हिंदुस्तान के हिन्दू हिंदुस्तान के मुसलमानों पर भरोसा नहीं करते। और हिंदुस्तान के मुस्लमान भी हिंदुस्तान के हिन्दुओ को मुहब्बत की नजर से नहीं देखते। ये दरार लगातार गहरी हो रही है और जल्द ही इस देश की शांति को तबाह कर देगी.
ये एक ऐसा सच है जिसे हम सब जानते है। हाँ कभी कभी उपरी सतह पर हिन्दू मुस्लिम एकता के लुभावने नारों को गाकर हम इस सच को नकारने की कोशिश जरूर करते है, लेकिन ये उपरी सतह इतनी कमजोर है की एक नेता के एक भाषण या एक मौलवी के एक फतवे के हलके से वार से टूट के बिखर जाती है।
ये नाटक आखिर क्यों ? दंगो के डर से कबतक हम एक दुसरे के मुह पर सच नहीं बोलेंगे ?
अब मुसलमानों के लिए मेरा ख़िताब।
आपके नेताओ और मौलवियों ने आपको बहुत उल्लू बना लिया है, और आप बकरियों की तरह बहुत बार कुर्बान हो चुके हो। योगा से इस्लाम को नहीं , इन मौलवियों की दुकानों को खतरा है। योग, संस्कृत , आयुर्वेद और हिंदुस्तान की दूसरी सांस्कृतिक धरोहरों पर आपका भी उतना ही हक है जितना हिन्दुओ का। आप इसी जमीन के लोग हो जिन्होंने पैगम्बर के पैगाम को मानते हुए इस्लाम को कबूला! आपको हिंदुस्तान में हक चाहिए तो हक जाताना होगा, ताज महल के साथ साथ अशोका स्तम्भ पर भी गर्व करना होगा आपको।
और अब आखिर में मेरी विनती।
आगे से हिन्दू मुस्लिम भाई भाई के नारे तभी गाना जब मन से उन्हें भाई मनो। वरना ये ढोंग करके कोई बाबा साहेब फाल्के अवार्ड तो मिलने नहीं वाला आपको! अगर नहीं पसंद हिन्दू या मुस्लमान तो मुह पर बोलो. गुस्सा इकठ्ठा करके दंगो में निकलने से तो बेहतर है कहासुनी हो जाए थोड़ी। हर हिन्दू मुस्लमान तक पहुच जाए
मेरी विनती। Allen Sharma
ये एक ऐसा सच है जिसे हम सब जानते है। हाँ कभी कभी उपरी सतह पर हिन्दू मुस्लिम एकता के लुभावने नारों को गाकर हम इस सच को नकारने की कोशिश जरूर करते है, लेकिन ये उपरी सतह इतनी कमजोर है की एक नेता के एक भाषण या एक मौलवी के एक फतवे के हलके से वार से टूट के बिखर जाती है।
ये नाटक आखिर क्यों ? दंगो के डर से कबतक हम एक दुसरे के मुह पर सच नहीं बोलेंगे ?
कोई बोले न बोले, में बोलूँगा। ऐसे सफ़ेद झूठ मुझसे नहीं बोले जाते. आज हो जाने दो दंगे, पर ये सामूहिक ढोंग मुझसे नहीं देखा जाता।
सबसे पहलों तो हिन्दुओ को मेरा छोटा सा पैगाम.
जिन मुसलमानों को हिंदुस्तान से प्यार नहीं था उन्होंने पाकिस्तान बना लिया है। जो यहाँ है उनका इस देश पर उतना ही हक है जितना तुम्हारा. मुसलमानों को पाकिस्तानी समझोगे तो वो मन से पाकिस्तानी ही बन जाएँगे। हिंदुस्तान सिर्फ तुम्हारे पिताजी की जागीर नहीं है , हम सब के पिताजी की जागीर है ये।
जिन मुसलमानों को हिंदुस्तान से प्यार नहीं था उन्होंने पाकिस्तान बना लिया है। जो यहाँ है उनका इस देश पर उतना ही हक है जितना तुम्हारा. मुसलमानों को पाकिस्तानी समझोगे तो वो मन से पाकिस्तानी ही बन जाएँगे। हिंदुस्तान सिर्फ तुम्हारे पिताजी की जागीर नहीं है , हम सब के पिताजी की जागीर है ये।
अब मुसलमानों के लिए मेरा ख़िताब।
आपके नेताओ और मौलवियों ने आपको बहुत उल्लू बना लिया है, और आप बकरियों की तरह बहुत बार कुर्बान हो चुके हो। योगा से इस्लाम को नहीं , इन मौलवियों की दुकानों को खतरा है। योग, संस्कृत , आयुर्वेद और हिंदुस्तान की दूसरी सांस्कृतिक धरोहरों पर आपका भी उतना ही हक है जितना हिन्दुओ का। आप इसी जमीन के लोग हो जिन्होंने पैगम्बर के पैगाम को मानते हुए इस्लाम को कबूला! आपको हिंदुस्तान में हक चाहिए तो हक जाताना होगा, ताज महल के साथ साथ अशोका स्तम्भ पर भी गर्व करना होगा आपको।
और अब आखिर में मेरी विनती।
आगे से हिन्दू मुस्लिम भाई भाई के नारे तभी गाना जब मन से उन्हें भाई मनो। वरना ये ढोंग करके कोई बाबा साहेब फाल्के अवार्ड तो मिलने नहीं वाला आपको! अगर नहीं पसंद हिन्दू या मुस्लमान तो मुह पर बोलो. गुस्सा इकठ्ठा करके दंगो में निकलने से तो बेहतर है कहासुनी हो जाए थोड़ी। हर हिन्दू मुस्लमान तक पहुच जाए
जय हिन्द ! जय भारत !