secularism की बीमारी है मुनव्वर राणा को । कोई इलाज नहीं । जब तक मोदी रहेगा, इसी तरह घुटन होगी l .

मुनव्वर राणा नाम का एक आदमी बीमार पड़ गया ।
सांस उखाड़ने लगी । आँखें पलटने लगी । मुह से झाग निकलने लगा ।
उठा पठा के लोग अस्पताल ले गए । डाक्टर जुटे । सारी जांच हुई । test हुए ।
कुछ समझ न आया । ऑक्सीजन दी ....... जान तो बच गयी पर हालत में कोई सुधार न था । सांस उखड रही थी । मुह से फसूकर फेंक रहा था ।
doctor ने दिल्ली refer कर दिया । बोला बड़े अस्पताल ले जाओ । अपने बस का नहीं । complicated case है । बीमारी समझ नहीं आ रही । 
उठा पटक करके दिल्ली लाये गए । वहां भी doctors ने सब अन्दर बाहर आगे पीछे मशीन घुसेड के और मशीन में घुसेड के चेक किया ।
कुछ समझ न आया । मरीज को सांस ही न आती थी
महीनों लगे रहे डाक्टर साहब अंत तक बीमारी पकड़ न आई ।
फिर एक दिन ....... बड़े डॉक्टर साहब ने मरीज के लड़के से पूछ लिया ।
बेटा ...... तुमरे पापा करते क्या हैं ?
मरीज का लौंडा बोला ....... जी पापा लेखक / कवि हैं । Award winning writer हैं जी .......
डाक्टर ने उसके एक कंटाप दिया ....... कस के ....... कान के पीछे ........
भोसड़ी के ? यही बात पहले नहीं बता सकता था ?
साले ....... secularism की बीमारी है तेरे बाप को ।
कोई इलाज नहीं इसका ।
जब तक मोदी रहेगा न बेटा .......... इसी तरह घुटन होगी इसको ....... सांस नहीं आएगी । इसका हवा पानी change कर । इसको कहीं बाहर भेजो । पाकिस्तान सीरिया इराक टाइप जगह पे । वहाँ की सेक्युलर हवा में इसको आराम होगा ।
तब तक के लिए ........ एक देसी इलाज बता देता हूँ ........ पाव भर शहद लगा दो । और अपने बाप से कहो की वहीं से चाटे । आराम होगा ।......................
अजीत भोंसले
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जो भी हो कुछ अनोखी बात तो हैं इस शख्स में, कभी कभी एकदम ठेठ दिमाग का ढक्कन उड़ाने वाली गाली भी देता है लेकिन बात ऐसी कहता है कि जबरदस्त तरीके से असर कर जाये,
पेश है Ajit Singh की शानदार पोस्ट हू-ब-हू.