इस्लाम में योगा और सूर्य नमस्कार हराम है.....

‪#‎beinghindu‬ एक अमीर मुस्लिम के लड़के की शादी थी , मेहमानों की दावत के लिए हर तरह के खाने बने थे , उनमे हलुआ भी था ठंडा करने के लिए एक बड़े से थाल में एक तरफ रखा था , तभी वहां हलुए के लालच में चुपचाप से एक कुत्ता आगया , परन्तु गर्म होने से हलुआ नहीं खा सका , और थाल के किनारे पेशाब कर के भाग गया , कुछ बच्चों ने यह बात देखि और सबको बता दिया , तब उस अमीर ने एक मौलवी से पूछा कि बताइये क्या यह हलुआ हमारे लिए हलाल है या हराम है ,मुल्ला बोला ऐसी समस्या के बारे में किसी हदीस में कुछ नहीं लिखा , तुम किसी हिन्दू पंडित के पास जाओ और पूरी बात उसे बताओ , फिर जो वह कहे मुझे बताना , तब मैं फैसला करूँगा , थोड़ी देर बाद वह अमीर वापस मुल्ले के पास गया और बोला पंडित ने कहा है कि कुत्ते के पेशाब से सारे का सारा हलुआ अशुद्ध और खाने के अयोग्य हो गया . तब मुल्ला बोला तुम हलुआ खा सकते हो ,और मेहमानों को भी खिला सकते हो , क्योंकि शरीयत कहती है , " काफ़िर जैसा कहे मुसलमान उसके विपरीत काम करें " हमें पूरा विश्वास है कि इस छोटे से लेख से पाठकों को इस्लाम की नीतियों के बारे में असली जानकारी मिल गयी होगी , वैसे भी समझदार को इशारा ही काफी होता है !Kaushal Mishra

मुसलमान कह रहे है कि वो योगा के सूर्य नमस्कार का इसलिये विरोध कर रहे है. क्योकि मुसलमान सिर्फ अल्लाह के आगे सर झुकाता है. इसीलिये इस्लाम में योगा और सूर्य नमस्कार हराम है.....
अब मैं इनको जरा इतिहास की जानकारी देता हूँ.....हिन्दुस्तान में शासन करने वाली एक मात्र महिला मुस्लिम शासक रजिया सुल्लान की हत्या करने वाला इल्तुशमिश का पुत्र बहाउद्दीन (1266 ई. -1286 ई.) दिल्ली में रजिया सुल्तान की हत्या कर ग्यासुद्दीन बलवन के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा था....
बलवन ने अपने आपको नियाबत-ए-खुदाई अर्थात ईश्वर का प्रतिनिधी तथा जिल्ले-इलाही अर्थात ईश्वर की छाया बताया.....
बलवन ने सुल्तान की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए दरबार में सिंजदा (घुटनो के बल बैठकर सुल्तान के आगे सर झुकाना) तथा पाबोस (पेट के बल लेटकर सुल्तान के पैरो को चूमना) प्रथाएँ शुरु की थी....
अब सोचने वाली बात है कि कितने मुसलमानो के सर एक औरत के हत्यारे के आगे झुके होगे?? और कितनों ने लेटकर उसके पैरों को चूमा होगा?? आज उन्ही की नाजायद औलादे सूर्य नमस्कार करने को इस्लाम विरोधी बता रहे है....
बात बात पर "केवल अल्लाह के सामने ही सर झुकाने" की इंडियन मुसलमानों के इस जुमले की धज्जियां उडाने के लिए ऐसे उदाहरणों की खोज शुरू करें. ताकि इन्हें इनकी वास्तविकता के दर्शन कराया जा सके.....
Bhola Raj Barnwal


                    



21 जून को अतर्राष्ट्रीय दिवस को मनाने का समर्थन किया है दारुल उलूम ने !! योग दिवस को लेकर मचे हंगामे के बीच मुस्लिमों की बड़ी संस्था दारुल उलूम अब इंटरनेशनल योग दिवस के समर्थन में उतर आई है। दारुल उलूम ने कहा है कि योग को किसी तरह के मजहब (धर्म) से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके खिलाफ किसी तरह का फतवा भी नहीं जारी करना चाहिए। योग एक व्यायाम है।