क्या आईआईटियन और IRS आफिसर रहे केजरीवाल को 10वी पास जितेंदर तोमर उल्लू बना गया ?

तोमर ने इस आधार पर जमानत मांगी थी कि उन्हें दिल्ली विधानसभा के सत्र में शामिल होना है।
तोमर की जमानत याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि जनप्रतिनिधि और विधायक होने के नाते उनके खिलाफ आरोप ‘गंभीर प्रकृति’ के हैं।
मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रे ने कहा कि जांच के चरण को ध्यान में रखते हुए, इस मामले में दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के तौर पर नामांकन के लिए फर्जी विधि डिग्री और दस्तावेज का उपयोग और आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत अपराध शामिल है और जिन सह आरोपियों, साथियों के अपराध में सहभागिता की आशंका है, वे अब तक पकड़े नहीं गए हैं। इसलिए मैं आरोपी तोमर की जमानत याचिका स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हूं।
अदालत ने कहा है कि जनप्रतिनिधि और निर्वाचित विधायक के तौर पर उनके खिलाफ आरोपों की गंभीरता और अधिवक्ता के तौर पर नामांकन के लिए कथित फर्जी दस्तावेजों के उपयोग को देखते हुए जमानत याचिका खारिज की जाती है। तीन घंटे लंबी सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि अगर तोमर को जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
तोमर की जमानत याचिका का विरोध करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी ने अवध विश्वविद्यालय की आरटीआई के जवाब में फर्जीवाड़ा किया जो दिखाता है कि एक विधायक के तौर पर वह प्रभावशाली व्यक्ति हैं। श्रीवास्तव ने दावा किया कि फर्जी डिग्री मामले के प्रकाश में आने के बाद तोमर विश्वविद्यालय और कालेज अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क में थे।

                
उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए अभियोजक ने कहा कि जन प्रतिनिधियों को मिला संसदीय विशेषाधिकार उनके काम में सहयोग करने के लिए है, यह अन्य नागरिकों की तुलना में एक अलग श्रेणी नहीं बनाता। श्रीवास्तव ने कहा कि कानून अपराधी को अलग तरह के व्यवहार की अनुमति नहीं देता। उन्होंने तोमर की जमानत याचिका खारिज करने का अनुरोध करते हुए कहा कि जांच शुरूआती चरण में है और साजिश में शामिल अन्य सहयोगियों को पकड़ा जाना है।
तोमर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से दस्तावेजी सबूतों पर आधारित है। पुलिस ने न्यायिक हिरासत की मांग की जिसका अर्थ यह हुआ कि आरोपी से और पूछताछ नहीं की जानी है इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।