
मुझे हिंदू धर्म इसलिए पसंद है, क्योंकि चाहे ये मुस्लिम को सलाम कहे
या सिक्ख को सतश्री अकाल कहे, गुरुद्वारे में मत्था टेके
या चर्च में कैंडल जलाये, ईद में गले मिलकर बधाई दे
या चर्च में कैंडल जलाये, ईद में गले मिलकर बधाई दे
या महावीर जयंती में कीर्तन गाए, लंगर में खाना खाए
या सैंटा क्लोज बनकर खुशियाँ बिखेरता जाए...
किसी भी मामले में ये धर्म खुद को खतरे में नहीं महसूस करता।
शायद इसकी नींव ही इतनी मजबूत रही है।
वरना धर्म तो कार्टून बनाने से भी खतरे में पड़ जाते है।
बहस नहीं...बस सोचिए, क्या धर्म की बुनियाद इतनी कमजोर है
जो अब योग व इंसानी रचनाओ से भी डरने लगी ?
नींव मजबूत कीजिए...विचार भी मजबूत हो जाएंगे!