उत्तराखंड की त्रासदी नेपाल की त्रासदी से ज़्यादा भयावह, ज्यादा विकराल थी .....अपने देश में घटी .......हमारे अपने लोग मरे थे ....... पूरे के पूरे नगर के नगर और तमाम कस्बे बह गए .......6000 से ज़्यादा लोग मरे थे ......त्रासदी के एक हफ्ते बाद दिल्ली से 4 ट्रक राहत सामग्री से भरे सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा औपचारिक रूप से झंडी दिखा कर विदा किये जाने के इंतजार में दिल्ली में खड़े थे । राजमाता का समय नहीं मिल पा रहा था । उनका मिला तो युवराज का न मिला । तीसरे दिन दोनों मिले तो दोनों ने कांग्रेस का झंडा दिखा लहराते हुए विदा किया ।
दिल्ली से चले पर देहरादून नहीं पहुंचे । कहाँ गए भैया ? दिल्ली में कांग्रेस के प्रवक्ता बोले , हमको नहीं पता ......अच्छा रुको पता लगा कर बताते हैं ....ढूंढ मची .......पता चला हरिद्वार से पहले रास्ते में कहीं खड़े हैं .......चारों ट्रक ......3 दिन से ......सड़क किनारे ? क्या हुआ भैया ? काहे खड़े हो ? जी बाबू जी .......डीज़ल खत्म हो गया ......बात मीडिया में उछली ........ बड़ी किरकिरी हुई ......उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार थी ....... किसी तरह डीज़ल की व्यवस्था हुई तो राहत सामग्री देहरादून पहुंची । आपदा केदारनाथ में आयी थी । राहत सामग्री वहाँ तक पहुंचाने के लिए रास्ते नहीं थे । वायुसेना के हेलीकाप्टर राहत कार्य में लगे थे । देश भर से आ रही राहत सामग्री देहरादून में डंप हो रही थी जबकि पीड़ित ऊपर फंसे थे ..
अब जरा सकारात्मक बदलाव देखिए कि नेपाल, बिहार, यूपी में भूकंप आया तो प्रधानमंत्री मोदी 10 मिनट बाद फोन घनघना रहे थे नेपाल के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, बिहार के मुख्यमंत्री नितीश बाबू और यूपी के मुखिया अखिलेश यादव को ।
महज एक घंटे बाद गाज़ियाबाद के हिंडन एयरबेस पर जहाज में राहत सामग्री लादी जा रही थी ।
4 घंटे बाद NDRF की चार टीमों के साथ 20 टन दवाएं, चलते फिरते अस्पताल और डाक्टर्स को ले कर जहाज उड़ गया । ठीक 6 घंटे बाद उन्होंने काठमांडू में बचाव कार्य शुरू कर दिया था .....मनमोहन सिंह और राहुल गांधी का तो पता नहीं .
Sanjay Dwivedy ......पर मोदी का सीना क्या 56 इंच का वाकई नहीं है....?