The Question before the Nation is "Killing of Cow" not "Beef Eating" .


प्रश्न मांस का नहीं आस्था-भावना का है, एक तुच्छ महिला-लेखिका ( शोभा डे ) की टिपण्णी : "मांस तो मांस होता है ,चाहे गाय का हो या बकरे का, फिर हिन्दू जानवरों के प्रति अलग अलग व्यवहार का क्यों ढोंग करते है की बकरा काटो पर गाय मत काटो , ये मुर्खता है की नहीं "......

ये तो बेबुनियाद है ही, साथ ही बड़ा प्रश्न ये है की लोग कियो नहीं समझाते कि आपति बीफ से नहीं है बल्कि बीफ के लिए गाय, जिन्हें हिन्दू गोमाता के रूप में पूजते है तथा मानते हे उसके बध से है ....Question before the Nation is "Killing of Cow" not Beef .

अब अगर कोई कहे जिनको बीफ ही पसंद है तो इसको तैयार करने से रोकने से उनके अधिकारों का हनन होता है .....तो ये तर्क बेवकूफी भरी साजिश है........जिस देश की 90 % जनता या 100 करोड़ हिन्दू अगर इसको गलत मानते है कि उनके धार्मिक भावनावो का मारा जा रहा हे तो क्या इसको बंद करना लाजमी और जरुरी नहीं है l 
....फिर तो कोई कहेगा कि हेबेड़ो को भी कार्टून बनाना पसंद था.........किन्तु वो कार्टून जब अगर एक समाज की धार्मिक भावनाओ पर आघात करता था  हम हेबेड़ो के काम की निंदा करते थे l 

आखिर हेबड़ो को जान भी देनी पड़ी...........तो इन शोभा दे जैसे साम्प्रदयिक दोगलो से पुछो की वो दोनों परिसिथित में क्या अन्तर देखते है ? 

यही न कि एक समाज उग्र है violent है और दूसरा एक समाज शांत है ....पर शांति कब तक रहेगी ? 

क्या ये मीडिया के दलाल भारत में अशांति चाहते है ? कौनसी विदेशी ताकत इनको देश में फुट डालने के लिए पैसा एवं साहस देती है ? मोदी में हिम्मत तथा समझ है , वो 2019 के पहले इनके नकाब को जरुर हटा कर इनको खतम करेंगे 










The Intellectual position





प्रश्न मांस का नहीं आस्था-भावना का है, एक तुच्छ महिला-लेखिका ( शोभा डे ) की टिपण्णी : 
"मांस तो मांस होता है ,चाहे गाय का हो या बकरे का, फिर हिन्दू जानवरों के प्रति अलग अलग व्यवहार का क्यों ढोंग करते है की बकरा काटो पर गाय मत काटो , ये मुर्खता है की नहीं "
मेरा जवाब - 1.मर्द तो मर्द होता है ,चाहे भाई हो या पति फिर आप अलग अलग व्यवहार क्यों करती है , क्या संतान पैदा करने के लिए पति ही जरुरी है ? भाई मित्र के साथ भी वही व्यवहार कर बच्चे पैदा किया जा सकता है फिर अलग अलग मर्द के साथ अलग अलग व्यव्हार का ढोंग क्यों ये आप की मुर्खता है की नहीं ?
2. आप अपने बच्चों पति को नाश्ते में दूध तो देती होंगी? जाहिर हैं वो गाय या भैस का ही होगा, आप कुतिया का दूध क्यों नहीं पिलाती आखिर दूध तो दूध है हैं की नहीं फिर दूध पिलाने में मूर्खता क्यों ? 
प्रश्न मांस का नहीं आस्था और भावना का है जिस तरह भाई पति,और बेटे का सम्बन्ध भावना और आस्था के आधार पर चलता है उसी प्रकार गाय ,बकरा या कुतिया भी हमारे भावना का आधार है l हर जगह एक ही नियम लागु नहीं होता ‪#‎Shobha‬ De लेखिका साहिबा जी आप अपनी तुच्छ ज्ञान को अपने पास रखिये आप जैसे ही तुच्छ नारी से पूरा नारी समाज मार्किट में बिकने और भोग की बस्तु बन कर रह गयी है l 

 



indian Muslim mob beats a Muslim woman. Her crime? She wants to end the mass slaughter of cows and sheep as animal sacrifice during the Islamic Eid festival.

Benazir Suriaya is a brave Muslim woman in India. She is PETA India’s Lead Media Coordinator and a vegan who has initiated a campaign to convince her fellow Muslims to stop the mass slaughter of cows and sheep as an animal sacrifice to please Allah.

Benazir Suriya PETA Muslim activistInstead, she is asking them to donate the equivalent to charity and save the lives of the animals. What she did not know was that the Muslims she was trying to convince had absolute zero-tolerance towards any debate.

Watch how hundreds of Muslim men attack her as some women in burka join the men and the crowd chants “Allah O Akbar.” If the police had not arrived who knows what they would have done to Benazir Suriaya.

But guess who has been charged and arrested by the police? Not any member of the mob, but Benazir Suriya! Police have arrested the PETA activists and registered a case against them under section 295 A for “outraging religious feelings.”

This is unbelievable. If this is how Muslims react to dissent in India, imagine what they would do in places such as Pakistan, Iran or Saudi Arabia.