Padm Singh : पढ़िये.... मज़ा न आए पैसे वापस - grin emoticonतोमर ने अवध यूनिवर्सिटी की बीएससी की डिग्री मात्र छह हजार रुपये में ली थी और लोग अभी चिल्ला रहे है कि भारत में सस्ती क्वालिटी एजुकेशन नही मिलती......कानून मंत्री की डिग्री भले ही फर्जी हो ईमानदारी का प्रमाणपत्र एकदम असली है जी !
फर्जी डिग्री रखने के आरोप में गिरफ्तार दिल्ली के कानून मंत्री जितेन्द्र तोमर से यूपी-बिहार फर्जी डिग्री वितरक संघ नाराज हो गया है। संघ के महासचिव जालीचंद नकलूवालिया ने एक प्रेस कॉफ्रेंस कर के अपनी नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने बताया कि जितेन्द्र तोमर के पकड़े जाने से फर्जी डिग्री कारोबार की साख को गहरा धक्का पहुंचा है। आज तक ऐसा नहीं हुआ कि कोई फर्जी डिग्री धारक पकड़ा गया हो और इतना बड़ा बवाला मचा हो! यह सब सीधे-सीधे जितेन्द्र तोमर की, बल्कि मैं तो कहूंगा कि आम आदमी पार्टी की अक्षमता का परिचायक है। मेरी राय में तो वे फर्जी डिग्री दिए जाने के काबिल ही नहीं थे।आगे उन्होंने कहा कि हमारे अपने कुछ नियम हैं जिनका कड़ाई से पालन किया जाता है। जब तक हम पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हो जाते कि आवेदक फर्जी डिग्री जैसी बेशकीमती चीज़ को संभाल पाएगा कि नहीं, तब तक हम उसे प्रदान नहीं करते। लेकिन लगता है कि जितेन्द्र तोमर के मामले में ठीक से नियमों का पालन नहीं किया गया। हम अपने आंतरिक लोकपाल से इस मामले की जांच करवाएंगे।
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान, एक वक़्त ऐसा आया जब नकलुवालिया भावुक हो गए और बोले लोग समझते हैं कि हम ये कारोबार पैसे के लिए करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। हम तो शिक्षा से दूर भागे हुए, समाज में हाशिये पर धकेल दिए गए उस युवा वर्ग की भलाई के लिए काम करते हैं जिसे उद्दंड और आवारा कहा जाता है। फर्जी डिग्री देकर हम उसे समाज में सम्मान से जीने का एक जरिया प्रदान करते हैं। क्या गलत करते हैं हम इसमें ? क्या वो इंसान नहीं हैं ? क्या वो हमारे आपके बच्चे नहीं हैं ?
नकलूवालिया की इस बात पर कई महिला पत्रकारों की आंखों में आंसू देखे गए। एक पत्रकार ने जब पूछा कि इस घटना को दृष्टिगत रखते हुए क्या वे अपने नियमों में कोई परिवर्तन करेंगे। उन्होंने कहा की जरूर करेंगे। आगे से हम प्रत्येक आवेदक से शपथ-पत्र पर लिखवा कर लेंगे कि वह फर्जी डिग्री लेकर सिर्फ सरकारी नौकरी करेगा, राजनीति नहीं और अगर राजनीति करनी ही पड़े तो आम आदमी पार्टी की तो बिलकुल नहीं।
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान, एक वक़्त ऐसा आया जब नकलुवालिया भावुक हो गए और बोले लोग समझते हैं कि हम ये कारोबार पैसे के लिए करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। हम तो शिक्षा से दूर भागे हुए, समाज में हाशिये पर धकेल दिए गए उस युवा वर्ग की भलाई के लिए काम करते हैं जिसे उद्दंड और आवारा कहा जाता है। फर्जी डिग्री देकर हम उसे समाज में सम्मान से जीने का एक जरिया प्रदान करते हैं। क्या गलत करते हैं हम इसमें ? क्या वो इंसान नहीं हैं ? क्या वो हमारे आपके बच्चे नहीं हैं ?
नकलूवालिया की इस बात पर कई महिला पत्रकारों की आंखों में आंसू देखे गए। एक पत्रकार ने जब पूछा कि इस घटना को दृष्टिगत रखते हुए क्या वे अपने नियमों में कोई परिवर्तन करेंगे। उन्होंने कहा की जरूर करेंगे। आगे से हम प्रत्येक आवेदक से शपथ-पत्र पर लिखवा कर लेंगे कि वह फर्जी डिग्री लेकर सिर्फ सरकारी नौकरी करेगा, राजनीति नहीं और अगर राजनीति करनी ही पड़े तो आम आदमी पार्टी की तो बिलकुल नहीं।

इसके साथ ही आवेदक को जिस कॉलेज की डिग्री दी जा रही है, उस कॉलेज के समस्त शिक्षकों के चेहरे और कॉलेज का नक्शा याद कराया जाएगा और इसकी बाकायदा एक परीक्षा ली जाएगी। परीक्षा में सफल होने वाले आवेदक को ही फर्जी डिग्री प्रदान की जाएगी।
क्या इस घटना से उनके कारोबार पर कुछ असर पड़ेगा, पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि तात्कालिक असर तो जरूर पड़ेगा। अभी युवा वर्ग थोड़ा डरा हुआ है लेकिन भारत का युवा ऊर्जा का भण्डार है। उसे अधिक दिनों तक डरा कर नहीं रखा जा सकता। देर-सबेर अपना हक लेने वह हमारे पास जरूर आएगा। इसके बाद सभी पत्रकार बंधुओं ने चिकन-बिरयानी का लुत्फ़ उठाया और देश के भविष्य के प्रति आश्वस्त होकर अपने-अपने दफ्तरों को चले गए।