रेलवे मिनिस्ट्री ने जारी की देश के 10 सबसे साफ रेलवे स्टेशन की लिस्ट !!




देश के 10 सबसे साफ रेलवे स्टेशन में बिलासपुर तीसरा, मिनिस्ट्री ने जारी की लिस्ट
रेलवे मिनिस्ट्री की देश के सबसे साफ और सबसे गंदे रेलवे स्टेशनों की जारी लिस्ट में बिलासपुर स्टेशन को सबसे साफ स्टेशन में तीसरे नंबर पर रखा गया है। वहीं साफ-सुथरे स्टेशनों की लिस्ट में से रायपुर स्टेशन का नाम बाहर हो गया। इसमें ए1 और ए कैटेगरी के स्टेशनों की अलग-अलग रैंकिंग की गई है।
बीते 8 महीने में जोनल मुख्यालय के रेलवे स्टेशन में स्वच्छता के मामले में बिलासपुर रेलवे स्टेशन ने देश में खास पहचान बना ली। साफ-सफाई को लेकर रेल मंत्रालय द्वारा कराए गए सर्वे में बिलासपुर को देश के 75 ए-1 श्रेणी के स्टेशनों में तीसरा स्थान हासिल हुआ है।
मानिटरिंग ऐसी कि सिस्टम खुद अपडेट हुआ
- मैकेनाइज्ड क्लीनिंग स्टेशन होने के कारण सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई। तीन पालियों में 70 के बजाय 182 कर्मचारियों को तैनात किया गया।
- सबसे अहम यह कि कर्मचारी काम करें, इसके लिए मानिटरिंग सिस्टम को दुरुस्त किया गया। 5 हैल्थ इंस्पेक्टर और 1 चीफ हैल्थ इंस्पेक्टर को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई।
- गजटेड ऑफिसर को स्टेशन में बिठाया गया ताकि सरकारी मशीनरी दुरुस्त रहे। इन तमाम प्रयासों का असर यह हुआ कि क्लीनिंग सिस्टम अपने आप अपडेट होता गया।
ड्रेनेज पर दिया ध्यान
-स्टेशन में स्वच्छता बरकरार रखने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया गया। स्टेशन की बड़ी समस्या ट्रेनों से वाशेबल एप्रन पर पसरने वाली गंदगी और उसका ड्रेनेज (नाली) में जमा होना था।
-अब ड्रेनेज की रोज सफाई होती है, गंदगी ठहरती नहीं और वातावरण साफ रहता है।
सर्वे में यह पूछा था
इस सर्वे में 75 ए-1 रेलवे स्टेशनों को शामिल किया गया था, जिसकी सालाना कमाई 6 से 50 करोड़ रुपए है। वहीं ए कैटेगरी के 332 स्टेशन शामिल थे।
पैसेजर्स से 40 प्वांइट्स पर फीडबैक लिया गया था। बिलासपुर जोन में रायपुर ए-1 और दुर्ग को ए कैटेगरी का दर्जा प्राप्त है।
ए1कैटेगरी में सबसे क्लीन स्टेशन





ए1कैटेगरी : सबसे गंदे स्टेशन
1. पुणे (महाराष्ट्र) 
2. मुगलसराय (यूपी)
3. गुवाहाटी (असम)
4. हजरत निजामुद्दीन (नई दिल्ली) 
5. सियालदह (वेस्ट बंगाल)
ए कैटेगरी: सबसे गंदे स्टेशन
1. मधुबनी (बिहार)
2. बलिया (यूपी)
3. रायचूर (कर्नाटक)
4. शाहगंज (यूपी)
5. बख्तियारपुर जंक्शन (बिहार)
ऐसे हुआ सर्वे...
- आईआरसीटीसी ने टीएनएस इंडिया प्रा.लि. के जरिए सर्वे कराया।
- इस सर्वे को 'स्वच्छ रेल स्वच्छ भारत अभियान' के तहत पूरा किया गया।
- अलग-अलग स्टेशन पर करीब 1.35 लाख यात्रियों से राय ली गई और स्पॉट सर्वे हुआ।
- कई स्टेशनों पर कूड़े का अंबार मिला तो कहीं प्लेटफॉर्म की फर्श उखड़ी हुई सर्वे टीम को मिली।
- उसके आधार पर ए1 श्रेणी के 75 और ए श्रेणी के 332 स्टेशनों को पांच श्रेणियों में बांटा गया।
- इसमें ग्रीन यानी सबसे साफ, वहीं रेड यानी सबसे गंदा।
- ए1 श्रेणी के सिर्फ तीन स्टेशन 1000 में से 750 से ज्यादा प्वाइंट्स हासिल कर सके।
- वहीं ए श्रेणी के 10 स्टेशन इससे ज्यादा नंबर ले सके।
वे कारण जिससे नहीं बन सके नंबर-1
-प्लेटफार्म 4-5 का कांक्रीटीकरण हुआ है। यहां मशीनों से सफाई संभव नहीं है, लिहाजा रात में धुलाई होती है।
-प्लेटफार्म में लगे चेकर टाइल्स पुराने हैं, जिनमें मशीनों से सफाई के बाद भी चमक नहीं आती।
- प्लेटफार्म 2-3 का वाशेबल एप्रन टूटा हुआ है, जिसके कारण लाख धुलाई के बाद भी गंदगी पसरी रहती है।
- बड़ा सर्कुलेटिंग एरिया, जहां तमाम कोशिशों के बाद भी गंदगी रहती है।
एयरपोर्ट की तर्ज पर सफाई
सफाई व्यवस्था में अत्याधुनिक उपकरणों से बड़ा बदलाव हुआ। झाड़ू और पोंछा के लिए राइड ऑन स्क्रबर, राइड ऑन स्वीपिंग मशीन, हाई प्रेशर जेट से लेकर सिंगल डिस्क स्क्रबिंग जैसे अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल शुरू हुआ। ऐसी मशीनों का उपयोग एयरपोर्ट में होता था। सवाल उठता है कि मशीन कैसे आईं? दरअसल भारतीय रेल ने ए-1 क्लास के स्टेशनों में मैकेनाइज्ड क्लीनिंग सिस्टम की सुविधा दी है। समझिए कि स्टेशन की सफाई के लिए साल में 1 करोड़ रुपए खर्च होते थे। 21 जुलाई 2015 से मैकेनाइज्ड क्लीनिंग सिस्टम की शुरुआत होने के बाद इस पर हर साल 3.10 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। बताना लाजिमी है ए-1 श्रेणी के तमाम स्टेशनों को सफाई के लिए भारी-भरकम बजट दिया गया।....
Sanjay Mishra