सेक्युलर जमात पुकार रही है की मानवता के आधार पर याकूब मेमण को फांसी नहीं दी जानी चाहिए !

    
Sunil M Gupta : बंधुओं ये तो हद् हो गयी Tv चैनल की trp की भूख की, आज करीब करीब हर TV चैनल पर याकूब मेमन के परिवार का interview दिखाया ज रहा है।इतनी हमदर्दी एक आतंकी जिसने कितने घरों के चिरागों को बुझा दिया हो उस के लिए??19 वर्ष तक मुक़दमा चलने के बाद फैसला दिया है अदालत ने। समझ नहीं आता क्या चाहते हैं ये मीडिया वाले?? इन पर देश को बिल्कुल भरोसा नहीं करना चाहिए!!इनकी जो मती-गती का कुछ पता नहीं कल को अगर पाकिस्तान के साथ युद्ध छिड़ गया तो पाकिस्तानी सेना की वाहवाही करने लग जाएँ!ईश्वर रक्षा करे इस देश की!!

                

Mahendra Tamhaneसेक्युलर जमात के लोग कुछ दिनों से बाँग पुकार रहे है की मानवता के आधार पर याकूब मेमण को फांसी नहीं दी जनि चाहिए। मान लिया की आतंकवादी भी आख़िर मानव ही होता है और मानव के प्रति मानवता दिखाना मानव सहज स्वभाव है। क्या मानवता के ये महान पुजारी सार्वजानिक रूप से निवेदन करेंगे की स्व.नथ्थूराम गोडसेजी को दी गयी फांसी की सज़ा भी मानवता के विरुद्ध का कृत्य था। यदि अनेक निर्दोष मानवों की हत्या करने के बाद भी याकूब मेमण मानवीय अनुकंपा के लिए हक्क्दार है तो देश का विभाजन करवाने वाले सिर्फ़ एक कथित महात्मा की हत्या करने वालला व्यक्ति अनुकंम्पा के लिए अनेक गुना हक्क्दर है। ओ सेक्युलर जमात के लोगों, पहले नथ्थूराम गोडसेजी के लिए आंसू बहाइये बाद में याकूब की बात करना !

              


Prabhakar Tripathi : करवाया अब चौकने की बारी है, लगभग 53 मुस्लिमों ने तब के उपलब्ध prime accused याकूब के खिलाफ गवाही दी....अबू असीम आज़मी नाम पहचान में आया? आज के अबू आज़मी (समाजवादी पार्टी) भी तब टाडा कोर्ट में CBI द्वारा आरोपित थे, इन पर आरोप था इन्होंने बम ब्लास्ट के लिए ट्रेनिंग दिलवाने के लिए बंदो को पाकिस्तान भेजने के लिए टिकट का इंतज़ाम किया था (तब इनकी ट्रेवल एजेंसी थी),ये अबू आज़मी भी अपना गुनाह याकूब पर ड़ाल खुद को बेदाग़ साबित करवा आये 1998 में सुप्रीम कोर्ट से,..आज यही अबू आज़मी सबसे ज़्यादा हल्ला मचा रहे है! इस पुरे घटनाक्रम में याकूब को उसके नज़दीकियों ने ही गवाही देकर फंसाया, सबने एक मुश्त याकूब का नाम लिया.......अब ये बताओ कौन दोषी है, अबू आज़मी और तुम्हारी खुद की कौम के लोग याकि तब की कोई भी रही सरकार (वैसे तब शरद पवार महाराष्ट्र में और केंद्र में 5 साल छोड़ कांग्रेस की सरकार रही)जब आतंकवादी हिन्दुओ का कत्ले आम करता है तो उस समय आतंकवादियों का कोई धर्म ,कोई जात नहीं होता .परन्तु जब आतंकवादी को सजा सुनाई जाती है तो मुसलमान बन जाता है,अभी देखिये न याकूब मेनन का कोई धर्म नहीं था लेकिन जब उसे फ़ासी की सजा दी जाने लगी तो उसने इस्लाम कुबूल कर लिमुंबई बम ब्लास्ट में 226 आरोपित बनाये गए, जिसमे से लगभग 100 भगोड़े घोषित हो गए जैसे दाऊद और टाइगर वगैरा, बाकी बचे 126 कस्टम और पुलिस के अधिकारी थे जिन्होंने हथियार और RDX के लिए safe passage मुहैयाया !


           


                             




Ranjan Kumar : शुरू हो गयी गद्दारो और आतंकवादियो के समर्थन में बोलना , ये और बढ़ेगा जितने भी देशद्रोही है सब के सब भौकेंगे । सुप्रीम कौर्ट के फैसले के ऊपर भी अब सवाल उठ रहे हे इससे ज्यादा आज़ादी अब कहा मिलेगी । अब सुप्रीम कौर्ट एक आदेश पारित करे जिन जिन ने मुह खोला है इस फैसले के विरुद्ध उनको कुछ दिन जेल में डाला जायेगा ।