस की तरफ से बयान आया कि सीएम अपने आसपास मीडियाकर्मियों को नहीं पहुंचने देना चाहते।
.
कहां थे 'आप' के वॉलंटियर? आम आदमी पार्टी के हर कार्यक्रम को पूरे व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं की एक बड़ी फौज काम पर लगी रहती है। इन लोगों का सबसे प्रमुख काम क्राउड मैनेजमेंट भी होता है। किसी प्रफेशनल एजेंसी के लोगों की तरह आप के कार्यकर्ताओं के हाथ में बाकायदा वॉकी टॉकी तक नजर आते हैं। ऐसे में जब गजेंद्र फांसी लगा रहे थे, तब पार्टी के तेजतर्रार कार्यकर्ता क्या कर रहे थे,
.
आप नेता क्यों देते रहे भाषण? सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो यह है कि गजेंद्र को अस्पताल भेजने के बाद भी करीब एक सवा घंटे तक रैली चलती रही और नेता भाषण देते रहे। इस दौरान उन्हें अस्पताल से कोई खबर न मिली हो, यह सवाल भी गले नहीं उतरता, जबकि आरएमएल हॉस्पिटल जंतर मंतर के नजदीक है। जंतर मंतर पर होने वाले हर धरने प्रदर्शन के दौरान पुलिस आयोजकों से अंडरटेकिंग लेती है कि अगर कोई गड़बड़ी हुई या कोई हादसा हुआ, तो उसके जिम्मेदार आयोजक होंगे। Sanjay Dwivedy
.
मीडिया से क्यों दूरी चाहते थे केजरीवाल? अरविंद केजरीवाल की किसान रैली की शुरुआत ही विवादों से हुई। रैली के ठीक पहले दिल्ली पुलिस की तरफ से बयान आया कि सीएम अपने आसपास मीडियाकर्मियों को नहीं पहुंचने देना चाहते।
.
कहां थे 'आप' के वॉलंटियर? आम आदमी पार्टी के हर कार्यक्रम को पूरे व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं की एक बड़ी फौज काम पर लगी रहती है। इन लोगों का सबसे प्रमुख काम क्राउड मैनेजमेंट भी होता है। किसी प्रफेशनल एजेंसी के लोगों की तरह आप के कार्यकर्ताओं के हाथ में बाकायदा वॉकी टॉकी तक नजर आते हैं। ऐसे में जब गजेंद्र फांसी लगा रहे थे, तब पार्टी के तेजतर्रार कार्यकर्ता क्या कर रहे थे,
.
आप नेता क्यों देते रहे भाषण? सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो यह है कि गजेंद्र को अस्पताल भेजने के बाद भी करीब एक सवा घंटे तक रैली चलती रही और नेता भाषण देते रहे। इस दौरान उन्हें अस्पताल से कोई खबर न मिली हो, यह सवाल भी गले नहीं उतरता, जबकि आरएमएल हॉस्पिटल जंतर मंतर के नजदीक है। जंतर मंतर पर होने वाले हर धरने प्रदर्शन के दौरान पुलिस आयोजकों से अंडरटेकिंग लेती है कि अगर कोई गड़बड़ी हुई या कोई हादसा हुआ, तो उसके जिम्मेदार आयोजक होंगे। Sanjay Dwivedy
