Brave leadership of Modi walked the talk, hit back within 72 hours
INDIA GOES AFTER THE KILLERS: Following a nod from Prime Minister Modi, Indian Army's elite para commandos have carried out a surgical strike in a hot pursuit across the Myanmar border killing two groups of millitants across the contiguous border along Nagaland and Manipur. Acting on an specific intelligence, New Delhi gave Indian Armed forces a go ahead to conduct the cross border operation.In a operation that started this morning, MI 17 helicopters of Indian Air Force were used to drop commandos of 21 Para, who in a six hour operation wiped out close to 50 millitants of KYKL faction of Meitei group and Khaplang faction of NSCN who were operating from Myanmar. Indian Army confirmed that all the terror camps were destroyed and commandos were safely extricated back to the Indian side. This is the first time in the recent past that Indian Army has crossed an international border on a shoot to kill mission. More news is awaited................................................Suresh Kochattil
मणिपुर हमला: भारत मां के बेटों के शव देख रो पड़ी भीड़
शहीदों को अंतिम सलामी देते हुए सेना के जवान।शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए सेना के जवान।
मणिपुर में वीरवार को आतंकी हमले में शहीद हुए जम्मू के छह जवानों का सैनिक सम्मान के साथ रविवार को अंतिम संस्कार किया गया। एयरफोर्स के विशेष विमान से छह शहीदों के शव जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे। इनमें नायब सूबेदार राम सिंह (सवांखा मोड़, विजयपुर), हवलदार सतपाल भसीन (मुट्ठी, जम्मू), हवलदार रणदीप सिंह (बोमल, अखनूर), लांस नायक कुलदीप राज (बर्न, जम्मू) सिपाही विजय कुमार (सेरह, अखनूर) और हवलदार सुनील कुमार (सुंदरबनी) शामिल हैं। इसके अलावा पठनकोट के शहीद सिपाही मंजीत सिंह का शव भी यहां पहुंचा।
INDIA HONEST and the whole nation is worried, how long we will continue in this way?When the internal enemies and their supporters in hiding, have become more powerful than the external enemies, be it Kashmiri separatists or Maowadi or supporters of Ford foundation/ Greenpeace sponsored terrorist, the nation and people have to pay the price with their lives. Nation needs to stop it , and stop it before coffins are lifted to the houses of brave fighters of the nation.
पर्वोत्तर राज्यो के आतंकी संगठनो को जम कर जुलाब लग गई है . . . मणिपुर (चन्देल) म्यांमार स़ीमा पर करीब 50 उग्रवादियों ने सेना की गाडियो पर घात लगा कर नपूंस्कता से हमला किया था1 जिसमे 20 सैनिक शहीद हो गए थे . . . तब से मोदी सरकार द्वारा आदेश और खुली छुट से सेना ने उग्रवादियों पर कहर ढाना शुरू कर दिया है!मोदी सरकार ने आपात बैठक बुला कर "Search & kill"कार्यवाही के आदेश दे दिए हैँ ! जिस पर सेना ने "Search & kill " अभियान चलाया हुआ है 1साथ ही भूटान सरकार ने भी इस विषय पर अपनी स्वीकृति दे दी है 1.म्यांमार सरकार से बात हो रही है व् सभी सीमाएं बन्द कर दी गयी हैँ !30 साल बाद सेना द्वारा पूर्वोत्तर राज्यो में आतंकियो के खिलाफ इतना बड़ा अभियान चलाया जा रहा है!आतंकियो की लोकेशन अरुणाचल प्रदेश ,भूटान के जंगलो में उनके शिवर कैंप लोकेट कर लिए गए है ! search & kill अभियान में असम राइफल्स के 11000 हजार सैनिक व् हेलीकाप्टर इस कायवाही में लगे हुए है ! इनका एक ही मिशन और आदेश है " ढूंढो और मारो" और सेना ने देशवासियो को ये सन्देश भी दिया है की " जल्द परिणाम देंगे ! मोदी सरकार से प्राथना है एक ऐसा ही अभियान कश्मीर में भी चलाया जाये" !वैसे लगता है वो दिन दूर नही जब देश से आतंक वाद का सफाया हो जायेगा !...............Vijay Kumar Jagota
दोमाना। मणिपुर की मोलतुक घाटी में 4 जून को आतंकियों ने सेना के काफिले पर हमला कर 18 जवानाें को शहीद कर दिया था। इनमें जम्मू-कश्मीर राज्य के छह जवान भी शहीद हुए थे। ब्लाक भलवाल की पंचायत बरन के लांस नायक कुलदीप राज और मुट्ठी के हवलदार सतपाल भसीन शहीद हुए हैं। रविवार को दोनों के शवों का सैन्य समान के साथ अंतिम संस्कार सैन्य सम्मान के साथ किया गया। शहीद कुलदीप को सिंबलवाला श्मशानघाट पर उनके बड़े भाई के बेटे राजकुमार ने मुखाग्नि दी।
सुबह आठ बजे शहीद कुलदीप राज का शव जैसे ही उनके घर बरन में पहुंचा तो सभी ओर लोगों का तांता लगा हुआ था। सारा गांव शहीद के घर पहुंच परिवार के दुख में शरीक हो गया। शहीद की मां शांति देवी बेटे के शव को देख बिल्कुल टूट चुकी थी। हालांकि उसे अन्य महिलाएं ढांढस बंधाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वह रह-रह कर शहीद कुलदीप से उसे भी साथ ले जाने की मांग कर रही थी।
पत्नी गायत्री देवी का तो मानो सब कुछ लुट गया। वह बदहवास कभी कुलदीप के शव और कभी अढ़ाई वर्षीय बेटी शगुन को देखती। शगुन ने तो अभी पापा कहना और पहचानना ही सीखा था। बहनों का भी रो-रो कर बुरा हाल था। श्रद्धांजलि देने वालों में सांसद जुगल किशोर शर्मा, वन और पर्यावरण मंत्री बाली भगत, 19 ब्रिगेड के ब्रिगेडियर प्रबीर पारिख, डीआईजी जम्मू अशकूर वानी, एसडीएम नार्थ डा. पियूष सिंगला के अलावा विभिन्न सामाजिक और सियासी पार्टियों से जुडे़ लोग शामिल थे।
अखनूर। शहीद रणदीप सिंह का सैन्य सम्मान के साथ भोमाल गांव में अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले सुबह के समय जब हवलदार रणदीप सिंह का शव सेना के वाहन से पहुंचा, तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई। हर आंख जांबाज सपूत की शहादत पर नम थी। मां राज कुमारी, पत्नी रानी देवी के अलावा बेटी प्रियंका और जाह्नवी का रो रोकर बुरा हाल था। नहर के पास करीब साढ़े दस बजे सैन्य सम्मान के साथ शहीद हवलदार रणदीप सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। भतीजा गौरव सिंह ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर मेजर जनरल कुलप्रीत सिंह, विधायक राजीव शर्मा, राज्य मंत्री दलजीत सिंह, एसडीएम सुरेश चंद सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता मौजूद रहे। शहीद के बड़े भाई बलवीर सिंह ने बताया कि रणदीप छह जून को छुट्टी लेकर घर आने वाले थे। नए घर में शिफ्ट होने की योजना थी।
ज्यौड़ियां। पंचायत सेड़ के गांव चमारकी निवासी शहीद विजय कुमार शर्मा उर्फ विक्की का शव रविवार सुबह नौ बजे के करीब पहुंचा। जैसे ही सेना के जवानों ने विजय का शव वाहन से उतार कर घर की ओर चले, तो परिवार के सदस्यों में चीख-पुकार मच गई। बेटे का शव देख पिता दीवान चंद का बुरा हाल था। मां भी बेसुध हालत में थीं। बार-बार बेहोश हो रही थीं। होश आते ही विजय-विजय पुकारने लगतीं। वह कहतीं, बेटा उठ। मै तेरे बिना कैसे जी पाउंगी। विजय की पत्नी सोनाली शर्मा भी रोये जा रही थीं। वह कहतीं, मम्मी उनके साथ ऐसा नहीं हो सकता। यह दृश्य देख सभी की आंखें नम हो गईं। कोई कुछ कहने की स्थिति में नहीं था। बस एक-दूसरे को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे। शहीद विजय शर्मा का अंतिम संस्कार सेड़ के शमशानघाट पर सैन्य सम्मान के साथ किया गया। इस मौके पर जीओसी आरएस बहादुरिया सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सेना के ग्रेनेडियर शाखा के लेेफ्टिनेंट कर्नल संजय बारिया, नागा शाखा के लेफ्टिनेंट कर्नल कुलकर्णी, विजय की यूनिट के लेफ्टिनेंट कर्नल संजीव डडवाल और जैकलाई की 11वीं शाखा के सूबेदार मनमोहन सिंह सहित अन्य अधिकारी और जवानों ने श्रद्धांजलि दी। शहीद विजय को मुखाग्नि उनके भतीजे ने दी। जानकारी के अनुसार वीरवार को जब हमला हुआ, तो विजय शर्मा ने उक्त वाहन से बाहर निकल मुकाबला करने के लिए आड़ लेने वाले थे कि दुश्मन की गोली उनकी पीठ में लगी। विजय यूनिट के होनहार जवानों में से थे। उन्होंने खेल के कई मुकाबलों में भी बाजी मारी। विजय को सेना में भर्ती हुए अभी दस साल भी नहीं हुए थे। उन्होंने वर्ष 2006 में सेना में भर्ती हुए थे। खड़ाह हाई स्कूल से दसवीं पास करने के बाद वह सेना में भर्ती हुए। उनकी यह इच्छा बहुत पहले से थी। दौड़ में कई ईनाम भी जीत चुके हैं।
मणिपुर हमला: भारत मां के बेटों के शव देख रो पड़ी भीड़
मणिपुर हमला: भारत मां के बेटों के शव देख रो पड़ी भीड़
दोमाना। मुट्ठी स्थित शमशान घाट पर मनिपुर की मोलतुक घाटी में आतंकी हमले में शहीद हुए 6 डोगरा रजिमेंट के हवलदार सतपाल भसीन का अंतिम संस्कार सैन्य समान के साथ कर दिया गया। इस मौके पर शहीद के नौ वर्षीय बेटे आयूष (वंश) जिसने अभी पिता की अंगुली पकड़ बहुत कुछ सीखना था ने मुखाग्नि दी। हजारों की संख्या में लोग शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। इस मौके पर राज्य के उप मुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह, सांसद जुगल किशोर शर्मा, वन मंत्री बाली भगत, विधायक सत शर्मा (सीए) शिक्षा राज्य मंत्री प्रिया सेठी, भाजपा नेता युद्धवीर सेठी, आईजी जम्मू दानिश राणा, जिला आयुक्त जम्मू सिमरन जीत सिंह, 19 ब्रिगेड़ के कमांडर ब्रिगेडियर परबीर पारिक के अलावा सेना और सिविल सोसाइटी के लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी। मुट्ठी बाजार सैनिक के सम्मान में बंद रहा।
शहीद सतपाल के मासूम बेटे ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया।
शहीद सतपाल का शव देखकर रोते बिलखते हुए उनके पिता।
शहीद रणदीप के शव को देखकर बच्चों का कलेजा भी फट पड़ा।
शहीद रणदीप के शव को देखकर विलाप करते परिजन।
शहीद रणदीप के शव को अंतिम क्रिया के लिए ले जाते लोग।
शहीद सतपाल को श्रद्धांजलि देते उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह।
शहीद कुलदीप राज को श्रद्धांजलि देते भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जुगल किशोर।
शहीद कुलदीप राज को श्रद्धांजलि देते मंत्री बाली भगत।
सेना की गाड़ियां तिरंगे में लिपटे शहीद के शव को लेकर सुबह आठ बजे के करीब मुट्ठी पहुंची। सभी ने नम आंखों से शहीद के अंतिम दर्शन किए। पिता बिशन दास के अलावा भाई कुलदीप और सुरेश का बुरा हाल था। दिल के मरीज पिता बिशन दास को संभालना मुश्किल हो रहा था। शहीद की पत्नी रीता का तो मानो सब कुछ लुट गया था। चौथी कक्षा में पढ़ने वाला बेटा आयुष घर में आए इतने सारे लोगों को देख सहम गया था। शहीद हवलदार सतपाल के पिता पूर्व नायब सूबेदार बिशन दास का कहना था कि उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है। उसने देश के लिए अपनी कुर्बानी देकर न सिर्फ उनका नाम रोशन कर दिया बल्कि अन्य के लिए भी मिसाल बन गया है। उन्होंने बताया कि सतपाल का बेटा, जो कि चौथी कक्षा का छात्र है, पढ़-लिख कर फौज में जाएगा और देश सेवा में योगदान देगा। यही शहीद को श्रद्धांजलि होगी।
