"दुख्तरे हिन्दोस्तान, नीलामे दो दीना"'....क्या आज फिर इतिहास हमारी परीक्षा ले रहा है ......

आर्य प्रवीण कन्यान : दुख्तरे हिन्दोस्तान, नीलामे दो दीनार' .....अर्थात 
इस जगह हिन्दुस्तानी औरतें दो-दो दीनार में नीलाम हुई ......
उस समय तो यह सब बाते समझ नही आई पर आज उस वाक्य के बारे में जानने की इच्छा हुई .....
खोजने पर पता चला कि - महमूद गजनवी ने हिन्दुओं को अपमानित करने के लिये अपने 
17 हमलों में लगभग 4 लाख हिन्दु औरतें पकड़ कर गजनी उठा ले गया .......
महमूद गजनवी जब इन औरतों को गजनी ले जा रहा था तो वे अपने भाई, और पतियों
से बुला-बुला कर बिलख- बिलख कर रो रही थी ....और अपने को बचाने की गुहार लगा रही थी .....
लेकिन करोडो हिन्दुओं के बीच से मुठ्ठी भर मुसलमान सैनिकों द्वारा भेड़ बकरियों की तरह ले जाई गई .....
रोती बिलखती इन लाखों हिन्दु नारियों को बचाने न उनके पिता आये, न पति न भाई 
और न ही इस विशाल भारत के करोड़ो हिन्दु .......
उनकी रक्षा के लिये न तो कोई अवतार हुआ और न ही कोई देवी देवता आये ......
महमूद गजनवी ने इन हिन्दु लड़कियों और औरतों को ले जा कर .....
गजनवी के बाजार में समान की तरह बेंच ड़ाला ......
संसार की किसी कौम के साथ ऐसा अपमान नही हुआ .......जैसा हिन्दु कौम के साथ 
हुआ और ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि वह सोचते हैं कि जब अत्याचार बढ़ेगा
तब भगवान स्वयं उन्हें बचाने आयेंगे .......परन्तु इतिहास से सबक लेते हुये हिन्दुओं को
समझ लेना चाहिये कि भगवान भी अव्यवहारिक अहिंसा व अतिसहिष्णुता को नपुसंकता करार देते हैं .......

                   

परन्तु अत्याचारियों का मुकाबला किये बिना ....उनके द्वारा मर जाना ...स्वर्ग का रास्ता न होकर नरक का रास्ता है .....
याद रखो- यह गाल पिटे वह गाल बढ़ाओ .....यह तो आर्यो की नीति नही ....अन्यायी से प्रेम अहिंसा यह तो गीता की 
निति नही ....हे राम बचाओ जो कहता है ....वह कायर है ...खुद अपना हत्यारा है....जो करे वीरता ...अति साहस ...
वही राम का प्यारा है .......आज फिर इतिहास हमारी परीक्षा वे रहा है ......उठों जागो अपने गुरु के देविक कार्य में
मैदान में उतर कर सेवा-रूपी "सत्याग्रह"आंदोलन शुरू करो अन्यथा बहुत देर हो जाएगी .......
जाग जाओ हिन्दू ...वरना मारे जाओगे ....इस कलयुग मे ......