भारत में Center for Peace and Spirituality के संस्थापक और इस्लामी विद्वान मौलाना वहीदुद्दीन खान भारत में मुसलमानो को और क्या अधिकार चाहिए ?"
" मुसलमानो को भारत में जो कुछ मिला है वह सनातन धर्मियों और गैर मुसलमानो की मेहरबानी है और उन्हें इस देश में जो कुछ मिला है उसका उन्हें अधिकार ही नही था। इसलिए उन्हें ज्यादा उम्मीद नही करनी चाहिए कि किसका कितना हिस्सा ?
1947 के विभाजन की दलील ही ये थी कि पाकिस्तान मुस्लिम का और भारत सनातन धर्मियों का और गैर मुसलमानो का। तो फिर इस देश में मुसलमानो को और क्या चाहिए ?"

इस्लामी विद्वान मौलाना वहीदुद्दीन खान ये भी कहते हैं कि " स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान मुसलमानो ने जो बलिदान योगदान दिए, उनके बदले उन्हें पाकिस्तान के रूप में एक अलग देश मिल गया और इस तरह उन्होंने अपनी कुर्बानियों को भुना लिया। भारत विभाजन की दलील ही ये थी कि भारत आर्य सनातनी धर्मियों का और गैर मुसलमानो का और पाकिस्तान मुसलमानो का, तो फिर अब भारत में उनका अधिकार कैसा ? इसके उलटे सनातन धर्मियों ने बड़ी बात की है कि आज़ाद भारत में भी मुसलमानो को बराबर का दर्जा दे दिया।

इस्लामी विद्वान मौलाना वहीदुद्दीन खान ये भी कहते हैं कि " स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान मुसलमानो ने जो बलिदान योगदान दिए, उनके बदले उन्हें पाकिस्तान के रूप में एक अलग देश मिल गया और इस तरह उन्होंने अपनी कुर्बानियों को भुना लिया। भारत विभाजन की दलील ही ये थी कि भारत आर्य सनातनी धर्मियों का और गैर मुसलमानो का और पाकिस्तान मुसलमानो का, तो फिर अब भारत में उनका अधिकार कैसा ? इसके उलटे सनातन धर्मियों ने बड़ी बात की है कि आज़ाद भारत में भी मुसलमानो को बराबर का दर्जा दे दिया।
`````````राजेश पंत कहते हैं कि किसी के पास इसका जवाब नही मिलेगा। ओवेसी और उनके जैसे अनेक मुस्लिम आज भी यही दलील देते हैं कि इस देश के लिए मुसलमान ने भी आज़ादी की लड़ाई लड़ी है, अपना खून बहाया है। जैसे खुद अंग्रेजों के गुलाम नही थे मुसलमान। आखिर एहसान किया इस देश पर क्या, तो इसके लिए क्या 10 पाकिस्तान चाहिए। वहीदुद्दीन खान ने जो कहा वो एकदम सत्य कहा है।
