भाजपा से निष्काषित नेता दयाशंकर सिंघ की 12 साल की बिटिया अपनी माँ से रोते रोते पूछती
.....Ambikesh Dutt Dubey
मेरा एक सलाम=> #दलित_एकता को.===मेरे जूते ===> #नाजायज_सवर्णों को !शिकवा उन #दलितों से नहीं जो आज सड़कों पर हैं !====#शिकायत तो उन #नामर्द #नाजायज #नकारा ब्राह्मण — ठाकुर — बनियों से है जिन्हे बसपा ने सूअर बोला पर वो उनके साथ , बसपा ने चार जूते मारने को बोला पर वो उनके साथ !.................दीपक शर्मा
बसपा ने भगवान परशुराम जी को जूतो तले रौंदा पर वो उनके साथ थे ! और आज भी मेरे उन दलित भाइयों को भड़काकर भीड़ इन्ही ब्राह्मण ठाकुरों को सीधे गाली दे रही है और उस भीड़ का नेतृत्व एक ब्राह्मण कर रहा है !
वास्तव मे गाली के हकदार वो दलित नही बल्कि उन्हे भड़काने वाले सवर्ण हैं इस मामले मे भी उन्हे उकसाने को सबसे पहला बयान सतीश चन्द मिश्रा नाम के ब्राह्मण का था !! कोई दोराय नही कि दयाशंकर ने गलत बोला और कार्यवाही होनी चाहिये लेकिन सिर्फ दया पर ही क्यूँ बाकी को कौन देखेगा !!ऐसा प्रतीत होता है कि इन बसपा समर्थक सवर्णों ने दूध पीते समय मुह गलत दिशा मे घूम जाने की वजह से पी लिया था ! जिससे अब ये वास्तव मे ......व्यक्तित्व के प्राणी बन चुके हैं !
नोट:— सामान्य रूप से मै राजनीतिक पोस्ट नही करता लेकिन मामला एक वर्ग के खोखलेपन का होने की वजह से लिखना पड़ा ! .................अगर सहमति हो तो शेयर या कापी पेस्ट कुछ तो करो ! जय हिन्द !!..........दीपक शर्मा
गुजरात दलितों को लेकर घड़याली आसूं बहाने वालों के ऊपर सुशील मोदी का जबरदस्त प्रहार , गुजरात को छोड़ बिहार के दलितों की चिन्ता करें ! गुजरात की चिन्ता छोड़ कर पहले बिहार के दलितों की चिन्ता कीजिए। राजधानी पटना से सौ किमी की दूरी पर मुजफ्फरपुर के पारू में दो दलित युवकों के साथ मारपीट और उनके मुंह में पेशाब करने की शर्मनाक घटना घटी है। महागठबंधन के नेता और आपके ‘बड़े भाई’ के 15 साल के राज में एक-दो नहीं, सैंकड़ों दलितों का सामूहिक नरसंहार हुआ तो ‘छोटे भाई’ (आपके) के राज में सभी नरसंहारों के आरोपी साक्ष्य के अभाव में एक-एक कर हाई कोर्ट से बरी हो गए।
अरवल के लक्ष्मणपुर बाथे में 58 दलित, भोजपुर के बथानी टोला में 21 और औरंगाबाद के मियांपुर में 34 दलित मारे गए थे। इन सभी नरसंहारों के नामजद अभियुक्त जिन्हें निचली अदालत से सजा मिली थी नीतीश कुमार के राज में साक्ष्य के अभाव में रिहा हो गए। बड़े भाई ने पिछड़ों व दलितों को आरक्षण से वंचित कर पंचायत चुनाव करा लिया था।
बड़े और छोटे भाई हमेशा दलितों को अपमानित करते रहे हैं। महादलित जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री की कुर्सी से अपमानित कर हटाने वाले नीतीश कुमार की सरकार में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति से वंचित हजारों दलित छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ने के लिए बाध्य हो रहे हैं। वहीं, सरकार द्वारा प्रोन्नति में आरक्षण के मामले को कोर्ट में मजबूती से नहीं लड़े जाने के कारण हजारों दलित और आदिवासी प्रोन्नति से वंचित हैं। ऐसे में क्या इन ‘बड़े और छोटे भाइयों’ को दलितों के लिए घड़ियाली आंसू बहाने का कोई हक है?
बणिये बाभन ठाकुर तुम ससुर बोले तो बोले कैसे?
तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार।

दयाशंकर और मायावती वाले प्रकरण का गहन अध्ययन कर ऐसा महसूस हो रहा है कि मैं क्यों इस गंदगी में अपनी अच्छी सरल जिंदगी छोड़कर कूद गया।वड़ोदरा जैसा शांत अच्छा शहर, बढ़िया जॉब, ठीकठाक बिजनेस, माता पिता बहन, तमाम लंगोटिया यारों को छोड़ यूपी की कीचड़ वाली राजनीति में आ गया।
एक बेवकूफ नेता दूसरी अमीर महिला नेता को घटिया शब्द वैश्या कह रहा है अपनी पार्टी की सामाजिक समानता की सोच को नस्ट कर रहा है तो वो महिला नेता और उसके समर्थक उससे भी नीच निकले।
उस नेता की माँ बहन के बारे में संसद से सड़क तक घिनौनी बातें बोल गए।बसपाई जो कल नारे लगा रहे थे कि "दयाशंकर की माँ बहन को पेश करो"
उस नेता की माँ बहन के बारे में संसद से सड़क तक घिनौनी बातें बोल गए।बसपाई जो कल नारे लगा रहे थे कि "दयाशंकर की माँ बहन को पेश करो"
क्या उन नीचों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होनी चाहिए? दयाशंकर को तो तुरंत पदमुक्त कर दिया गया, पार्टी से निकाल भी दिया गया और उसको गिरफ्तार भी कर लिया गया है, हालांकि स्थिति को ध्यान में रखते हुए अभी सामने नहीं ला रहे।
पर मायावती और उसके समर्थकों ने जो घोर महिला अपमान किया उसकी सजा कब मिलेगी?
क्या दयाशंकर की बहन और माँ महिलाएं नहीं हैं? क्या महिला आयोग उनके लिये एक्शन नहीं लेगा?
मायावती चरित्रहीन है या नहीं मुझे नहीं पता पर वो और उसके समर्थक बद्तमीज बददिमाग जरूर हैं, दयाशंकर से भी कई गुना ज्यादा।थू है ऐसे नेताओं और ऐसी गंदी राजनीति पर।...........Abhishek Gupta
Akhand Shukla #जब_युवाओं_के_हित_में प्रदर्शन हो रहा था तो दयाशंकर जी कहीं उपस्थित नही दिखे चूँकि वे हमेशा इस कार्य में साथ देते थे। जब मैं उनसे कारण पूछने के लिए पहुँचा तो मैंने देखा कि #दयाशंकर_जी का हाथ #टूटा_था ........मायावती को अपशब्द मतलब पूरे दलित समाज को अपशब्द,तब तो दयाशंकर सिंह जी और उनके माँ-बहन-बेटी को अपशब्द पूरे स्वर्ण समाज का अपमान हुआ या इसमें भी आरक्षण हैं।।
Akhand Shukla बिलकुल भइया काहें नही सहमत होंगे,आखिर दलित दलित करके दौलत के पीछे भागने वाली का तो विरोध होगा ही।
Anil Thakur Vidrohi ..........................Ajit Singh, मेरे कुछ मित्र हैं । एक ख़ास प्रदेश के ।
वो सब पहले बड़े कट्टर जातिवादी होते थे । फिर 2013 - 14 में न जाने कैसे मोदी जी के नेतृत्व में हिंदुत्व की लहर चली तो जाति भूल हिन्दू हो गए ।उनके प्रदेश में इतिहास में पहली बार भाजपा की सरकार बनी ।CM उनकी जात का न हो के एक पंजाबी रिफ्यूजी बन गया ।बस , उन सबका हिंदुत्व पिछवाड़े में घुस गया और जातीय स्वाभिमान बवासीर की तरह उभर आया । बेचारा हिंदुत्व उस भारी भरकम जातीय स्वाभिमान या यूँ कहें कि घमंड में दब गया ।
आज वो सब बात बात में भाजपा सरकार को गरियाते हैं । संघ को गरियाते हैं । मोदी जी को गरियाते हैं । साथ साथ हमको भी गरियाते हैं । भाजपा को खाजपा बोलते हैं और हमको पहले अंधभक्त बोलते थे , आजकल अंडभक्त या सीधे सीधे आंडभक्त बोलते हैं ।मैंने उनकी मने उन सबकी नाराजगी की जड़ में जाने की कोशिश की ।नाराजगी ऊपरी तौर पे आरक्षण की मांग को ले के दिखती है ।पर वो सब निजी बातचीत में , बड़ी दृढ़ता से कहते हैं कि किसको चाहिए आरक्षण ....... हमको नहीं चाहिए आरक्षण ......... फिर क्यों बवाल कर रहे हो ? फिर क्यों धरना , प्रदर्शन , हड़ताल , बंद , और चक्काजाम कर रहे हो ? फिर क्यों आगजनी की रोहतक , सोनीपत और झज्झर में ? फिर क्यों किया इतना बड़ा आंदोलन ? जो चीज़ चाहिए ही नहीं उसके लिए इतना बड़ा बवाल क्यों किया ?
बोलते हैं कि वो तो राज कुमार सैनी के बयानों से नाराज हो के किया .........सत्य यह है कि भाई लोग confuse हैं ....... कुछ कहते हैं कि हमको आरक्षण चाहिए और कुछ कहते हैं कि नहीं चाहिए । पर इनके अवचेतन मस्तिष्क को टटोलिये तो इनकी सिर्फ एक व्यथा समझ आती है । वो ये कि मोदी जी और भाजपा ने CM हमारी जात का क्यों नहीं बनाया ? ये पंजाबी refugee ठक्कर क्यों बना दिया ? मैंने एक मित्र से कहा , अरे चलो बेशक पंजाबी refugee है तो क्या हुआ , है तो हिन्दू ही ?पर भाई लोगों का हिंदुत्व जातीय घमंड / स्वाभिमान के नीचे दबा कुचला कब का दम तोड़ चुका है ......... अब भाजपा को खाजपा कहते हैं , और हमको अंड भक्त .......
एक दिन तो एक मित्र UP में भाजपा को नेस्तनाबूद कर बाकायदा बसपा और BMW की ताजपोशी की कामना कर रहे थे ।
उन्ही में से एक संजय लीला भंसाली की प्रस्तावित फ़िल्म पद्मावती जिसमे उन्हें अलाउद्दीन ख़िलजी की प्रेयसी लिखा जा रहा है , उसका first day first show देखने की बात कर उसे superhit कराने का संकल्प ले रहा था .........इसे कहते हैं जातीय स्वार्थ के नीचे हिंदुत्व का दब जाना ।
आज हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या यही है । हम सब सिर्फ बाभन ठाकुर बनिया लाला जाट गूजर अहीर चमार जाटव बन के रह गए हैं , हिन्दू तो कभी बन ही नहीं पाये , और न भारतीय ही बन पाये । और जो हमारे मुक़ाबिल हैं , वो न भारतीय हैं , और न शेख सय्यद खान पठान जुलाहा कुरैशी शिया सुन्नी .......... वोट देते समय वो सिर्फ और सिर्फ मुसलमान होते हैं ..........
नहीं जागृत करेंगे , इसी तरह पददलित होंगे .......
गुलाम बनेंगे , गुलाम रहेंगे । जाति छोड़ हिन्दू बनो ........