स‌ितारे कहते हैं भाजपा को बिहार में जीत मिलने के योग बन रहे हैं l लालू-नीतीश का गठजोड़ सत्ता गंवाने के बाद टूट सकता है l

ब‌िहार में चुनाव पर स‌ितारे क्या कहते हैं ?

ब‌िहार में चुनाव की घोषणा के बाद सभी पार्ट‌ियों ने प्रचार अभ‌ियान को तेज कर द‌िया है और मतदाताओं को लुभाने के प्रयास में जुट गए हैं।

लेक‌िन क‌िनकी बातों पर जनता भरोसा करेगी यह 8 नवंबर को पता चलेगा। लेक‌िन चुनाव पर‌िणाम आने से पहले ज्योत‌िषी अपनी गणना से जो भव‌‌िष्यवाणी कर रहे हैं उससे ब‌िहार की राजनीत‌ि में बड़े बदलाव आने के संकेत म‌िल रहे हैं।

यह बात ज्योत‌िषी नीतीश कुमार और नरेन्द्र मोदी की कुण्डली देखकर कह रहे हैं। क्योंक‌ि इन द‌िनों ब‌िहार चुनाव पार्ट‌ियों के चुनाव से हटकर व्यक्त‌िगत हो गया ज‌िससे ब‌िहार का चुनाव नीतीश बनाम मोदी का बन चुका है।

चुंक‌ि इस समय ब‌िहार की सत्ता नीतीश कुमार के हाथों में है और सवाल उठ रहा है क‌ि इनकी सत्ता रहेगी या जाएगी इसल‌िए सबसे पहले नीतीश की कुण्डली का ही हाल जान लेते हैं क‌ि इनके स‌ितारे क्या कहते हैं।

नीतीश कुमार की सत्ता जाएगी या रहेगी?

नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को दोपहर एक बजकर पंद्रह मिनट पर बख्तियारपुर में हुआ था। ऐसे में इनकी कुण्डली� मिथुन लग्न की बनती है। इनकी कुंडली में इस समय राहु की महादशा चल रही है जो गुरु के साथ नजदीकी अंशो में होकर 'चांडाल' योग बना रहा है।

यही कारण है क‌ि इन्हें राजनीत‌िक मजबूर‌ियों के कारण अपने घोर व‌िरोधी लालू यादव के साथ जाना पड़ा है। मुखयमंत्री के� रूप में नीतीश कुमार ने 'सुशासन-बाबू' की जो छवि अर्जित की थी वह अब राहू-गुरु की विंशोत्तरी दशा के प्रभाव से धूमिल होने के संकेत भी दे रही है।

नीतीश कुमार का चन्द्रमा वृश्चिक राशि में केमद्रुम योग में पड़ा हुआ है, जिस पर से इस समय गोचर कर रहा शनि साढेसती के प्रभाव के कारण उनको खराब चुनावी रणनीति की वजह से हार का कड़वा स्वाद चखने पर मजबूर कर सकता है।


नरेंद्र मोदी का जादू चलेगा ब‌‌िहार में?





दूसरी ओर 17 सितंबर 1950 को 12 बजकर 9 मिनट पर गुजरात के मेहसाना जिले में जन्मे नरेंद्र मोदी का लग्न और चन्द्रमा दोनों ही वृश्चिक राशि में है।

शनि के साढ़ेसती के प्रभाव में चल रहे मोदी चन्द्रमा में शनि की कठिन विंशोत्तरी दशा में से गुजर रहे� हैं। 'अच्छे दिनों' का नारा और विदेशों से� 'काला धन' लाने की बात उनके मुंह में फंसती दिख रही है।

दिल्ली विधान-सभा चुनावों में हार के बाद बिहार का यह चुनाव उनकी प्रतिष्ठा के लिए कड़ी चुनौती बन चुकी है। लेक‌िन अच्छी बात यह होने जा रही है क‌ि 29 सितंबर से उनको वर्गोत्तम शुक्र का प्रत्यंतर मिलने जा रहा है जो उनके नेतृत्व में भाजपा की जीत का ज्योतिषीय संकेत हो सकता है।


ऐसा होगा ब‌िहार चुनाव का पर‌िणाम : स्‍थ‌ित‌ि को और स्पष्ट रूप से जांचने के लिए बिहार की कुंडली का निरीक्षण भी यहां आवशयक है। बिहार प्रदेश की स्थापना 1 अप्रैल 1912 को मध्यरात्रि में पटना में हुई थी।

धनु लग्न की बिहार की कुंडली में अष्टमेश शुक्र की महादशा में मंगल की अन्तर्दशा चल रही है जो सप्तम भाव में स्थित होकर चुनाव में हिंसा की संभावना को दर्शा रहा है।

आगामी 28 सितंबर को मीन राशि में पड़ने वाला चन्द्र ग्रहण बिहार तथा नीतीश कुमार की कुंडली में चतुर्थ-दशम भावों को प्रभावित कर राज्य में सत्ता परिवर्तन करा देगा।

दूसरी ओर मिथुन लग्न की भाजपा की कुंडली में सूर्य में शनि की विंशोत्तरी दशा चल रही है, जो दशम भाव से संबंध बनाकर चुनाव में सफलता का संकेत दे रही है। अत: भाजपा को बिहार विधान सभा चुनावों में जीत मिलने के योग बन रहे हैं l

दूसरी तरफ लालू-नीतीश का गठजोड़ राज्य की सत्ता गंवाने के बाद टूट 

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Shivendra Kumar