A CLASSICAL REMINDER TO THE PRESSTITUTES OF THEIR DNA .

WHAT A CLASSICAL REMINDER  TO THE  PRESSTITUTES OF THEIR DNA : 
                         
एक टी.वी. पत्रकार एक किसान का इंटरव्यू ले रहा था...
पत्रकार : आप बकरे को क्या खिलाते हैं...??.......किसान : काले को या सफ़ेद को...??
पत्रकार : सफ़ेद को..........किसान : घाँस..
पत्रकार : और काले को...??.......किसान : उसे भी घाँस..
पत्रकार : आप इन बकरों को बांधते कहाँ हो...??.........किसान : काले को या सफ़ेद को...??
पत्रकार : सफ़ेद को..........किसान : बाहर के कमरे में..
पत्रकार : और काले को...??.........किसान : उसे भी बाहर के कमरे में...
पत्रकार : और इन्हें नहलाते कैसे हो...??.......किसान : किसे काले को या सफ़ेद को...??
पत्रकार : काले को........किसान : जी पानी से..
पत्रकार : और सफ़ेद को...??........किसान : जी उसे भी पानी से..
पत्रकार का गुस्सा सातवें आसमान पर, बोला : कमीने ! जब दोनों के साथ सब कुछ एक जैसा करता है, 
तो मुझे बार-बार क्यों पूछता है.. काला या सफ़ेद...???? 😡😡
किसान : क्योंकि काला बकरा मेरा है.....पत्रकार : और सफ़ेद बकरा...?...किसान : वो भी मेरा है... 😜😜
पत्रकार बेहोश... 😫😫😫😫😫😫😫


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Rajesh Goyal (Founder of a Delhi based leading advertising agency) has decided to drop Times of India from his media planning. This after the toilet paper shamelessly covered and glorified a terrorist Yakub Memon in its edition on 31st July 2015 and minutely covered the last rites of Dr. APJ Abdul Kalam. If presstitutes will try to Memonize people, they can expect such backlash.

                   


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