वो "दारू" फेक्टरी के मजदूर,
वो कांच की बोतल की फेक्टरी में काम करने वाले मजदूर,
वो "बार" में नाचने वाली गरीबबार डांसर,
वो "बार"में काम करने वाले वेटर,
वो "कबाड़ी" जो बोतल इकट्ठा कर अपना अपनी रोजी रोटी कमाते है,
इन सबको लादकर चलने वाले गरीब ट्रक ड्राइवर ,
और उनके बीबी बच्चों के बारे में सोचा तो मेरी आंख भर आयी, और बस....
उसी पल फैसला किया की अबसे, Provash, में रोज पियूँगा.......
.क्योंकि ........"अपने लिये तो सब जीते है,हम तो गरीबों के लिये पीते है"
वो कांच की बोतल की फेक्टरी में काम करने वाले मजदूर,
वो "बार" में नाचने वाली गरीबबार डांसर,
वो "बार"में काम करने वाले वेटर,
वो "कबाड़ी" जो बोतल इकट्ठा कर अपना अपनी रोजी रोटी कमाते है,
इन सबको लादकर चलने वाले गरीब ट्रक ड्राइवर ,
और उनके बीबी बच्चों के बारे में सोचा तो मेरी आंख भर आयी, और बस....
उसी पल फैसला किया की अबसे, Provash, में रोज पियूँगा.......
.क्योंकि ........"अपने लिये तो सब जीते है,हम तो गरीबों के लिये पीते है"