स्मृति ईरानी ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली में बदलाव कर राष्ट्रीयता, राष्ट्रीय गौरव और प्राचीन भारतीय मूल्यों को समाहित करने पर जोर।


नई दिल्ली। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी शिक्षण संस्थाओं के पदाधिकारियों के साथ चर्चा की। मंत्रालय नई शिक्षा नीति तैयार करने के काम में जुटा है। सूत्रों ने बताया कि चर्चा के दौरान नई शिक्षा नीति को लेकर लोगों के विचार सुने गए। आधुनिक शिक्षा में राष्ट्रीयता, राष्ट्रीय गौरव और प्राचीन भारतीय मूल्यों को समाहित कर शिक्षा प्रणाली में बदलाव करने पर जोर देने की बात कही गई। यह चर्चा ऐसे समय की गई जब अगले सप्ताह नैनीताल में आरएसएस की तीन दिवसीय वाषिर्षक बैठक होने जा रही है। मानव संसाधन विकास मंत्री की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में इन शिक्षण संस्थाओं ने प्रस्ताव पारित कर पाठ्यक्रमों में संस्कृत और वैदिक मूल्यों को ब़़ढावा देने का समर्थन किया है। भारतीय शिक्षण मंडल ने पिछले सप्ताह शिक्षा पर एक मसौदा तैयार किया। इसमें कक्षा नौ से 12 तक छात्रों को मातृभाषा और एक शास्त्रीय भाषा पढ़ाए जाने की सिफारिश की गई है। शास्त्रीय भाषा संस्कृत या अन्य कोई भाषा जैसे अरबी, फारसी, लैटिन या ग्रीक आदि हो सकती है। जून में दीनानाथ बत्रा की अध्यक्षता वाले शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने देश भर के स्कूलों में वैदिक गणित पढ़ाने का प्रस्ताव किया है। साथ ही सभी राज्यों में त्रिभाषषा फार्मूले को प्रभावी ढंग से लागू करने को कहा है। नई शिक्षा नीति को लेकर इस वषर्ष जनवरी से सलाह-मशविरा शुरू किया गया और इस साल के अंत तक इसे विचार के लिए तैयार हो जाने की उम्मीद है। मंत्रालय सुझाव और राय जानने के लिए जमीनी स्तर पर शिक्षा से जुड़े सभी लोगों तक पहुंचने के प्रयास में है। Subhash Prasad Hindu