अनिल ठाकुर विद्रोही : एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। अचानक उन्होंने सभी शिष्यों से एक सवाल पूछा। बताओ जब दो लोग एक दूसरे पर गुस्सा करते हैं तो जोर-जोर से चिल्लाते क्यों हैं?
शिष्यों ने कुछ देर सोचा और एक ने उत्तर दिया : हम अपनी शांति खो चुके होते हैं इसलिए चिल्लाने लगते हैं। संत ने मुस्कुराते हुए कहा : दोनों लोग एक दूसरे के काफी करीब होते हैं तो फिर धीरे-धीरे भी तो बात कर सकते हैं। आखिर वह चिल्लाते क्यों हैं?
कुछ और शिष्यों ने भी जवाब दिया लेकिन संत संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने खुद उत्तर देना शुरू किया।वह बोले- जब दो लोग एक दूसरे से नाराज होते हैं तो उनके दिलों में दूरियां बहुत बढ़ जाती हैं। जब दूरियां बढ़ जाएं तो आवाज को पहुंचाने के लिए उसका तेज होना जरूरी है। दूरियां जितनी ज्यादा होंगी उतनी तेज चिल्लाना पड़ेगा। दिलों की यह दूरियां ही दो गुस्साए लोगों को चिल्लाने पर मजबूर कर देती हैं।वह आगे बोले, जब दो लोगों में प्रेम होता है तो वह एक दूसरे से बड़े आराम से और धीरे-धीरे बात करते हैं।


प्रेम दिलों को करीब लाता है और करीब तक आवाज पहुंचाने के लिए चिल्लाने की जरूरत नहीं।जब दो लोगों में प्रेम और भी प्रगाढ़ हो जाता है तो वह खुसफुसा कर भी एक दूसरे तक अपनी बात पहुंचा लेते हैं। इसके बाद प्रेम की एक अवस्था यह भी आती है कि खुसफुसाने की जरूरत भी नहीं पड़ती। एक दूसरे की आंख में देख कर ही समझ आ जाता है कि क्या कहा जा रहा है।
शिष्यों की तरफ देखते हुए संत बोले- अब जब भी कभी बहस करें तो दिलों की दूरियों को न बढ़ने दें। शांत चित्त और धीमी आवाज में बात करें। ध्यान रखें कि कहीं दूरियां इतनी न बढ़े जाएं कि वापस आना ही मुमकिन न हो।

रास्ते कठिन है तो दोड़ने का मजा कुछ और ही है, और मंजिल जब देश का गोरव है
तो पहुचने का स्वाभिमान भी कुछ और ही है !!
राहुल बाबा कुछ तो विचार करो ? देश की गरीबी पिछले साठ सालो में जस की तस पड़ी रही , भूखे नंगो की भीड़ हर जगह मौजूद रही तब तुमको गुस्सा नहीं आया कभी संसद में या बाहर आवाज़ ऊँची कर विरोध नहीं किया......अब जब देश आस्ते आस्ते प्रगति करना शुरू किया .....मोदीजी के प्रयासों से विकाश दर ७.५% छु गयी .....तो तुमने घडियाली आंसू बहाने चालू कर दिए ......
केवल संसद में चिल्लाने से कुछ नहीं होना ...........सत्ता तुम्हारे हाथ से निकल गयी उसका मलाल न करो ........मोदीजी अगर 18 घंटे दोड़ भाग कर, तन मन से देश की आर्थिक प्रगति और सामरिक सुरछा के लिए लड रहे हे तो उनका साथ देना तुम्हारा दायित्व बनता है ......साथ मिलकर देश को आगे बढiवो ........और कुछ नहीं तो कम से कम उनके विकाश के रास्ते में बाधा तो मत करो

रास्ते कठिन है तो दोड़ने का मजा कुछ और ही है, और मंजिल जब देश का गोरव है
तो पहुचने का स्वाभिमान भी कुछ और ही है !!
राहुल बाबा कुछ तो विचार करो ? देश की गरीबी पिछले साठ सालो में जस की तस पड़ी रही , भूखे नंगो की भीड़ हर जगह मौजूद रही तब तुमको गुस्सा नहीं आया कभी संसद में या बाहर आवाज़ ऊँची कर विरोध नहीं किया......अब जब देश आस्ते आस्ते प्रगति करना शुरू किया .....मोदीजी के प्रयासों से विकाश दर ७.५% छु गयी .....तो तुमने घडियाली आंसू बहाने चालू कर दिए ......
केवल संसद में चिल्लाने से कुछ नहीं होना ...........सत्ता तुम्हारे हाथ से निकल गयी उसका मलाल न करो ........मोदीजी अगर 18 घंटे दोड़ भाग कर, तन मन से देश की आर्थिक प्रगति और सामरिक सुरछा के लिए लड रहे हे तो उनका साथ देना तुम्हारा दायित्व बनता है ......साथ मिलकर देश को आगे बढiवो ........और कुछ नहीं तो कम से कम उनके विकाश के रास्ते में बाधा तो मत करो

भाजपा सांसद किरण खेर ने कांग्रेस को राहुल गांधी द्वारा बंगलुरू के माउंट कार्मेल कॉलेज में दिए गए भाषण से सीख लेने की सलाह दी। सांसद ने कहा कि राहुल ने बहुत अच्छी स्पीच दी थी। राहुल ने कहा था कि सब लोग मिलकर प्यार से काम करें। मैं यही कहना चाहती हूं कि आप हमसे नफरत न करें, न हमें आपको नफरत करने पर मजबूर करें।......तुम्हारी मनमानी पर लालची मीडिया नहीं बोलता है तो क्या पूरा देश तो देख रहा है और सब समझ भी रहा है.........सुधर जावो राष्ट्र की मुख्य धारा के साथ जुड़ जावो नहीं तो याद रखो जनता संसद के बाहर भी सलट सकती है .....जनता अब और चुप नहीं बैठगी ........भूल जावो की बिहार में जीत गए या बंगाल में तुम जीत भी जावोगे तो वो जीत टिकेगी .......... तूफान में उभरी राष्ट्रवादी ताकतों को दबाने की चेष्टा न करो......ये अब तुम्हारे रोके अब नहीं रुकेगी !!