
मायावती से नाराज कई बसपा नेताओं ने पार्टी को कहा अलविदा
आदरणीय,बहन जी सादर जय भीम मै सन् 2002 से बसपा का सक्रिय सदस्य रहा हू ,मैने मान्यवर कांशीराम जी के प्रेरणा से बसपा कि सदस्यता ग्रहण किया,उनका यह मानना था कि समाज का वह तबका जो बर्षो से शोशित वह पिछडा रहा है उसे राजनीतिक प्रयास के द्वारा समाज के मुख्य धारा से जोडा जाय। हम जैसे कुछ लोगो को यह अच्छा लगा और हम बसपा से जुड गये,इस बीच आपके आदेश से पार्टी के अन्दर समाज के बनाए गये संगठन के हर पद पर (लोक सभा अध्यक्ष,जिला अध्यक्ष, जोन -कोर्डीनेटर,और बाद मे सेक्टर कोर्डीनेटर )रह कर मैने चार-चारमंडलो,आजमगढ़,गोरखपुर,बस्ती,और देवीपाटन मंडलो मे अपने संसाधनो से पार्टी का पूरी ईमानदारी से कार्य किया किया।
उस दिन दयाशंकर जी ने आपको अपशब्द बोला तब भी बहुत बुरा लगा और मै भी अन्य कार्यकर्त़ोओ के साथ लखनऊ पहुचा था आपके अपमान का बदला लेने पर वहा जो हो रहा था उसे देख कर और सुन कर मेरी आत्मा काँप गयी ,वहा पर तो वही हो रहा था जिसको त्याग कर मेरे जैसे कुछ लोग बसपा मे गये थे,एक गाँली के बदले हजार गाली वो भी उन मासूमो को जिनका कोई कसूर नही था,मुझे बर्दाश्त नही हुआ और मै कार्यकर्म बीच मे छोड कर वापस आ गया।
मै रात मे सो नही पाया,सोचता रहा एक सँर के बदले हजार सँर इसी सिद्धान्त को ही तो त्याग कर हम बसपा मे गये थे और वहा भी अब वही,सुबह जब दयाशंकर जी कि पत्नी को देखा अपने साथ हुए अपमान के न्याय पाने के लिए अकेले लखनऊ के सड़को पर दर-दर कि ठोकर खाते हुए तो हमारी आत्मा हिल गयी मै अपने को लाख समझा रहा हू पर मानता हि नही,
और उसमे जब आपके विचार हमने सुना कि दयाशंकर को एहसाश दिलाने के लिए यह जरुरी था कि उनकी मासूम माँ,पत्नी तथा अबोध बेटी को अपमानित किया जाय तो फिर अब बाकी क्या बचा,रात मे जब सो रहा हू तो मेरे कानो मे दयाशंकर कि माँ,पत्नी वह मासूम बेटी कि चीख सुनाई पडती है ,वो मुझसे पूछती है क्या ?क्षत्रीय समाज का खून-खून नही रहा पानी हो गया,जिसमे इतनी भी गैरत नही बची है वह अपने मासूम माँ,बहन और अबोध बेटी के साथ हुए अन्याय पर भी न खौले
मै बहुत हि बेचैन हो जा रहा हू मेरी आत्मा मुझे धिक्कारती है,वह कहती है यह स्थान तुम्हारे लिए नही है।अतःआप पार्टी से हमारा इस्तिफा स्वीकार करे।एकबात और कहूगा आपके इस कृत्य से समाज मे वर्ग संघर्ष कि सम्भावना बन गयी है,आपने क्षत्रिय समाज के रगो मे तेजाब डाल दिया है,कही ऐसा नहो कि प्रजातंत्र हि न छिन्न -भिन्न हो जाए।अलविदा बहनजी,अलविदा बसपा बहन कुमारी मायावती जी !
मैं ये पत्र आपकी गरीमा व आपके भक्तों के देवी भक्ति को ध्यान में रखते हुए लिख रहा हुं । दयाशंकर सिंह ने जो कहा वो गलत था , मै उसका समर्थन नहीं कर रहा हुं बल्कि निन्दा करता हुं । उसके बाद आपने कहा मै व्यकितगत रूप से किसी पर टिपण्णी नहीं करतीं ,
शायद आप राजनीति की चासनी में भूल गई है, मै आपको याद दिला दूं ,आप ही ने नारा दिया था की तिलक, तराजु और तलवार इनके मारो जूते चार , ये तो आपके गालि नहीं थे, ये तो आपके संस्कारिक शब्द थे । जूते मारना तो आपके डीएन में है, भला वो गाली कैसे हो सकता । आपने अपने स्वार्थ में क्या किया राजा भैया के साथ वो सभी को पता है ।
दयाशंकर सिंह की गाली आपको गाली लगी , लेकिन उसके बाद आपके तथाकथित दलित प्रेमी, गुडें, बवाली और अंध भक्तों ने खुले मंच से कहने लगे दयाशंकर कुत्ते को,, . फांसी दो फांसी दो , दयाशंकर हरामजादे को फांसी दो। .... फांसी दो ।
बहन जी आपके गुंडे कार्यकर्ता यहीं नही रूके और खुले मंच से कहने लगे दयाशंकर की बहन बीबी और बेटी को,, हमारे पास भेजो... पास भेजो,,, ये सुनने के बाद आपने कितने बेशर्मी से ये कहा, कि गाली को ऐहसास कराने के लिए गाली दी गई । मुझे समझ में नहीं आया की आपके ४० साल के कार्यकर्त्ता १२ साल की मासूम में क्या देख रहे थे और क्या घटिया सोच थी इनकी ये तो आपको पता होगा
पता है आपको उस 12 साल की मासूम पर इसका क्या प्रभाव पड़ा, घर मैं कैद हो गई वो । जब मैने स्वाति जी से बात करने के लिए फोन किया तो उनके बिजी होने पर मासूम ने ही फोन उठाया और जब मैनें बात चित को आगे बढाया तो बोल पड़ी कि, भैया नसीमुद्दिन अंकल मुझे बुला रहें थे ,पुछिये उनसे कहा आना है मुझे । उसके ये शब्द सुनकर मेरा गला बैठ गया । अब आप ही बता दीजीए उस मासूम ने कौन सा दलित विरोधी बयान दी थी ।
धिक्कार हे आपको आपकी राजनीति की , धिक्कार है आपके तथाकथित दलित प्रेमी कार्यकताओं की । अगर दयाशंकर गिरफ्तार होने चाहिए तो आपके कार्यकर्ता क्यों नहीं ? अगर ये कानून बीजेपी के लिए होने चाहिए तो बीएसपी के लिए क्यों नहीं । कब तक एक देश में दो कानून होंगे । हां ये तो मै भूल ही गया कि ये पत्र आपके गुडे कार्यकर्ता पढ़कर मुझे बीजेपी के ऐजेंट , दलाल और पता नहीं क्या कहेगें लेकिन कोई फर्क नहीं पडता मुझे । जनता है सब कुछ जानती है इस घटना ने सबके होश उड़ा दिए। एक जातीय लड़ाई को जन्म दे दिया है यह लड़ाई किसके पाले होगा ये समय ही बतायेगा।






