
इतना द्वेश भारत के इतिहास मे किसी का किसी के प्रति नही था , जितना काग्रेस का मोदी जी के प्रति है l मोदी द्वेष के कारण कांग्रेस पतन की ओर जा रही है।


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स्वार्थ की राजनीति, ईर्ष्या और द्वेष मनुष्य को अंधा बना देती है। स्वार्थ का मद उसपर इतना हावी हो जाता है कि उसके सोचने और समझने की क्षमता क्षीण हो जाती है। देश की वर्तमान राजनीति में आज ऐसा ही वातावरण बन चुका है जहां भारत सरकार के विरुद्ध तमाम विपक्षी दलों में भारी बौखलाहट दिखाई दे रही है। ये बौखलाहट इसलिए नहीं है कि भारत सरकार देश पर निरंकुश शासन कर रही है या जनता पर अत्याचार कर रही है, बल्कि इसलिए है कि देश पर मोदी सरकार शासन कर रही है। मोदी द्वेष के चलते कांग्रेस और उसके समर्थक दल अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों को भूलाकर देशविरोधी नारे लगानेवालों के समर्थन में खड़े हो गए। आपातकाल के बाद भारतीय राजनीति में यह एक और काला धब्बा साबित हो रहा है।
देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का विवेकशक्ति धीरे-धीरे क्षीण होती जा रही है। कभी भारत की स्वतंत्रता के लिए आन्दोलन करनेवाली कांग्रेस आज देशद्रोही नारे लगानेवालों के समर्थन में कैसे खड़ी हो गई? जनता में कांग्रेसी खेमा के प्रति खूब गुस्सा है और वे अन्दर से पीड़ित हैं। जनता ने देश है कि दिल्ली में देशद्रोही नारे लगानेवालों के खिलाफ लगभग 5 लाख भारत के सेवानिवृत्त सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए 21 फरवरी को राजघाट से संसद मार्ग तक "एकता रैली" निकाली थी जिसमें राहुल गांधी समेत कांग्रेसी कुनबा का कोई सदस्य शामिल नहीं हुआ, न ही आम आदमी पार्टी ने भाग लिया।
वहीं 23 फरवरी को रोहित वेमुला की आत्महत्या की आड़ में जेएनयू के देशविरोधी नारे लगनेवाले छात्रों के समर्थन में निकाली गई रैली में कांग्रेस पार्टी की ओर से राहुल गांधी और उसके समर्थक दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), जनता दल युनाइटेड (जद-यू), बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी (आआपा) के नेता शामिल हुए। इससे स्पष्ट सन्देश जा रहा है कि कांग्रेसी कुनबा किस दिशा में जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि कहीं मोदी विद्वेष की चिंगारी 'कांग्रेस मुक्त भारत' कारण न बन जाए!
PART OF MEDIA AND PAID INTELLECTS ARE USED BY ALL SORTS TO SPREAD WRONG NEWS ON MODI AND NDA BY CONGRESS





