क्या आतंकवाद का भी मजहब होता है ? और क्या वो इस्लाम है ?


Thanks YakubMemon‬ for exposing many such people, WHO  MAY   SUPPORT TERROR IF IT IS DONE BY ANY ONE OF THEIR OWN FAITH   OR   WHO     IS 
ONE OF THE VOTE BANK OR PARTNER IN GREED, now we know more whom 
to trust in this "War against terrorism.

  

देवदत्त आर्य आतंकवाद का ही मजहब होता है और वो है इस्लाम


Shalendra Singh आज देश में दो ज़नाज़े निकलें , एक को देखकर देश रोयेगा और दुसरे को देखकर देशद्रोही रोयेंगे। दोनों मुसलमान थे दोनों ने देखे होंगे कई दंगे, दोनों ने बाबरी का ढहना भी देखा होगा लेकिन एक जन्मा था रामेश्वरम में, राम उसके दिल में थे और दुसरे ने अपना आदर्श बाबर को बनाया था। हश्र आपके सामने है।किसी ने कलाम के रूप में एक वैज्ञानिक खोया तो कुछ सेक्युलर देशद्रोहियों ने याकूब के रूप में अपना खोया....... 
                                   

Diction Christian : Narendra Modi जी APJAbdulKalam जी के बड़े भाई के चरण छूते हुए हमे आप पर गर्व है
Riddhiman Arya :Instead of denouncing the terrorist and distancing themselves from his crimes, Muslims of Mumbai came out openly mourning Yakub Memon as a celebrity hero who should not have been hanged. None of these mourners came out to mourn the death of another Indian Muslim, the former Indian president APJ Abul Kalam. Between the two, it seems they would go for Yakub Memon, not APJ Kalam. How pathetic and what a pedestrian leadership they have.
देवदत्त आर्य किसी भी आतंकी घटना और आतंकवादी की निंदा मुसलमान नहीं करता

Ravi Ranjan : It's sad to see that people are paying respect to a man who wrecked havoc in this very city 22 years ago.....अब कहाँ है वो लोग जो बोलते है "आतंक का धर्म नहीं होता"....उन 257 लोगो का क्या जो उस आतंकी हमले में मारे गए??....अब्दुल कलाम जी के रास्ते पर चलना कठिन है याकूब के रास्ते पर चलना आसान |

Nageshwar Singh Baghel  : 257 मासूमों का क़त्ल करने वाला आज हीरो बना हुआ है । मैं कैसे विश्वास कर लूँ की ISIS के हमले पर यहाँ के "शांतिदूत" भारत का साथ देंगे ?
Nav Royar  वीरू बसंती संवाद .....वीरू : बसंती , आई ऍम भेरी मच एंग्री विथ यू । पर मैंने तुमसे कहा था कि इन कुत्तों के सामने मत नाचना ।.......बसंती : darling मैं क्या करती ? मैं मजबूर थी । तुम्हारी जान खतरे में थी and you know आई लभ यू सो मच, .....  हरादी, तुझे गब्बर ने सिर्फ नाचने के लिए कहा था और तू नंगी हो के नाची ?

तो मितरों, आज मुम्बई के माहिम कब्रिस्तान में बसंती गब्बर के लिए नंगी हो के नाची... और जय वीरू तियों की तरह देखते रहे । चलो अच्छा हुआ , कम से कम आज जय को पता तो चल गया कि बसंती गब्बर से कितना टूट के प्यार करती है !शुक्रिया शांतिप्रिय मुसलमानों! इस ईमानदार स्वीकारोक्ति के लिए कि आतंकवाद का बाकायदा एक मजहब होता है ।Thank you बसंती Darling,गब्बर के लिए नाचने के लिए । Ajit Singh


शुक्रिया शांतिप्रिय मुसलमानों ! सारी दुनिया को ये बताने के लिए कि कितना प्यार है कितना अहसास है तुम्हें इन खुनी दरिंदों के कारनामे से इन आतंक वादियों के मानवीय इमान  से ।शुक्रिया मुसलमानों,याकूब मेमन के जनाज़े में लाखों की संख्या में आ के आपने सारी दुनिया को पूरी ईमानदारी से ये बता दिया कि आतंकवाद के बारे में आपका क्या नज़रिया है। देवबंद के उस फतवे का कोई मोल नहीं जिसमे उन्होंने ये कहा था कि किसी आतंकी के लिए न नमाज़े जनाज़ा पढ़ी जायेगी और न कोई मुसलमाँ उसे अपने कब्रिस्तान में जगह देगा ।


            



Kuldeep Sharma :  आज[३०/०७/२०१५] को गृहमन्त्री राजनाथ सिंह जब राज्यसभा में गुरदासपुर में पाकिस्तान प्रायोजित आँतकी हमले पर ब्यान दे रहे थे तब राज्यसभा में "साँसदों का एक वर्ग", बजाए पंजाब पुलिस के "स्वाट" कमाण्डौओं द्वारा आँतकीयों का [बिना अपना एक भी कमाण्डो गंवाये] सफ़ाया करने के लिये जय जयकार करने के, देश के प्रधान-मन्त्री नरेन्द्र मोदी "हाय हाय" का हाहाकार कर टाईगर मैमन,दाउद,लख्वी जैसे दहश्तगर्दों का हौसला बड़ाने का अपराध नहीं कर रहे थे क्या ? राज्य सभा के वरिष्ठ साँसदों के इस आचरण से हिन्दुस्थान की युवा पीड़ी को इससे कैसा संदेश जा रहा है ?



Shashi Tharoor saddened by Yakub's hanging, says execution has never prevented terror attack.
Digvijaya Singh compared late APJ Abdul Kalam's funeral to the hanging of Yakub Menon. He tweeted, "What a coincidence ! Funerals of Two Indian Muslims on the same day.

Anubhav Dhingra Mr. Tharoor Says " Hanging Yakub Memon, Makes Us Murderers Too". Sir, from 1947 till today we had around 171 Executions, Including those of Kasab & Afzal Guru...... This is the First Execution in NDA, 

 
 : : Yakub Memon hanged. Exemplary urgency and commitment has been shown by Govt and Judiciary in punishing an accused of Terror .


An Unofficial Story of Conversion in Tribal Villages of Gujarat

An (IB) unofficial story on status of conversion in Tribal villages of Gujarat :
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Padre comes. A leper, a cripple, a blind are already planted in the crowd. Padre sprinkles on the three water consecrated on the name of Jesus, and look, they are cured. A powerful and influential family from the village is chosen. Money is rained on it. It converts. Others soon follow, money also continues to flow. Soon, the whole village has been converted. A church is erected.Caravan moves on. Money dries up eventually.


Many revert to native Hinduism. Many stay. Govt keeps quiet, because it has to attract investment, and mostly because every push back faces feral opposition by Congress and NGOs. Some points :
1.The self proclaimed 'Hindu leadership' of India is one big eunuch. Fattening itself on the support of innocent Hindus who believe it is effective. Conversion factories should in fact tremble even thinking of such stunts to fool people into their religion but they are happily rampaging through rural India.
2. The 'Italian witch' has a purpose in killing India's economy. Because poor Indians mean rich harvest of souls for the Padres.
3. Modi knew the game, but was too busy to save himself from the attack dogs of Italian. That is why the first thing he did as PM was to block the money pipe line from the West.
4. People say that dinosaurs died because in their last years, they had become so numb by some disease that their nerves had stopped working. So it would be many hours before a wound on the body would register in their mind, by that time it would be fatal. Hindu mass has become that body. It is being chewed at many places, but it is not able to even notice it.
Hindus need awakening to the facts. Either you love your religion and your country, so first defend it. Defend it with your life, your resources, your wealth, your time-whatever you can spare at the moment. Do not opt to die this slow death,on instalments . Or just say you don't have desire to remain proud Hindu then go for changeover  en Masses, cut short the agony, and be done with it once and forever.

क्या भारतीय होना इस्लाम के खिलाफ है ?

   
                      

‪      Narendra‬ Modi जी APJAbdulKalam‬ जी के बड़े भाई के चरण छूते हुए हमे आप पर गर्व है ‪‎!
Who says that Hindu can't bow his head on Muslims feat, But There is a condition Muslim must be worthy enough. We bow down to great Patriot Personalities and We cut head of Terrorists. We have Vedas in one hand and Shashtra on other. This statement is proven on a same day. On the one hand Narendra Modi hang Yakub and on the other He touched the feet of Kalam family head with his head. Hindu must understand and everyone must understand Bharat has this feature on thousands of years, We welcome everyone, We accept Knowledge, But We retaliate with same energy with brutal force to bury if someone try to disturb harmony. No mercy, Time is now that every Indians start thinking like this and Government too behave like this.
 
क्या भारतीय होना इस्लाम के खिलाफ है? ( A humble advice to  All peace loving people, kindly read and discuss to find a logical and true answer.)
कलाम साहब को ले कर मुसलमानों के जो कुछ छुटपुट उल-जलूल पोस्ट्स या ट्वीट्स आ रहे हैं उस से एक दर्द सा उठता है दिल मैं । लेकिन इस बात का एक बुनियादी पहलू मेरे समझ में जो आ रहा है, पेश कर रहा हूँ । Canvas बड़ा है इसलिए कनैक्शन थोड़े लूज लग सकते हैं । कृपया धैर्य से पढ़ें और सोचें, या फिर मर्जी आप की ।यूं देखने जाये तो इन लोगों को पहले से पता होगा ही कि उनके विरोध से मुसलमान की छबि और भी खराब होगी । सोशल मीडिया में और मुख्यधारा में भी मज़ाक उड़ाया जाएगा ये भी अंदेशा होगा, तो फिर क्यूँ?

एक वाक्य को देखिये तो इसके पीछे की मनोभूमिका समझ आने लगेगी । “कोई भी जीत छोटी नहीं, कोई भी हार बड़ी नहीं’ । दर उल इस्लाम और दर उल हर्ब आप को पता ही होगा । जो मुल्क इस्लामी नहीं वो इस्लाम के शत्रुओं का है (दर उल हर्ब) और उसे इस्लाम के सत्ता में लाना इस्लाम का ध्येय होता है । यह निरंतर संघर्ष के सिवा अशक्य है और हर संघर्ष रण नहीं होता, ना ही उसमें हिंसा होती है । लेकिन संघर्ष होता है और उसमें हार जीत तो होती रहती है ।

उत्पात के महागुरु Saul Alinsky के नियम सब जगह लागू होते ही हैं । समाज में संघर्ष पैदा कैसे किए जाते हैं उस पर उनका सुंदर विवेचन है । उनके 7 वे और 8वे नियम यहाँ लागू होते दिख रहे हैं -....लोगों को interested रखने के लिए हमेशा नया कुछ करते रहिए ताकि लोग साथ देते रहेंगे । (7) ......और – विरोधियों को सांस न लेने दें, हमेशा कुछ नया तरीका ढूंढ निकाले उनपर हमला करने का । अगर आप के एक तरीके को वे समझ जाते हैं तो कुछ और नया, अनपेक्षित करिए ।(8)

इन दोनों नियमों को हम रोज चरितार्थ होते देख ही रहे हैं । कहीं न कहीं किसी न किसी बहाने ये इस्लाम को खतरे में ला देते हैं । कभी बांग देनेवाले लाउड स्पीकर की आवाज जान बूझ कर बढ़ाने का मामला हो या आरती के लिए लगाए लाउडस्पीकर उतरवाने हों । सिनेमा के किसी दो मिनट के प्रसंग से या किसी किरदार के नाम पर या कोई सीन पर भावनाएँ आहत करवानी हों या दुनियामें कहीं भी अपने कर्मों के कारण गैर मुस्लिमों के हाथों मार खाये मुसलमानों के लिए सहानुभूति दिखाने के लिए हिंसक मोर्चा निकालना हो । कोई भी हथकंडा जायज है अगर वो इनकी सामाजिक दहशत बरकरार रखता है । ये भी उनके लिए जीत है जो उनके अनुगामियों को interested रखता है । जहां भी विपक्ष टंटा न बढ़ाने की नीयत से मामला छोड़ देता है वहाँ ये अपने जीत समझते हैं और इसी भावना को प्रचारित करते हैं ताकि अनुयायी जुड़े रहें ।

आप ने अगर उनके नेताओं के भाषण देखें या सुने होंगे तो हर अपील इस्लाम के नाम पर होती है तथा हर जीत का श्रेय इस्लाम को दिया जाता है । इसके कारण हर किसी को दर उल हर्ब में अपने कर्तव्य का पालन करने की प्रेरणा हासिल होती है । कभी कोई सामूहिक एक्शन में भाग ले, या फिर कोई बहस में भी इस्लाम का पक्ष defend करें, कहीं तो वो इस्लाम के लिए काम कर रहा है । ये कर्तव्य भावना ही उनके नेताओं के सौदेबाजी की ताकत है ।

अ-घुलनशीलता में ये शक्ति समझते हैं । कैसे, ये समझ लें । परिवेश में ये कुछ न कुछ कपड़े या और कोई चिह्न का अंगीकार करेंगे जिससे इनका मुसलमान होना अधोरेखित होगा । अपने आप में लोग दूरी बनाएँगे ताकि उनसे उलझे नहीं । इसका गलत फायदा भी भरपूर उठाते हैं उठानेवाले, बहुतों को कोई न कोई किस्सा तो याद होगा ही । इसको भी एक बड़ी सफलता मानी जाती है जिसकी बाकायदा डींगे हाँकी जाती हैं – मियाभाई से कोई पंगा नहीं लेता भाय ! अपुन कुछ बी करें....कि मैं झूठ बोलिया? ...........यहाँ तक अगर आप सहमत हैं तो बहुत सारी situations आप को अपने आप समझ में आएगी, in fact, ये पढ़ते पढ़ते ही कई प्रसंग स्मरण - समझ में आ गए होंगे ।

अब आते हैं इस लेख के शीर्षक पर – क्या भारतीय होना इस्लाम के खिलाफ है? कलाम साहब को क्यों Murtid कहा जा रहा है ? क्यों उनके वीणा वादन या गीता का अभ्यास इत्यादी को कोसा जा रहा है ? जो भी कहा जा रहा है, बस “इस्लाम से खारिज” यही कहना बाकी रहा गया है । शायद पद की गरिमा के कारण ही कह नहीं रहे हों । उस से भी दुख की बात यह है कि इक्का दुक्का राष्ट्रभक्त मुसलमान (हैं, और गर्व है कि मित्र सूची में हैं) छोड़कर बाकी सभी भारत में रहनेवाले मुसलमान इस पर चुप्पी साधे हैं । या फिर गरियाने जाने या फिर और भी कोई डर से चुप हैं ।

इस से क्या लाभ होंगे इनको?..............इनको सब से बड़ा लाभ होगा कि मुसलमान की छबि खराब होगी । जी हाँ, यह इनके लिए लाभ ही है ! Behaviour pattern देखिये, समझ में आएगा । हिन्दू और मुसलमान के बीच दूरी बढ़ेगी । Opportunities के दरवाजे बिना कुछ directly कहे, बंद हो जाएँगे । मौके नकारे जाने पर automatically वो मुसलमान, मुस्लिम समाज से ज्यादा जुड़ेगा जिसके मन पर इनका कब्जा है । समाज के साथ, समाज में रहना है तो समाज जो कहे, समाज जो करे वो करना होगा । और समाज इनके शिकंजे में है । शिकंजा और मजबूती से कसता जाएगा । कश्मीर में यही हुआ था। आजमाया हुआ फॉर्मूला है । नफरत भी बढ़ेगी । मौका नकारा गया युवा का मन नफरत के खेती के लिए सब से उपजाऊ जमीन हैं !

                          

तो आप समझ ही गए होंगे कि अविरत संघर्ष क्यों और कैसे जारी है । संघर्ष के लिए इस्लामी पारिभाषिक शब्द से आप परिचित होंगे ही – जिहाद ! लक्ष्य के लिए किया गया हर संघर्ष आप इस नजरिए से जब समझेंगे तो समझ आएगा कि मिलनसार, अच्छे दोस्त वगैरा सब गुण होते हुए भी ये समाज मुख्यधारा में घुलता क्यूँ नहीं है ।संघर्ष के लिए एक और शब्द या कहो मुहावरा, प्रचलित है – जद्दोजहद !...न जाने क्यूँ मुझे ये शब्द हमेशा ‘जिद और जिहाद’ सुनाई देता है । आप को?.......इनके नेताओं का performance index देखें तो यही है । नफरत बढ़ाना और मौके नकारे जाने का रोना रो कर नफरत को और बढ़ाना । जहां कुछ स्टैंडर्ड की शिक्षा पा कर मुस्लिम बच्चे भी मुख्यधारा में जुड़ सकते हैं, नए पीढ़ी के कलाम बन सकते हैं, उन नौनिहालों के सपनों के सर ये कलम कर देंगे ।

  

भारत के मुसलमानों की तरक़्क़ी तभी मुमकिन है जब वे भारतीय बनें । उस से कोई इस्लाम खतरे में नहीं आता। हाँ। आप के नेताओं की राजनीति जरूर खतरे में आएगी । और हाँ भाई, हमें अपना दर -उल -हिन्द प्यारा है और उसे दर-उल -इस्लाम नहीं होने देंगे । आप भी चैन से रहिए, दर -उल -अमन ही रहने दीजिये ।

उम्मीद है आप ने इस नोट को पूरा पढ़ा होगा और ये भी उम्मीद है कि आप bore नहीं हुए होंगे । आप का विचार जरूर रखें, चर्चा करेंगे ।Nipun Rathee via Anand Rajyadhyaksha

Pabitra Dey: This is what was cong's stand on Dr.Kalam in 2012... 

India Honest adds " This is what was cong's stand on Dr.Kalam in 2012. as reflected in sanjay jha's tweet, they (Congis) are secular only for political gain  .                   
Bishal Dev Rishi Comments : अमन का चैन से सीधा वास्ता है !! अमन का तरक़्क़ी से भी सीधा वास्ता है !! और तरक़्क़ी कभी अकेले दम पर नहीं होती !! जिस देश मे दफन होना है !जिस देश के बाशिंदों से व्यापार करना है !!जिस देश की संस्कृति ने तुम्हें अलग पहचान दी है क्या उसको ज़मीन बोस करना नहीं बनता है?? !! मुद्दे बेहद सादा हैं और जवाब भी जटिल नहीं होने चाहिए क्योंकि वो तुम्हें खुद को ही देने हैं ! पढ़ो सोचो और एक नया दौर शुरू करो भाई !!

मित्रो ये होती है इन्सानियत "" जन्म लिया है तो सिर्फ साँसे मत लीजिये,


एक डॉक्टर को जैसे ही एक urgent सर्जरी के बारे में फोन करके बताया गया.वो जितना जल्दी वहाँ आसकते थे आ गए. वो तुरंत हि कपडे बदल कर ऑपरेशन थिएटर की और बढे.डॉक्टर को वहाँ उस लड़के के पिता दिखाई दिए जिसका इलाज होना था.पिता डॉक्टर को देखते ही भड़क उठे,और चिल्लाने लगे.. "आखिर इतनी देर तक कहाँ थे आप?क्या आपको पता नहीं है की मेरे बच्चे की जिंदगी खतरे में है .क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती..आप का कोई कर्तव्य है या नहीं ? ”
डॉक्टर ने हलकी सी मुस्कराहट के साथ कहा- “मुझे माफ़ कीजिये, मैं हॉस्पिटल में नहीं था.मुझे जैसे ही पता लगा,जितनी जल्दी हो सका मैं आ गया..
अब आप शांत हो जाइए, गुस्से से कुछ नहीं होगा” ये सुनकर पिता का गुस्सा और चढ़ गया. भला अपने बेटे की इस नाजुक हालत में वो शांत कैसे रह सकते थे…उन्होंने कहा- “ऐसे समय में दूसरों को संयम रखने का कहना बहुत आसान है.आपको क्या पता की मेरे मन में क्या चल रहा है.. अगर
आपका बेटा इस तरह मर रहा होता तो क्या आप इतनी देर करते..यदि आपका बेटा मर जाएअभी, तो आप शांत रहेगे?कहिये..”
डॉक्टर ने स्थिति को भांपा और कहा- “किसी की मौत और जिंदगी ईश्वर के हाथ में है.हम केवल उसे बचाने का प्रयास कर सकते है.. आप ईश्वर से
प्राथना कीजिये.. और मैं अन्दर जाकर ऑपरेशन करता हूँ…” येकहकर डॉक्टर अंदर चले गए..करीब 3 घंटो तक ऑपरेशन चला..लड़के के पिता भी धीरज के साथ बाहर बैठे रहे..ऑपरेशन के बाद जैसे ही डाक्टर बाहर निकले..वे मुस्कुराते हुए, सीधे पिता के पास गए..और उन्हें कहा- “ईश्वर का बहुत ही आशीर्वाद है.आपका बेटा अब ठीक है.. अब आपको जो भी सवाल पूछना हो पीछे आ रही नर्स से पूछ लीजियेगा..ये कहकर वो जल्दी में चले गए..
उनके बेटे की जान बच गयी इसके लिए वो बहुत खुश तो हुए..पर जैसे ही नर्स उनके पास आई.. वे बोले.. “ये कैसे डॉक्टर है..इन्हें किस बात का गुरुर है.. इनके पास हमारे लिए जरा भी समय नहीं है..”
तब नर्स ने उन्हें बताया..कि ये वही डॉक्टर है जिसके बेटे के साथ आपके बेटे का एक्सीडेँट हो गया था.....उस दुर्घटना में इनके बेटे की मृत्यु हो गयी..
और हमने जब उन्हें फोन किया गया..तो वे उसके क्रियाकर्म कर रहे थे…और सब कुछ जानते हुए भी वो यहाँ आए और आपके बेटे का इलाजकिया...
नर्स की बाते सुनकर बाप की आँखो मेँ खामोस आँसू बहने लगे ।
मित्रो ये होती है इन्सानियत "" जन्म लिया है तो सिर्फ साँसे मत लीजिये,जीने का शौक भी रखिये......Kamal Sahu


                 

माता-पिता को जीते-जी ही सारे सुख देना वास्तविक श्राद्ध है ॥..

एक दोस्त हलवाई की दुकान पर मिल गया ।
मुझसे कहा- ‘आज माँ का श्राद्ध है, माँ को लड्डू बहुत पसन्द है, इसलिए लड्डू लेने आया हूँ '
मैं आश्चर्य में पड़ गया ।अभी पाँच मिनिट पहले तो मैं उसकी माँ से सब्जी मंडी में मिला था ।
मैं कुछ और कहता उससे पहले ही खुद उसकी माँ हाथ में झोला लिए वहाँ आ पहुँची ।
मैंने दोस्त की पीठ पर मारते हुए कहा- 'भले आदमी ये क्या मजाक है ?माँजी तो यह रही तेरे पास !
दोस्त अपनी माँ के दोनों कंधों पर हाथ रखकर हँसकर बोला, ‍'भई, बात यूँ है कि मृत्यु के बाद गाय-कौवे
की थाली में लड्डू रखने से अच्छा है कि माँ की थाली में लड्डू परोसकर उसे जीते-जी तृप्त करूँ ।
मैं मानता हूँ कि जीते जी माता-पिता को हर हाल में खुश रखना ही सच्चा श्राद्ध है ।
आगे उसने कहा, 'माँ को मिठाई,सफेद जामुन, आम आदि पसंद है ।मैं वह सब उन्हें खिलाता हूँ ।
श्रद्धालु मंदिर में जाकर अगरबत्ती जलाते हैं । मैं मंदिर नहीं जाता हूँ, पर माँ के सोने के कमरे में
कछुआ छाप अगरबत्ती लगा देता हूँ ।
सुबह जब माँ गीता पढ़ने बैठती है तो माँ का चश्मा साफ कर के देता हूँ । मुझे लगता है कि
ईश्वर के फोटो व मूर्ति आदि साफ करने से ज्यादा पुण्य माँ का चश्मा साफ करके मिलता है ।
यह बात श्रद्धालुओं को चुभ सकती है पर बात खरी है ।हम बुजुर्गों के मरने के बाद उनका श्राद्ध करते हैं ।
पंडितों को खीर-पुरी खिलाते हैं ।रस्मों के चलते हम यह सब कर लेते है, पर याद रखिए कि गाय-कौए 
को खिलाया ऊपर पहुँचता है या नहीं, यह किसे पता ।
अमेरिका या जापान में भी अभी तक स्वर्ग के लिए कोई टिफिन सेवा शुरू नही हुई है ।
माता-पिता को जीते-जी ही सारे सुख देना वास्तविक श्राद्ध है ॥............CA Naresh Gupta

Are we Communal or Secular or the Real Cheat Sicular ?

Thirteen centuries of Hindustan's association with Muslims have passed but the Muslims have not assimilated with the local Hindus, still many have not stopped terrorising and killing the people of India. How many years does it take to assimilate these savages into a society? 

Does any left winger want to go and give their absurd ‘humanitarian’ lectures to India how to deal with their endless  problems by radicals in Muslim that kill thousands of people every year in riots, attacks, rapes, murders, terrorism, arson, train derailing, bombings. 

India has never invaded or occupied a single Muslim country yet Muslims still can’t stop targeting the nation and its people. On the contrary, Muslims have grabbed over 30% of India’s landmass through violence and demands in less than 100 years alone.

Muslim Worldwide reports on India : Muslims storm and siege police station screaming ‘Allhu-Akhbar’ in 11 hr gun battle in Punjab . 

Why can’t the rest of the world pay heed to this? There is no peaceful future for any country once a Muslim presence is allowed to creep into society. People need to wake up and learn from history.

They need to open the suspected madarsa or even the mosque and ban that filthy plagiarised terror in the name of religion, misconstrued by the fundamentalist illiterate. Instead of focusing to rid themselves of fundamentalist led terror, Indian people were focused on racist rants over events that are fictional to historic facts. In fact,we need to reinvent the biased praise of Muslim rule (of written by Muslim “historians”) while they downgraded the victimised people.

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याकूब मेमन की फांसी पर आज कुछ लोग सवाल उठा रहे है,, ! कुछ कहते है फ़ासी हो और कुछ कहते है की न हो ! हम इसे दो गुटों में बाँट लेते है पहला है (मेमन) दूसरा (सीबीआई) (मेमन) कहता है की उसने इस शर्त पर आत्म समर्पण किया की वो (सीबीआई) को कई महतवपूर्ण गोपनीय जानकारी देगा लेकिन उसे फ़ासी या फिर ये कहे की कुछ नहीं होनी चाहिय े(सीबीआई) ने ये शर्त मानी और उसने आत्मसमर्पण किया लकिन समर्पण के बाद (सीबीआई) ने सारी जानकारी ली और अपने वादे से मुकर गई और इसी तरह जेल में करीब बीस साल बीत गए और आखिर में (मेमन) को दोषी साबित किया गया और फांसी की सजा सुना दी गयी, और इन बातो पर यकीन कर आज देश में कुछ लोग (मेमन) की फ़ासी का विरोध कर रहे है ! !अब मेरे कुछ सवाल ! 



1-क्या आजतक (मेमन) न्यायपालिका को यह साबित कर पाया की उसने आत्मसमर्पण ही किया था? 2- वो 250 से ज्यादा मौतों का जिमेदार हु तो क्या उसे सिर्फ इसीलिए छोड़ देना चाहिये की उसने आपको सारे गोपनीय राज बता दिये? 3-या फिर इसीलिए छोड़ देना चाहिये की वो 20 साल जेल में काट चूका है ? 4-(सीबीआई) ने उस अपराधी को पकड़ना था जो 250 से ज्यादा मौतों का जिमेदार है और उसे पकड़ने के लिये इस तरह की शर्त का लालच देना मुझे कही से भी गलत नहीं लगता? (अगर लालच दिया गया हो) 5-अमेरिका ने तो दुसरे देश में घुस कर मारा (सीबीआई) ने तो सिर्फ झूटी शर्त रखी (अगर शर्त रखी हो) 6-जब उसने यह सब किया तो वह मानवता का दुश्मन था पर आज उसे क्यों धर्म से जोड़ा जा रहा है ? 7 - एक आतंकवादी के लिये सहानुभूति रखना क्या किसी देशवासी को शोभा देता है ? 8 - आज सभी उसके परिवार की दुहाई दे रहे है जो गिनती के 10 भी नहीं होंगे उन 250 से अधिक परिवारों का क्या ? आपका जवाब कुछ भी हो लकिन मेरा मानना है की ऐसे आतंकवादियों को पकड़ने के लिए छल, झूट, कपट, जो भी हथियार हो इस्तेमाल किया जाए और उन्हें किसी भी सूरत में बख्सा न जाये कानून अपना काम पूरी इमानदारी से करे सभी तथ्यों की जाच हो हम यही मांग करते है.............................
सौरभ भारद्वाज

India Honest agrees that when the question is of nation's or its people's safety, security and dignity, we need to join hands with any of the power or the proud and self reliant Israel. We must collaborate on mutual training to fight terror spread by few or many radicals using or misusing the Islam.

We need to be neither secular nor communal or sicular, but we ought to be human , social, strong and patriot to our nation and culture. 

Are we Communal or Secular or the Real Cheat Sicular ? Any answer ?
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                  Nageshwar Singh Baghel : पंजाब के DGP के अनुसार गुरुदास पुर में मारे गए    
                             तीनों आतंकी मुस्लिम थे ।  ‪#‎आतंकवादियों‬ का कोई धर्म नही होता ?



    



"Bharat has lost a ratna" says PM @narendramodi in tribute to a true secular human Dr APJ Abdul Kalam 


          

इस दोगले CIA agent और इसके ford foundation द्वारा funded party के चेले चपाटों ने 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले के mastermind , अफज़ल गुरु को निर्दोष बताकर उस देशद्रोही जिहादी की फांसी माफ़ करने के लिए भी दया याचिका दी थी और आज, यह नौटंकीबाज़ गुरदासपुर पर हुए आतंकी हमले में शहीदों को नमन की नौटंकी कर रहा है, जबकि इसकी अपनी ही पार्टी में तो ऐसे
हमलों और  आतंकियों के मानवाधिकारों का खुलेआम समर्थन करने वाले देशद्रोही #Adarsh_liberals भरे पड़े हैं...Kalki Singh


    

    

Sunil M Gupta :  महामहिम राष्ट्रपती महोदय नीचे बैठे हुए हैं ....कोई भी व्यक्ति जिसे राष्ट्र के प्रति लेश मात्र सामान है वो इस प्रकार राष्ट्रपती जी से ऊँचे आसान पर नहीं बैठ रह सकता!ऊपर कुर्सियों पर बैठे हुए इन दो लोगों को तो आप पहचान ही गए होंगे?

Surender Sarup Gupta कया करें , कुछ लोगों के संस्कार ही एैसे हैं जो भारतीय संस्कृति व किसी भी सभ्यता के विपरीत होते हैं ।ये लोग ना राम के ना रहीम के ना माँ के ना ही वाप के ,ये तो बस उस चचा,--- चचाजात के होते हैं जो इन्हें कभी अपना मानता ही नहीं ।







  





Vivek Shetty  : Look Who is lawyer of Yakub Menon..Prashant Bhushan coming out of 
Chief Justice Of India residence at 10.45 PM where CJI has rejected his plea. These 
bastards are such a shame. Founder of AAP.



Ahmet Mahmut Ünlü

"ISIS Muslim cleric tells Shia: “Allah willing, we shall slaughter you like sheep”

In a sermon delivered in a Fallujah mosque on July 18, 2015, the first day of Eid Al-Fitr, an unnamed ISIS-affiliated cleric stated that the enmity between Sunnis and Shiites is of an ideological nature, and vowed to slaughter Shiites “like sheep” in Baghdad and in the holy Shiite cities of Karbala and Najaf.  ISIS Cleric: You should know, oh servants of Allah, that our enmity with the Rafidites and the Zoroastrian Persians is not of a material or a political nature. It is an ideological enmity that goes back a long time.

डॉक्टर अब्दुल कलाम का राष्ट्रवादी कार्यक्षेत्र एक वैज्ञानिक से राष्ट्रपति तक ।

डॉक्टर अब्दुल कलाम का कार्यक्षेत्र एक वैज्ञानिक से राष्ट्रपति तक, काम के प्रति जबर्दस्त दीवानगी : 1962 में वे 'भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन' में आये। डॉक्टर अब्दुल कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल है। जुलाई 1980 में इन्होंने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था। इस प्रकार भारत भी 'अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब' का सदस्य बन गया। 'इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम' को परवान चढ़ाने का श्रेय भी इन्हें प्रदान किया जाता है। डॉक्टर कलाम ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी (गाइडेड मिसाइल्स) को डिज़ाइन किया। इन्होंने अग्नि एवं पृथ्वी जैसी मिसाइल्स को स्वदेशी तकनीक से बनाया था। 

डॉक्टर कलाम जुलाई 1992 से दिसम्बर 1999 तक रक्षा मंत्री के 'विज्ञान सलाहकार' तथा 'सुरक्षा शोध और विकास विभाग' के सचिव थे। उन्होंने स्ट्रेटेजिक मिसाइल्स सिस्टम का उपयोग आग्नेयास्त्रों के रूप में किया। इसी प्रकार पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर विस्फोट भी परमाणु ऊर्जा के साथ मिलाकर किया। इस तरह भारत ने परमाणु हथियार के निर्माण की क्षमता प्राप्त करने में सफलता अर्जित की। डॉक्टर कलाम ने भारत के विकास स्तर को 2020 तक विज्ञान के क्षेत्र में अत्याधुनिक करने के लिए एक विशिष्ट सोच प्रदान की। यह भारत सरकार के 'मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार' भी रहे।

व्यावसायिक परिचय : डॉ. अब्दुल कलाम जब एच.ए.एल. से एक वैमानिकी इंजीनियर बनकर निकले तो इनके पास नौकरी के दो बड़े अवसर थे। ये दोनों ही उनके बरसों पुराने उड़ान के सपने को पूरा करने वाले थे। एक अवसर भारतीय वायुसेना का था और दूसरा रक्षा मंत्रालय के अधीन तकनीकी विकास एवं उत्पादन निदेशालय, का था। उन्होंने दोनों जगहों पर साक्षात्कार दिया। वे रक्षा मंत्रालय के तकनीकी विकास एवं उत्पादन निदेशालय में चुन लिए गए। सन् 1958 में इन्होंने 250 रूपए के मूल वेतन पर निदेशालय के तकनीकी केंद्र (उड्डयन) में वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायक के पद पर काम संभाल लिया। निदेशालय में नौकरी के पहले साल के दौरान इन्होंने आफिसर-इंचार्ज आर. वरदराजन की मदद से एक अल्ट्रासोनिक लक्ष्यभेदी विमान का डिजाइन तैयार करने में सफलता हासिल कर ली। 

विमानों के रख-रखाव का अनुभव हासिल करने के लिए इन्हें एयरक्रॉफ्ट एण्ड आर्मामेंट टेस्टिंग यूनिट, कानपुर भेजा गया। उस समय वहाँ एम.के.-1 विमान के परीक्षण का काम चल रहा था। इसकी कार्यप्रणालियों के मूल्यांकन को पूरा करने के काम में इन्होंने भी हिस्सा लिया। वापस आने पर इन्हें बंगलौर में स्थापित वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान में भेज दिया गया। यहाँ ग्राउंड इक्विपमेंट मशीन के रूप में स्वदेशी होवरक्रॉफ्ट का डिजाइन तथा विकास करने के लिए एक टीम बनाई गई। वैज्ञानिक सहायक के स्तर पर इसमें चार लोग शामिल थे, जिसका नेतृत्व करने का कार्यभार निदेशक डॉ. ओ. पी. मेदीरत्ता ने डॉ. कलाम पर सौंपा। उड़ान में इंजीनियरिंग मॉडल शुरू करने के लिए इन्हें तीन साल का वक्त दिया गया। भगवान् शिव के वाहन के प्रतीक रूप में इस होवरक्राफ्ट को 'नंदी' नाम दिया गया।

रॉकेट इंजीनियर के पद पर : कालान्तर में डॉ. अब्दुल कलाम को इंडियन कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च की ओर से साक्षात्कार के लिए बुलावा आया। उनका साक्षात्कार अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई ने खुद लिया। इस साक्षात्कार के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति में रॉकेट इंजीनियर के पद पर उन्हें चुन लिया गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति में इनका काम टाटा इंस्टीट्यूट आफ फण्डामेंटल रिसर्च के कंप्यूटर केंद्र में काम शुरू किया।

 सन् 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति ने केरल में त्रिवेंद्रम के पास थुंबा नामक स्थान पर रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र स्थापित करने का फैसला किया। थुंबा को इस केंद्र के लिए सबसे उपयुक्त स्थान के रूप में चुना गया था, क्योंकि यह स्थान पृथ्वी के चुंबकीय अक्ष के सबसे क़रीब था। उसके बाद शीघ्र ही डॉ. कलाम को रॉकेट प्रक्षेपण से जुड़ी तकनीकी बातों का प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए अमेरिका में नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन यानी 'नासा' भेजा गया। यह प्रशिक्षण छह महीने का था। जैसे ही डॉ. अब्दुल कलाम नासा से लौटे, 21 नवंबर, 1963 को भारत का 'नाइक-अपाचे' नाम का पहला रॉकेट छोड़ा गया। यह साउंडिंग रॉकेट नासा में ही बना था। डॉ. साराभाई ने राटो परियोजना के लिए डॉ. कलाम को प्रोजेक्ट लीडर नियुक्त किया।

इस परियोजना के प्रथम चरण में एक नीची ऊँचाई पर तुरंत मार करने वाली टैक्टिकल कोर वेहिकल मिसाइल और जमीन से जमीन पर मध्यम दूरी तक मार सकने वाली मिसाइल के विकास एवं उत्पादन पर जोर था। दूसरे चरण में जमीन से हवा में मार सकने वाली मिसाइल, तीसरी पीढ़ी की टैंकभेदी गाइडेड मिसाइल और डॉ. अब्दुल कलाम के सपने रि-एंट्री एक्सपेरिमेंट लान्च वेहिकल (रेक्स) का प्रस्ताव रखा गया था। 

जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली को 'पृथ्वी' और टैक्टिकल कोर वेहिकल मिसाइल को 'त्रिशूल' नाम दिया गया। जमीन से हवा में मार करने वाली रक्षा प्रणाली को 'आकाश' और टैंकरोधी मिसाइल परियोजना को 'नाग' नाम दिया गया। डॉ. अब्दुल कलाम ने अपने मन में सँजोए रेक्स के बहुप्रतीक्षित सपने को 'अग्नि' नाम दिया। 27 जुलाई, 1983 को आई.जी.एम.डी.पी. की औपचारिक रूप से शुरूआत की गई। मिसाइल कार्यक्रम के अंतर्गत पहली मिसाइल का प्रक्षेपण 16 सितंबर, 1985 को किया गया। इस दिन श्रीहरिकोटा स्थित परीक्षण रेंज से 'त्रिशूल' को छोड़ा गया। यह एक तेज प्रतिक्रिया प्रणाली है जिसे नीची उड़ान भरने वाले विमानों, हेलीकॉप्टरों तथा विमानभेदी मिसाइलों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया जा सकता है।

 25 फरवरी, 1988 को दिन में 11बजकर 23 मिनट पर 'पृथ्वी' को छोड़ा गया। यह देश में रॉकेट विज्ञान के इतिहास में एक युगांतरकारी घटना थी। यह 150 किलोमीटर तक 1000 किलोग्राम पारंपरिक विस्फोटक सामग्री ले जाने की क्षमता वाली जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है। 22 मई, 1989 को 'अग्नि' का प्रक्षेपण किया गया। यह लंबी दूरी के फ्लाइट वेहिकल के लिए एक तकनीकी प्रदर्शक था। साथ ही 'आकाश' पचास किलोमीटर की अधिकतम अंतर्रोधी रेंजवाली मध्यम की वायु-रक्षा प्रणाली है। उसी प्रकार 'नाग' टैंक भेदी मिसाइल है, जिसमें 'दागो और भूल जाओ' तथा ऊपर से आक्रमण करने की क्षमताएँ हैं। 

डॉ. अब्दुल कलाम की पहल पर भारत द्वारा एक रूसी कंपनी के सहयोग से सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने पर काम शुरू किया गया। फरवरी 1998 में भारत और रूस के बीच समझौते के अनुसार भारत में ब्रह्मोस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई। 'ब्रह्मोस' एक सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है जो धरती, समुद्र, तथा हवा, कहीं भी दागी जा सकती है। यह पूरी दुनिया में अपने तरह की एक ख़ास मिसाइल है जिसमें अनेक खूबियां हैं। वर्ष 1990 के गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्र ने अपने मिसाइल कार्यक्रम की सफलता पर खुशी मनाई। डॉ. अब्दुल कलाम और डॉ. अरूणाचलम को भारत सरकार द्वारा 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया।

पुस्तकें * 'विंग्स ऑफ़ फायर' अब्दुल कलाम की आत्मकथा * डॉक्टर कलाम ने साहित्यिक रूप से भी अपने शोध को चार उत्कृष्ट पुस्तकों में समाहित किया है, जो इस प्रकार हैं- * 'विंग्स ऑफ़ फायर' * 'इण्डिया 2020- ए विज़न फ़ॉर द न्यू मिलेनियम' * 'माई जर्नी' * 'इग्नाटिड माइंड्स- अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया'। * महाशक्ति भारत * हमारे पथ प्रदर्शक * हम होंगे कामयाब * अदम्य साहस * छुआ आसमान * भारत की आवाज़ * टर्निंग प्वॉइंट्स !

इन पुस्तकों का कई भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। इन्होंने अपनी जीवनी 'विंग्स ऑफ़ फायर' भारतीय युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान करने वाले अंदाज़ में लिखी है। इनकी दूसरी पुस्तक 'गाइडिंग सोल्स- डायलॉग्स ऑफ़ द पर्पज़ ऑफ़ लाइफ' आत्मिक विचारों को उद्घाटित करती है इन्होंने तमिल भाषा में कविताऐं भी लिखी हैं। दक्षिणी कोरिया में इनकी पुस्तकों की काफ़ी माँग है और वहाँ इन्हें बहुत अधिक पसंद किया जाता है।

राजनीतिक जीवन : डॉक्टर अब्दुल कलाम राजनीतिक क्षेत्र के व्यक्ति नहीं हैं लेकिन राष्ट्रवादी सोच और राष्ट्रपति बनने के बाद भारत की कल्याण संबंधी नीतियों के कारण इन्हें कुछ हद तक राजनीतिक दृष्टि से सम्पन्न माना जा सकता है। इन्होंने अपनी पुस्तक 'इण्डिया 2020' में अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया है। यह भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर राष्ट्र बनते देखना चाहते हैं और इसके लिए इनके पास एक कार्य योजना भी है। परमाणु हथियारों के क्षेत्र में यह भारत को सुपर पॉवर बनाने की बात सोचते रहे हैं। वह विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में भी तकनीकी विकास चाहते हैं। 

डॉक्टर कलाम का कहना है कि 'सॉफ़्टवेयर' का क्षेत्र सभी वर्जनाओं से मुक्त होना चाहिए ताकि अधिकाधिक लोग इसकी उपयोगिता से लाभांवित हो सकें। ऐसे में सूचना तकनीक का तीव्र गति से विकास हो सकेगा। वैसे इनके विचार शांति और हथियारों को लेकर विवादास्पद हैं। इस संबंध में इन्होंने कहा है- "2000 वर्षों के इतिहास में भारत पर 600 वर्षों तक अन्य लोगों ने शासन किया है। यदि आप विकास चाहते हैं तो देश में शांति की स्थिति होना आवश्यक है और शांति की स्थापना शक्ति से होती है। इसी कारण मिसाइलों को विकसित किया गया ताकि देश शक्ति सम्पन्न हो।

               

राष्ट्रपति पद पर : डॉक्टर अब्दुल कलाम भारत के ग्यारवें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। इन्हें भारतीय जनता पार्टी समर्थित एन.डी.ए. घटक दलों ने अपना उम्मीदवार बनाया था जिसका वामदलों के अलावा समस्त दलों ने समर्थन किया। 18 जुलाई, 2002 को डॉक्टर कलाम को नब्बे प्रतिशत बहुमत द्वारा 'भारत का राष्ट्रपति' चुना गया था और इन्हें 25 जुलाई 2002 को संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई। इस संक्षिप्त समारोह में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, उनके मंत्रिमंडल के सदस्य तथा अधिकारीगण उपस्थित थे। इनका कार्यकाल 25 जुलाई 2007 को समाप्त हुआ। इनके नाम के प्रति सहमति न हो पाने के कारण यह दोबारा राष्ट्रपति नहीं बनाए जा सके।

व्यक्तित्व एवं कृतित्व : इतने महत्तवपूर्ण व्यक्ति के बारे में कुछ भी कहना सरल नहीं है। वेशभूषा, बोलचाल के लहजे, अच्छे-खासे सरकारी आवास को छोड़कर हॉस्टल का सादगीपूर्ण जीवन, ये बातें उनके संपर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर एक सम्मोहक प्रभाव छोड़ती हैं। डॉ. कलाम एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, देश के विकास और युवा मस्तिष्कों को प्रज्ज्वलित करने में अपनी तल्लीनता के साथ साथ वे पर्यावरण की चिंता भी खूब करते हैं, साहित्य में रूचि रखते हैं, कविता लिखते हैं, वीणा बजाते हैं, तथा अध्यात्म से बहुत गहरे जुड़े हुए हैं।

 डॉ. कलाम में अपने काम के प्रति जबर्दस्त दीवानगी है। उनके लिए कोई भी समय काम का समय होता है। वह अपना अधिकांश समय कार्यालय में बिताते हैं। देर शाम तक विभिन्न कार्यक्रमों में डॉ. कलाम की सक्रियता तथा स्फूर्ति काबिलेतारीफ है। ऊर्जा का ऐसा प्रवाह केवल गहरी प्रतिबद्धता तथा समर्पण से ही आ सकता है। डॉ. कलाम खानपान में पूर्णत: शाकाहारी व्यक्ति हैं। वे मदिरापान से बिलकुल परहेज करते हैं। उनका निजी जीवन अनुकरणीय है। डॉ. कलाम की याददाश्त बहुत तेज है। वे घटनाओं तथा बातों को याद रखते हैं।

डॉ. कलाम बातचीत में बड़े विनोदप्रिय स्वभाव के हैं। अपनी बात को बड़ी सरलता तथा साफगोई से सामने रखते हैं। प्राय: उनकी बातों में हास्य का पुट होता है। लेकिन बात बहुत सटीक तौर पर करते हैं। डॉ. कलाम सभी मुद्दों को मानवीयता की कसौटी पर परखते हैं। उनके लिए जाति, धर्म, वर्ग, समुदाय मायने नहीं रखते। वे सर्वधर्म समभाव के प्रतीक हैं।
वह इंसान के जीवन को ऊंचा उठाना चाहते हैं। उसे बेहतरी की ओर ले जाना चाहते हैं। उनका मानवतावाद मनुष्यों की समानता के आधारभूत सिद्धांत पर आधारित है।

25 जुलाई, 2002 की शाम को भारत के राष्ट्रपति का सर्वोच्च पद सँभालने के दिन घटित एक बात से इसे अच्छी तरह समझा जा सकता है। उस दिन राष्ट्रपति भवन में एक प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी जिसमें रामेश्वरम् मसजिद के मौलवी, रामेश्वरम् मंदिर के पुजारी, सेंट जोसेफ कॉलेज के फॉदर रेक्टर तथा अन्य लोगों ने भाग लिया था। उनके बारे में जो पहलू सबसे कम प्रचारित है वह है उनकी उदारता या परोपकार की भावना।

समाज सेवा : उनके द्वारा लिखी गयी पुस्तकें बहुत लोकप्रिय रही हैं। वे अपनी किताबों की रॉयल्टी का अधिकांश हिस्सा स्वयंसेवी संस्थाओं को मदद में दे देते हैं। मदर टेरेसा द्वारा स्थापित 'सिस्टर्स ऑफ़ चैरिटी' उनमें से एक है। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले हैं। इनमें से कुछ पुरस्कारों के साथ नकद राशियां भी थीं। वह इन पुरस्कार राशियों को परोपकार के कार्यों के लिए अलग रखते हैं। 



जब-जब देश में प्राकृतिक आपदाएँ आई हैं, तब-तब डॉ. कलाम की मानवीयता एवं करुणा निखरकर सामने आई है। वह अन्य मनुष्यों के कष्ट तथा पीड़ा के विचार मात्र से दुःखी हो जाते हैं। वह प्रभावित लोगों को राहत पहुचाँने के लिए डी.आर.डी.ओ. के नियंत्रण में मौजूद सभी संसाधनों को एकत्रित करते। जब वे रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन में कार्यरत थे तो उन्होंने हर राष्ट्रीय आपदा में विभाग की ओर से बढ़ चढ़कर राहत कोष में मदद की।

सम्मान और पुरस्कार :डॉ. कलाम को अनेक सम्मान और पुरस्कार मिले हैं जिनमें शामिल हैं- * इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंजीनियर्स का नेशनल डिजाइन अवार्ड * एरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया का डॉ. बिरेन रॉय स्पेस अवार्ड * एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया का आर्यभट्ट पुरस्कार *विज्ञान के लिए जी.एम. मोदी पुरस्कार * राष्ट्रीय एकता के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार। ये भारत के एक विशिष्ट वैज्ञानिक हैं, जिन्हें 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त हो चुकी है।इन्हें भारत के नागरिक सम्मान के रूप में 1981 में पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण, 1997 में भारत रत्न सम्मान प्राप्त हो चुके है।


    
( People's President    ......Koti Koti Naman )
विशेषता : डॉक्टर अब्दुल कलाम ऐसे तीसरे राष्ट्रपति हैं जिन्हें भारत रत्न का सम्मान राष्ट्रपति बनने से पूर्व ही प्राप्त हुआ है, अन्य दो राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन और डॉक्टर ज़ाकिर हुसैन हैं।यह प्रथम वैज्ञानिक हैं जो राष्ट्रपति बने हैं और प्रथम राष्ट्रपति भी हैं जो अविवाहित हैं।  27 जुलाई 2015 को उनका निधन हुआ !