मुनव्वर कहते है कि दिल्ली का दरवाजा रायबरेली की नालियो से खुलता है पर तुम तब कहाँ थे जब गोधरा में हिंदुओं को ज़िंदा जलाया गया।

साहित्यकार मुनव्वर राणा द्वारा सोनिया गांधी की प्रसंशा में लिखी कविता, ध्यान रहे कि मुनव्वर राणा ने भी साहित्य पुरस्कार वापस किये हैं l........... रायबरेली की नालियो से होकर दिल्ली की राजनीती का दरवाजा खुलता है ---: मुनव्वर राणा .......मतलब इंदिरा जी,सोनिया गांधी,,राहुल गांधी नाली के कीड़े है ?

Kuldeep Mehta वो कह रहे हैं की देश में धार्मिक असहिष्णुता बढ़ रही है इसलिए वो अपने पुरस्कार लौटा रहे हैं।ऐ नेहरू परिवार के दरबारी लेखकों मेरे सवालों का जवाब दो-

🌑तुम तब कहाँ थे जब घाटी में कश्मीरी पंडितों के खून की नदियां बही थीं।
🌑तुम तब कहाँ थे जब केरल में जबरन धर्मान्तरण की वजह से हिन्दू अल्पसंख्यक हो गए।
🌑 तुम तब कहाँ थे जब 84 में दिल्ली की सड़कों पर सिक्खों की खून की नदियां बह रही थीं।
🌑तुम तब कहाँ थे जब असम में हिंदुओं को जलाया जा रहा था।

🌑तुम तब कहाँ थे जब भागलपुर में हिन्दू की एक लड़की के साथ बीस बीस मुल्लों ने बलत्कार किया।

🌑तुम तब कहाँ थे जब गोधरा में हिंदुओं को ज़िंदा जलाया गया।

🌑तुम तब कहाँ थे जब आपतकाल लगाकर देश के लोकतंत्र का गला घोटा गया।

तुम यहीं थे और सबकुछ देख भी रहे थे।लेकिन उस समय टीके पर टोपी भारी था इसलिए तुम चुप थे।

23 जनवरी नज़दीक है।देश का इतिहास एकबार फिर लिखा जायेगा। 

तुमने नेहरू परिवार की विरुदावलियाँ गाकर नेताजी के सम्मान को दफ़न करने की जो काली कोशिश की, सबके सामने आएगा।इतिहास फिर से लिखा जायेगा और उसमे तुम्हारी काली भूमिका भी।



हे मुनब्बर, लगे हाथ "राणा" भी लौटा दो..! ये हमारे पूर्वजों का सम्मान है। तुम इस लायक नहीं हो

Shalendra Singh's photo.


Shalendra Singh's photo.


.. Rishi A. Mahere : 



हे मुनब्बर, लगे हाथ "राणा" भी लौटा 

दो..! ये हमारे पूर्वजों का सम्मान है। तुम इस लायक नहीं हो


Pankaj Kumar Saini सिख दंगो में चुप रहकर आप समझदार बन गए ।दादरी पे लौटा के पुरस्कार " राणा " ख़ुद्दार बन गए ।।युद्ध भूमि में सर्वस्व न्यौछावर करना और लाखों औरतों के ज़ौहर पहचान हैं इस नाम की..अगर लौटा सको तो मुनव्वर साहब तो नाम के पीछे लगा राणा लौटा दो..