देश मे कोई आग नहीं लगीं हुई , बल्कि न्यूज़ चैनल के स्टूडियो में आग लगीं हुई है !

 

Hindu Sena Ink attack on Beef Party Organiser J-K MLA Engineer Rashid, who chose to play with fire by insulting and hurting sentiments of Hindus just like the infamous Charlie Hebdo use to do, and who had a long history of intentionally making controversial and provocative cartoons and covers. 

Any way the Attack on Rashid was much softer warning , a la Hindutva style , where tolerance and non-violence dominates for long time .


  Blacky Rashid      

Remember this When Kamran Siddiqi threw Ink On Baba Ramdev ji in 2012.........then No Presstitute Outrage or No Voice Came For MMS Should Speak...........? But Now MODI Should Speak On Everything.? Because India Was tolerant..!  ‪#‎Hypocrisy‬ ‪#‎AttackSquadPolitics‬  ‪#‎HindusAreHumanToo‬............The Nationalist

स्वामी रामदेव जी पर सन २०१२ में आज से ३ वर्ष पहले एक मुस्लिम कामरान सिद्दीकी ने स्याही फेंकी थी। ....... जबकि स्वामी रामदेव जी ने न कभी कुरान का अपमान किया न कभी सूअर का मांस खाया जिससे मुल्लो की भावना आहत हो या इस्लाम खतरे में आये ऐसा कोई काम या प्रदर्शन नहीं किया। ……। तब खान्ग्रेस की सत्ता थी मनमोहन प्रधानमंत्री थे। …… तब देश का माहोल ख़राब नहीं हुआ कोई मीडिया में रंडी रोना नहीं हुआ। ....... कोई कवरेज नहीं हुई। ……। भारत का कोई तालिबानीकरण नहीं हुआ। ....... किसी साहित्यकार का दम नहीं घुटा। ……। क्यों ?? क्युकी हिन्दू क्या हिन्दू के साधु संत क्या। ……। सारे अपमान के योग्य ही समझे जाते है। …… और वे ऐसा समझने के अधिकारी भी है क्युकी भारत का सनातन समाज रीढ़हीन है। .... नपुंसक है। ....... पौरुषहीन है। …… दब्बू है। ……। 

जैसा की इंजिनियर लतीफ़ ने सरे आम चुनौती देकर मीडिया बुलाकर झंडे बैनर लगाकर लाव लश्कर के साथ हमारी पूजनीय गौमाता का खुल्ले आम हिन्दुओ की छाती पर बैठ कर गौमांस खाया। …… 
उस पर कालिख पोती २ युवको ने उनकी धार्मिक भावना कितनी आहात हुई तब जाकर उन्होंने विरोध का ये स्वर उठाया। ....... तो मीडिया को गौमांस खाने से तकलीफ नहीं है वो अपराधी है जिनकी गौमाता की हत्या हुई जिनका धार्मिक चिन्ह अपमानित किया गया। …। जिसको हिन्दू पूजे उसको मारकर काटकर खुल्ले आम चुनौती देकर खाने वाले खुल्ले घूमे दुनिया में भारत को अपमानित करे वो देश के प्रगतिशील बुद्धिजीवी और मीडिया को स्वीकार है .......... अरे कितना दोगलापन दिखाओगे गद्दारो। …… लेकिन समय परिवर्तन शील है। ....... करोडो हिन्दुओ के आत्मसम्मान को ठेस पहुचाने वालो। ……… हर बुराई का अंत होता है। …… देखो जनता बुराई के प्रतिक रावण को जलाती है। … ....... जिस दिन तुम लोगो के अंदर के रावण को पहचान लेगी। ....... तुम लोगो का जलकर भस्म होना निश्चित है। ……… अलख निरंजन।.......सुमेर सिंह

कोई न्यूज़ चैनल लगाओ या अखबार पढ़ो तो उसमें ये headlines होती हैं कि "पिछले डेढ़ साल से देश के हालात सीरिया, इराक जैसे हो गए हैं...देश में हिन्दू तालिबान चरम पर है"..ऐसी हेडलाइन से दिमाग में यही तस्वीर बनती हैं कि मानो पिछले अठारह महीने से इस देश में खून की नदियां बह रही है...रोजाना सैकड़ों का कत्ल किया जा रहा है....और भारत का तथाकथित अल्पसंख्यक समुदाय तो यजीदियो की तरह विलुप्त होने की कगार पर है...


अगर वाकई ये देश सीरिया इराक बन रहा है तो रोजाना यहाँ सैकड़ों के नरसंहार क्यों नहीं हो रहे?

और वो लाशो के ढेर कहा है जिसका perception मिडिया वाले बनाना चाह रहे हैं?

रिकॉर्ड निकाले तो पिछले डेढ़ साल मे उंगलियों पर गिनने लायक भी धार्मिक हत्याओं की संख्या नहीं होगी....बमुश्किल चार, पाच , सात केस आते है, और इतने केस तो सालों से यहाँ होते रहते है और ये छोटी मोटी घटनाएं हर देश में होती हैं इससे भारत को सीरिया व इराक जैसे बताना कहा तक उचित है...

दूसरा , कि अगर देश में हिन्दू तालिबान जैसा कुछ है तो फिर तो यहाँ रोजाना बम, धमाके गोलियां चलनी चाहिए , अल्पसंख्यको का सरेआम नरसंहार होना चाहिए, उनके धार्मिक स्थलों का विध्वंस होना चाहिए....लेकिन ये सब तो नहीं हो रहा ,इसलिए मिडिया को बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही हैं हिन्दू तालिबान जैसी चीज़ को दिखाने के लिए....

इसलिए मिडिया द्वारा हिन्दू आतंकवाद या हिन्दू तालिबान का perception बनाने के लिए कुछ हुडदंगी हिन्दू नेताओं और संगठनों की बयानबाजी, उछलकूद, स्याही फेकना और छोटी मोटी तोड़ फोड को ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे हिन्दू तालिबान यहा रोजाना थोकभाव में नरसंहार कर रहा है, रोजाना यहाँ मस्जिदे तोड़ी जा रही है, रोजाना यहाँ बम, धमाके गोलियां चल रही हैं....

सच्चाई तो ये है कि वास्तविक जमीन पर देखें तो देश मे हालात बिल्कुल सामान्य हैं, जैसे पिछले कई सालों से है ....देश मे कोई आग नहीं लगीं हुई , बल्कि न्यूज़ चैनल के स्टूडियो में आग लगीं हुई है क्योंकि मोदी राज में अब ये चैनल तथाकथित अल्पसंख्यकों को कंकड़ लगने की घटना को भी ऐसे दिखाते हैं मानों देश में जैस कितना भयंकर नरसंहार और कोहराम चल रहा हो..

अब वो कहते है न कि बद से बुरा बदनाम होना है...क्योंकि perception का सारा खेल हैं जो मिडिया के हाथों में हैं....इसलिए बिहार चुनावों के बाद मोदी जी, उनके नेतागण, आरएसएस इन सबको अपने देशी विदेशी दौरे, उदघाटन फीता काटने के कार्यक्रमों पर दो महीने के लिए विराम लगाकर ये दो महीने सिर्फ घरेलू परिस्थितियों, मिडिया, NGO, वामपंथियो वगैरह पर फोकस करके इनके खिलाफ एक पुख्ता रणनीति बनाने की सख्त जरूरत है....अनिल ठाकुर विद्रोही