म्यांमार से रोहिंग्या मुस्लिमों की घुसपैठ पर केंद्र सरकार गंभीर है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर सरकार से इस बाबत विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। यूपी और जम्मू कश्मीर में म्यांमार से आए लगभग डेढ़ लाख रोहिंग्या परिवार अवैध रूप से रह रहे हैं। जम्मू में इसके अलावा म्यांमार के 325 परिवारों के 1435 लोगों के अवैध रूप से रहने पर भी गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी है।उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, म्यांमार से अवैध तरीके से घुसपैठ के बाद सबसे अधिक घुसपैठिए जम्मू कश्मीर और उत्तर प्रदेश में ही रह रहे हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, हैदराबाद, केरल, असम और दिल्ली में भी इनकी मौजूदगी है। केंद्र सरकार सभी संबंधित राज्यों से सलाह मशविरा करने के बाद इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई फैसला लेना चाहती है। सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू कश्मीर से केंद्र को इनपुट भेजा है कि म्यांमार से आए घुसपैठिए स्थानीय मुस्लिम परिवारों में शादी कर रहे हैं।म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों पर मुकदमा चलाया गया है और उन्हें देश का नागरिक नहीं माना गया है। इस कारण यह समुदाय भारत की ओर रुख कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय उप सुरक्षा सलाहकार अरविंद गुप्ता ने इस मुद्दे पर जम्मू कश्मीर के गृह सचिव से बातचीत की है।
म्यांमार के ये घुसपैठिए बांग्लादेश की सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश कर रहे हैं। इनमें से कई के पास संयुक्त राष्ट्र से प्राप्त शरणार्थी प्रमाण पत्र भी हैं। इसलिए पकड़े जाने के बाद भी इन पर कार्रवाई मुश्किल हो जाती है। पहले त्रिपुरा के पास म्यांमार के इस समुदाय के लोगों की पहचान हुई थी। उनके साथ एक कश्मीरी युवक भी पकड़ा गया था। लोगों का भी जमावड़ा है। राज्य सरकार ने ऐसे 325 परिवारों की पहचान की है जिसमें 1435 सदस्य हैं। जम्मू कश्मीर सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू के नरवाल में म्यांमार से आए 47 और छनी रामा में 37 परिवार रह रहे हैं। भवानी नगर में 79 और बागे बाहू में 44 परिवार हैं। विधाता नगर में छह और भटिंडी में चार बर्मीज परिवार हैं। रेलवे स्टेशन के पास के इलाके और कारगिल कालोनी में भी इनकी मौजूदगी है।
