कुछ अवार्ड विजेता कवि पुरस्कार पाने के हक़दार ही नहीं थे , उनका अवार्ड लौटाना न्याय संगत है !

   
कालजयी रचनाएं वाले  अवार्ड विजेता उदय प्रकाश का मोदी विरोध में साहित्य अकादमी का अवार्ड लौटाना न्याय संगत ही नहीं लाज़मी है ! एइसे कवि ये पुरस्कार पाने के हक़दार पात्र नहीं है l 

Puneet Gupta : ये तथाकथित बुद्धिजीवी  एवं साहित्यकार कोरी लफ़्फ़ाज़ी और पूरी चाटुकारी करते है ।इनकी मानसिक सोच इनके ही शब्दों में "मैं हूँ असल में पैरासाइट लहू ग़रीबों का पीता।उनकी हालत लिख करके मैं अकादमी अवार्ड जीता।आज है मौक़ा वापस कर दूं यह अवार्ड बहाने से।खोयी ख्याति मिलेगी मुझको पुरस्कार लौटाने से।"

नाम :- उदय प्रकाश .......काम :- कविताऐं लिखना....ईनाम:- साहित्य अकादमी 2010

         





चलो मूड थोडा लाइट करते हैं। पाठकों की खास डिमांड पर प्रस्तुत हैं अवार्ड विजेताओं की कालजयी रचनाएं। हंस हंस के किसी का हार्ट फ़ैल हो गया तो हमारी जिम्मेदारी नहीं।
हाॅल आॅफ फेम:- 2015 में मोदी विरोध में साहित्य अकादमी का अवार्ड लौटाना! अगर एैसी कविताओं के लिऐ साहित्य अकादमी मिलता है, तो भाई फेसबुक पर तो कई शायर, कविवर थोक के भाव पड़े हैं !खैर मज़े लिजिऐ इन महाशय की कविताओं के !इनको पढ़ कर हँसना मना है हा सिर पिट सकते है !! 
via-Amandeep singh 





योगेश उनियाल : आप भक्त हो। आपको क्या समझ आएगा इन कालजयी रचनाओं का मर्म ।
             इतने गंभीर हास्य को समझने के लिए कांग्रेसी/ कोमरेडी दिमाग होना चाहिए।